श्रावणी मेले के दौरान कांवरियों की सुरक्षा के लिए प्रशासन का पुख्ता कदम; सुल्तानगंज के गंगा घाटों पर बैरिकेडिंग के साथ लगाई गई सुरक्षा जालियां, डीप वाटर जोन में जाने पर रहेगी पूरी पाबंदी
भागलपुर, विशेष संवाददाता: सिल्क सिटी भागलपुर के सुल्तानगंज स्थित पावन उत्तरवाहिनी गंगा तट पर विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले की शुरुआत के साथ ही प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए एक अत्यंत सराहनीय और सुरक्षात्मक कदम उठाया है। मेला क्षेत्र में उमड़ने वाली लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ और स्नान के दौरान होने वाली संभावित अनहोनी को रोकने के लिए जिला प्रशासन और नगर परिषद द्वारा गंगा नदी के घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इसके तहत मुख्य स्नान घाटों पर मजबूत बैरिकेडिंग (Bricading) करने के साथ-साथ सुरक्षा जालियां (Safety Nets) भी स्थापित की गई हैं, ताकि कोई भी श्रद्धालु बहकर गहरे पानी या जलधारा के खतरनाक क्षेत्र में न जा सके।
गंगा घाटों पर सुरक्षा की दृष्टि से किए गए विशेष इंतजाम
श्रावणी मेले के दौरान देश-विदेश से आने वाले शिवभक्त अजगैबीनाथ धाम और नमामि गंगे घाट पर पवित्र स्नान करने के बाद ही अपनी कांवर यात्रा की शुरुआत करते हैं। घाटों पर अत्यधिक भीड़ और जलस्तर के उतार-चढ़ाव को देखते हुए प्रशासन किसी भी प्रकार की जोखिम लेने के मूड में नहीं है।
बैरिकेडिंग और जालियों की व्यवस्था: सुरक्षा घेरे को पुख्ता करने के लिए गंगा नदी के अंदर उपयुक्त दूरी तक मजबूत बांस-बल्लों और लोहे के पाइपों के सहारे बैरिकेडिंग की गई है। इस बैरिकेडिंग के साथ विशेष प्रकार की मजबूत सुरक्षा जालियां बांधी गई हैं, जो एक सीमा रेखा का कार्य करती हैं।
गहरे पानी (Deep Water Zone) से बचाव: इन जालियों और बैरिकेडिंग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्नान करते समय कोई भी श्रद्धालु अनजाने में उस सीमा से आगे न बढ़े, जहां पानी का बहाव तेज हो या गहराई अधिक हो। यह तकनीक जल के भीतर डूबने की घटनाओं को रोकने में बेहद कारगर साबित हो रही है।
गोताखोरों और एनडीआरएफ (NDRF/SDRF) की तैनाती
केवल बैरिकेडिंग और जालियां ही नहीं, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने जल पुलिस और आपदा प्रबंधन बलों को भी पूरी तरह मुस्तैद कर रखा है:
एसडीआरएफ (SDRF) और गोताखोरों की मुस्तैदी: नमामि गंगे घाट से लेकर अजगैबीनाथ घाट तक मोटरबोट के साथ एसडीआरएफ की टीमें और प्रशिक्षित स्थानीय गोताखोर लगातार गश्त कर रहे हैं। यदि कोई श्रद्धालु गलती से नियम तोड़कर आगे भी जाता है, तो तुरंत लाउडस्पीकर के माध्यम से चेतावनी दी जाती है।
वॉच टॉवर और सीसीटीवी से निगरानी: घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था पर पैनी नजर रखने के लिए ऊंचे वॉच टॉवर बनाए गए हैं, जिन पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही पूरे घाट परिसर को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रखा गया है ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।
श्रद्धालुओं के लिए जारी किए गए दिशा-निर्देश
प्रशासन की ओर से लगातार लाउडस्पीकर और सूचना पट्टों के माध्यम से कांवरियों और स्नानार्थियों के लिए निर्देश जारी किए जा रहे हैं:
तय सीमा के भीतर ही करें स्नान: प्रशासन ने सभी शिवभक्तों से अपील की है कि वे बैरिकेडिंग और जालियों के दायरे के भीतर ही रहकर पवित्र स्नान करें। गहरे पानी में जाकर सेल्फी लेने या स्टंट करने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है।
बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान: स्नान के दौरान अपने साथ आने वाले छोटे बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है, क्योंकि भीड़भाड़ में बच्चों के बिछड़ने या पानी के पास फिसलने का जोखिम रहता है।
सुल्तानगंज के गंगा घाटों पर सुरक्षित स्नान के लिए की गई यह बैरिकेडिंग और जाली लगाने की व्यवस्था इस बात का प्रमाण है कि जिला प्रशासन इस बार के श्रावणी मेले में जन-सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर और सतर्क है। प्रशासनिक मुस्तادियों और सुरक्षा के इन पुख्ता इंतजामों के चलते श्रद्धालु बिना किसी डर या आशंका के अपनी आस्था की डुबकी लगा पा रहे हैं, जिससे उनकी यह पवित्र कांवर यात्रा और अधिक सुरक्षित और मंगलमय बन रही है।