विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में सेवा और समर्पण की अनूठी मिसाल; देवघर के तिवारी चौक पर भागलपुर के विप्र बंधुओं ने संभाली कांवरिया सेवा शिविर की कमान

भागलपुर/देवघर, वरीय संवाददाता: देवभूमि बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर में इन दिनों सावन मास के पावन अवसर पर आस्था का महाकुंभ सजा हुआ है। देश के कोने-कोने से लाखों शिवभक्त कठिन पैदल यात्रा तय कर बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंच रहे हैं। श्रावणी मेले के इस भव्य और दिव्य आयोजन के दौरान कांवरियों की सेवा के लिए जगह-जगह शिविर लगाए गए हैं। इसी क्रम में, देवघर के प्रमुख पड़ाव स्थल तिवारी चौक पर भागलपुर से पहुंचे विप्र समाज और स्वयंसेवकों ने कांवरिया सेवा शिविर की कमान पूरी मुस्तैदी से संभाल ली है। भागलपुर के प्रबुद्ध एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा संचालित इस शिविर में दूर-दराज से आने वाले शिवभक्तों की सेवा के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं, जिसकी चौतरफा सराहना हो रही है।

तिवारी चौक पर शिविर की शुरुआत: विप्र समाज की अनूठी पहल

श्रावणी मेले के दौरान देवघर आने वाले कांवरियों को किसी प्रकार की असuविधा न हो, इसके लिए विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों द्वारा सेवा शिविर लगाए जाते हैं:

भागलपुर के विप्रजनों ने संभाला मोर्चा: मेला क्षेत्र के अति व्यस्त और महत्वपूर्ण मार्ग माने जाने वाले तिवारी चौक पर भागलपुर के विप्र समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए सेवा कार्यों का श्रीगणेश किया। कांवरियों की सेवा को सबसे बड़ा धर्म मानते हुए यहाँ चिकित्सा, विश्राम, खान-पान और प्राथमिक उपचार जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

शिवभक्तों का स्वागत: जैसे ही सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का जल लेकर कांवरिया देवघर की सीमा में प्रवेश करते हैं और तिवारी चौक के पास पहुंचते हैं, सेवा शिविर के स्वयंसेवक पूरी ऊर्जा और आत्मीयता के साथ "बोल बम" के जयकारों के साथ उनका स्वागत करते हैं।

कांवरिया सेवा शिविर में मिलने वाली प्रमुख सुविधाएं

लंबी और कठिन पदयात्रा करके आने वाले शिवभक्तों की शारीरिक थकान को दूर करने और उन्हें राहत पहुँचाने के लिए इस शिविर में विशेष इंतजाम किए गए हैं:

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा: लगातार पैदल चलने के कारण कई कांवरियों के पैरों में छाले पड़ जाते हैं, मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है या फिर थकान के कारण चक्कर आने लगते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए शिविर में डॉक्टरों और चिकित्सकीय सहयोगियों की टीम मुस्तैद है। यहाँ मुफ्त दवाइयां, मलहम, बैंडेज, ओआरएस और ग्लूकोज पानी की पुख्ता व्यवस्था की गई है।

विश्राम और ठहरने की व्यवस्था: कांवरियों के लिए तिवारी चौक के समीप शिविर में शेड, दरी और गद्दे की व्यवस्था की गई है, जहाँ शिवभक्त कुछ देर विश्राम कर अपनी आगे की यात्रा तरोताजा होकर शुरू कर सकते हैं।

शुद्ध जल और फलाहार: कांवरियों के लिए शुद्ध पेयजल, चाय और हल्के फलाहार की सतत व्यवस्था की गई है, ताकि वे ऊर्जावान बने रहें।

अति संवेदनशील और रणनीतिक स्थल है 'तिवारी चौक'

देवघर मेला क्षेत्र में तिवारी चौक का प्रशासनिक और व्यवस्थागत रूप से काफी महत्व है:

यातायात और भीड़ नियंत्रण: यह वह चौराहा है जहाँ से बाबा मंदिर की ओर जाने वाले मार्गों पर श्रद्धालुओं का दबाव काफी अधिक होता है। यहाँ से हज़ारों की संख्या में कांवरिया प्रतिदिन गुजरते हैं।

प्रशासन के साथ समन्वय: भागलपुर से पहुंचे विप्रजनों और सेवा शिविर के आयोजकों ने स्थानीय जिला प्रशासन और पुलिस बल के साथ तालमेल बिठाकर यह सुनिश्चित किया है कि शिविर के कारण यातायात बाधित न हो, बल्कि प्रशासन को भी भीड़ प्रबंधन में सहयोग मिले।

शिवभक्तों और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

तिवारी चौक पर भागलपुर के विप्र समाज द्वारा संचालित इस सेवा शिविर को लेकर कांवरियों में भारी उत्साह और कृतज्ञता का भाव देखा जा रहा है:

श्रद्धालुओं के अनुभव: बिहार, बंगाल, उत्तर प्रदेश और झारखंड के विभिन्न हिस्सों से आ रहे कांवरियों ने बताया कि सफर की थकान के बीच जब उन्हें तिवारी चौक पर ऐसा अपनापन और सेवा भाव मिलता है, तो उनकी आधी से ज्यादा पीड़ा स्वतः समाप्त हो जाती है।

आयोजकों का संकल्प: शिविर का संचालन कर रहे विप्र प्रतिनिधियों ने कहा कि “देवाधिदेव महादेव की कृपा से हमें बाबा के भक्तों की सेवा करने का जो यह सुअवसर प्राप्त हुआ है, वह हमारे लिए सबसे बड़ा सौभाग्य है। मेला समाप्ति तक यह सेवा अनवरत जारी रहेगी।”

भागलपुर के विप्र समाज द्वारा देवघर के तिवारी चौक पर संभाली गई इस सेवा शिविर की कमान भारतीय संस्कृति के उस मूल मंत्र को चरितार्थ करती है, जिसमें 'अतिथि देवो भव:' और 'शिव सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है' का संदेश निहित है। प्रशासनिक व्यवस्थाओं के साथ-साथ ऐसे सामाजिक और धार्मिक सेवा शिविर श्रावणी मेले को और अधिक सुरक्षित, सुगम एवं मानवीय बनाते हैं, जिससे हर कांवरिया बाबाधाम की अपनी इस यात्रा को जीवनभर के लिए एक सुखदस्मृति के रूप में संजोकर ले जाता है।