हौसले और न्याय की जंग की एक अनूठी मिसाल; फोर्थ स्टेज के कैंसर से जूझ रहीं सोनम भारती की पुलिस के उच्चाधिकारियों से गुहार—"आरोपियों का स्पीडी ट्रायल कराकर दिलाई जाए सजा"; ठगी के खिलाफ उनकी यह लड़ाई बनी अन्य पीड़ितों के लिए प्रेरणा
भागलपुर, मुख्य संवाददाता: जिंदगी और मौत के बीच झूलती एक बहादुर महिला की संघर्ष गाथा इन दिनों भागलपुर से लेकर पूरे राज्य के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। भागलपुर की रहने वाली सोनम भारती वर्तमान में कैंसर जैसी लाइलाज और भयानक बीमारी के 'चौथे चरण' (Fourth Stage Cancer) से पीड़ित हैं। शरीर का एक-एक अंग इस गंभीर बीमारी से जूझ रहा है और डॉक्टर भी उम्मीदें छोड़ चुके हैं, लेकिन सोनम के हौसले और न्याय पाने की जिद ने मौत को भी जैसे चुनौती दे डाली है। अपनी अंतिम सांसें गिन रहीं सोनम ने हाल ही में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को एक भावुक और गंभीर पत्र लिखकर ठगी के आरोपियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल (Speedy Trial) चलाकर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की है। उनका यह संघर्ष केवल खुद के लिए न्याय की गुहार नहीं है, बल्कि उन तमाम ठगी के शिकार हुए बेसहारा लोगों के लिए एक मिसाल बन गया है, जो डरकर चुप बैठ जाते हैं।
क्या है पूरा मामला? कैसे रची गई थी ठगी की साजिश?
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब सोनम भारती और उनके परिवार को एक सुनियोजित ठगी का शिकार बनाया गया। शातिर ठगों ने धोखाधड़ी कर उनकी गाढ़ी कमाई और संपत्ति हड़प ली। इस बड़े आर्थिक धोखे ने न केवल सोनम के परिवार को सड़क पर ला दिया, बल्कि उनके जीवनभर की जमा पूंजी भी छीन ली।
जब सोनम ने इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई और कानूनी रास्ते का सहारा लिया, तो आरोपियों ने उन्हें और उनके परिवार को दबाने और धमकाने का हर संभव प्रयास किया। हालांकि, पुलिस में मामला तो दर्ज हो गया, लेकिन कानूनी प्रक्रियाओं की लंबी और सुस्त रफ्तार के कारण आरोपी कानून की गिरफ्त से बाहर खुलेआम घूम रहे हैं। इस वित्तीय धोखाधड़ी के मानसिक आघात और तनाव ने सोनम की सेहत पर बेहद बुरा असर डाला, जिसके चलते वे जानलेवा कैंसर की चपेट में आ गईं।
कैंसर के चौथे चरण में भी नहीं टूटी हिम्मत, पुलिस अधिकारियों को लिखा पत्र
वर्तमान में जब कैंसर अपने अंतिम और सबसे खतरनाक पड़ाव (स्टेज-4) पर है, तब भी सोनम भारती के जज्बे में कोई कमी नहीं आई है। वे जानती हैं कि उनका जीवन अब कुछ ही दिनों या महीनों का मेहमान है, लेकिन वे यह कतई नहीं चाहतीं कि उनके जाने के बाद उनके अपराधी और ठग आराम से जिंदगी बिताएं।
इसी उद्देश्य के साथ सोनम ने पुलिस के वरीय अधिकारियों (डीआईजी, एसएसपी और अन्य उच्चाधिकारियों) को एक पत्र प्रेषित किया है। पत्र में उन्होंने बेहद दर्दभरे लेकिन दृढ़ लहजे में लिखा है:
स्पीडी ट्रायल की मांग: अदालत में मामलों के लंबे खिंचने का फायदा उठाकर आरोपी बच निकलते हैं, इसलिए उनके मामले का स्पीडी ट्रायल (त्वरित विचारण) चलाया जाए।
मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत करने की गुहार: उन्होंने पुलिस प्रशासन से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि आरोपियों के खिलाफ इतने ठोस सबूत पेश किए जाएं कि अदालत उन्हें जल्द से जल्द कठोरतम सजा सुना सके।
न्याय की आस: पत्र में उन्होंने लिखा है कि वे जीते-जी अपने साथ हुए धोखे के दोषियों को सलाखों के पीछे देखना चाहती हैं, ताकि उन्हें मरने के बाद भी मानसिक शांति मिल सके।
अन्य पीड़ितों के लिए बनीं प्रेरणा का स्रोत
सोनम भारती की यह लड़ाई अब सिर्फ व्यक्तिगत नहीं रह गई है। समाज में अनगिनत ऐसे लोग होते हैं जो ठगी, धोखाधड़ी या अन्य अपराधों का शिकार होने के बाद पुलिस-प्रशासन के चक्कर काटते-काटते थक जाते हैं और अंततः न्याय की उम्मीद छोड़ बैठते हैं। ऐसे समय में, फोर्थ स्टेज के कैंसर से जूझती हुई एक महिला का यह अटूट साहस समाज के लिए एक बड़ा संदेश दे रहा है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं, महिला संगठनों और आम नागरिकों ने सोनम की इस इच्छाशक्ति की भूरी-भूरी प्रशंसा की है। लोग कह रहे हैं कि जहाँ गंभीर बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति बिस्तर पर लाचार हो जाता है, वहीं सोनम ने अपनी बीमारी को अपनी कमजोरी नहीं बल्कि अपनी ताकत बनाकर अपराधियों के खिलाफ शंखनाद कर दिया है।
पुलिस प्रशासन पर बढ़ा दबाव, कार्रवाई की उम्मीद
सोनम भारती का पत्र सामने आने के बाद भागलपुर पुलिस प्रशासन पर भी नैतिक दबाव बढ़ गया है। पुलिस के उच्चाधिकारियों ने इस मामले को बेहद संवेदनशीलता और गंभीरता से लिया है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस महकमा इस बात की समीक्षा कर रहा है कि कैसे कानूनी प्रक्रिया में तेजी लाकर आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट को मजबूत किया जाए और अदालत में स्पीडी ट्रायल के माध्यम से जल्द से जल्द न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
भागलपुर की सोनम भारती की यह कहानी सिर्फ एक ठगी या बीमारी की दास्तान नहीं है, बल्कि यह अन्याय के खिलाफ एक इंसाफ की अधूरी या कहें कि मुकम्मल होती हुई लड़ाई है। स्टेज-4 कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी से लड़ते हुए भी न्याय के लिए उनकी यह अंतिम पुकार हर उस व्यक्ति के दिल को झकझोर देती है जो सिस्टम से लड़ रहा है। यदि प्रशासन त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें और उनके परिवार को न्याय दिलाता है, तो यह न केवल सोनम की आत्मा को शांति देगा, बल्कि न्याय व्यवस्था पर आम जनता के विश्वास को और अधिक मजबूत करेगा।