मारवाड़ी कॉलेज में एसडीआरएफ (SDRF) की अनूठी पहल; विद्यार्थियों और शिक्षकों को आपदा प्रबंधन और फायर सेफ्टी के गुर सिखाए, मॉक ड्रिल के जरिए दिए सुरक्षा के व्यावहारिक टिप्स

भागलपुर, विशेष संवाददाता: सिल्क सिटी भागलपुर के प्रतिष्ठित और अंग क्षेत्र के अग्रणी शिक्षण संस्थान मारवाड़ी कॉलेज (Marwari College) परिसर में आपदा प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर एक उच्चस्तरीय जागरूकता सह प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। राज्य आपदा मोचन बल (SDRF - State Disaster Response Force) की विशेषज्ञ टीम द्वारा कॉलेज के विद्यार्थियों, शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों को अचानक लगने वाली आग, भूकंप या अन्य आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा विद्यार्थियों को यह सिखाना था कि किसी भी अप्रिय दुर्घटना या आपदा के समय घबराने के बजाय किस तरह संयम से काम लेते हुए अपनी और दूसरों की जान बचाई जा सकती है।

एनसीसी, एनएसएस और विद्यार्थियों की भारी उपस्थिति

प्रांगण में आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत सुबह कॉलेज के प्राचार्य, प्रोफेसरों और एसडीआरएफ की कमांडेंट टीम के स्वागत के साथ हुई।

व्यापक सहभागिता: इस कार्यक्रम में मारवाड़ी कॉलेज के विभिन्न संकायों के सैकड़ों छात्र-छात्राओं के साथ-साथ एनसीसी (NCC) और एनएसएस (NSS) के स्वयंसेवकों ने बेहद उत्साह के साथ हिस्सा लिया।

प्रशासनिक दृष्टिकोण: कॉलेज के प्रधानाचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिक समय में किताबी शिक्षा के साथ-साथ जीवन कौशल और सुरक्षा संबंधी जानकारियां होना प्रत्येक विद्यार्थी के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि मारवाड़ी कॉलेज अपने परिसरों की सुरक्षा को लेकर हमेशा से गंभीर रहा है और एसडीआरएफ जैसी प्रशिक्षित एजेंसियों का सहयोग मिलना कॉलेज के लिए गौरव की बात है।

एसडीआरएफ टीम द्वारा 'फायर सेफ्टी' पर विस्तृत प्रशिक्षण

प्रशिक्षण सत्र के दौरान एसडीआरएफ के अनुभवी जवानों और अधिकारियों ने थ्योरी के साथ-साथ प्रैक्टिकल (व्यावहारिक) प्रदर्शन कर आग से जुड़ी हर बारीक बात समझाई:

आग के प्रकार और वर्गीकरण: विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को समझाया कि आग केवल एक तरह की नहीं होती। बिजली के शॉर्ट सर्किट से लगने वाली आग (Class C), लकड़ी-कागज से लगने वाली आग (Class A) और रसोई गैस या पेट्रोल-डीजल जैसी ज्वलनशील तरल पदार्थों से लगने वाली आग (Class B) के बुझाने के तरीके बिल्कुल अलग होते हैं। गलत तरीके से पानी डालने पर आग और भड़क सकती है।

अग्निशामक यंत्रों (Fire Extinguishers) का उपयोग: एसडीआरएफ की टीम ने कॉलेज परिसर में ही गैस सिलिंडर और कृत्रिम रूप से आग जलाकर 'PASS' फॉर्मूला का लाइव डेमो दिखाया:

P (Pull): पिन खींचें।

A (Aim): आग के आधार (Base) पर निशाना लगाएं।

S (Squeeze): लीवर को दबाएं।

S (Sweep): दोनों तरफ झाड़ू की तरह घुमाएं।

विद्यार्थियों ने खुद आगे बढ़कर अग्निशामक यंत्रों को चलाकर आग पर काबू पाने का अभ्यास किया, जिससे उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ गया।

भूकंप और अन्य आपदाओं से बचाव के उपाय

फायर सेफ्टी के अलावा, एसडीआरएफ की टीम ने भूकंप (Earthquake) और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर भी विस्तार से चर्चा की:

'ड्रॉप, कवर एंड होल्ड ऑन' (Drop, Cover and Hold On): भूकंप के झटके महसूस होते ही घबराकर भागने के बजाय तुरंत किसी मजबूत डेस्क या टेबल के नीचे छुप जाने, सिर को हाथों से ढकने और टेबल के पाए को मजबूती से पकड़ने का अभ्यास कराया गया।

प्राथमिक उपचार (First Aid): आपदा के समय यदि कोई व्यक्ति घायल हो जाता है, तो उसे तुरंत अस्पताल ले जाने से पहले प्राथमिक उपचार (First Aid) कैसे दिया जाए, जैसे ब्लीडिंग रोकना, कृत्रिम सांस देना और स्ट्रेचर का उपयोग करना—इन सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं का प्रशिक्षण भी छात्रों को दिया गया।

छात्रों और शिक्षकों का अनुभव

शिविर में भाग लेने वाले विद्यार्थियों ने इस पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा की। कई छात्र-छात्राओं ने कहा कि उन्होंने किताबों में या टीवी पर तो फायर सेफ्टी के बारे में सुना था, लेकिन आज पहली बार अपनी आंखों के सामने आग बुझाने और लाइव डेमो देखने का अवसर मिला। यह ज्ञान न केवल कॉलेज परिसर में बल्कि उनके घरों और दैनिक जीवन में भी बेहद उपयोगी साबित होगा।

मारवाड़ी कॉलेज में एसडीआरएफ द्वारा आयोजित यह फायर सेफ्टी और आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण शिविर इस बात का प्रमाण है कि शिक्षण संस्थान अब केवल शैक्षणिक ज्ञान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे छात्रों को जीवन की वास्तविक चुनौतियों और आपदाओं से निपटने के लिए भी पूरी तरह तैयार कर रहे हैं। ऐसा व्यावहारिक प्रशिक्षण समाज में एक सुरक्षित और जागरूक संस्कृति का निर्माण करने में बेहद अहम भूमिका निभाता है।