मुजफ्फरपुर में प्रशासनिक लापरवाही: एक महीने से आईडी न मिलने के कारण 26,000 से अधिक शिक्षकों का वेतन अटका, परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ ने दी आंदोलन की चेताव
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में प्रशासनिक सुस्ती और तकनीकी बाधाओं के कारण शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (Establishment / DPO) को पिछले एक महीने से आवश्यक डिजिटल आईडी (ID) और पासवर्ड प्राप्त नहीं होने के कारण जिले के 26,000 से अधिक प्रारंभिक शिक्षकों का वेतन बुरी तरह अटक गया है। सावन और त्योहारी सीजन के मुहाने पर खड़े इन शिक्षकों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है।
इस गंभीर लापरवाही के खिलाफ शिक्षकों में भारी आक्रोश है। परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही वेतन भुगतान की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो शिक्षक सड़क पर उतरकर जोरदार आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
समस्या की जड़: एक महीने से आईडी और पासवर्ड का अभाव
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रशासनिक फेरबदल या नई तकनीकी प्रणालियों के लागू होने के बाद से जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) कार्यालय को वेतन आहरण और वितरण से जुड़ा अधिकृत यूजर आईडी और डिजिटल पासवर्ड प्राप्त नहीं हुआ है।
तकनीकी अड़चन: शिक्षा विभाग के नए नियमानुसार और ऑनलाइन ट्रेजरी सिस्टम के तहत बिना अधिकृत आईडी के शिक्षकों के वेतन विपत्र (Salary Bills) जनरेट और पास नहीं किए जा सकते।
विभाग की मजबूरी: शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि तकनीकी रूप से जब तक डीओपी (DPO) कार्यालय को आईडी नहीं मिलती, तब तक किसी भी शिक्षक के खाते में वेतन की राशि ट्रांसफर करना तकनीकी रूप से असंभव है।
फाइलें दफ्तर में कैद: पिछले एक महीने से वेतन से जुड़ी फाइलें और बिल कार्यालय की टेबल पर धूल फांक रहे हैं, लेकिन उच्च स्तर से तकनीकी अनुमति या आईडी जनरेट न होने के कारण पूरा सिस्टम ठप पड़ा है।
26,000 से अधिक शिक्षकों और उनके परिवारों पर आर्थिक संकट
इस एक महीने की प्रशासनिक देरी ने मुजफ्फरपुर जिले के 26,000 से अधिक नियोजित और नियमित प्रारंभिक शिक्षकों के परिवारों की आर्थिक कमर तोड़ दी है।
कर्ज लेने की मजबूरी: महीने की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन शिक्षकों के खाते खाली हैं। घर का खर्च चलाने, बच्चों की स्कूल फीस भरने और बैंक के लोन की ईएमआई चुकाने के लिए शिक्षकों को रिश्तेदारों या ब्याज पर पैसे उधार लेने पड़ रहे हैं।
त्योहारी सीजन में मायूसियां: आने वाले दिनों में कई प्रमुख त्योहार और व्रत आने वाले हैं। ऐसे समय में वेतन न मिलने के कारण शिक्षकों के घरों में मायूसी का माहौल है।
मानसिक तनाव: लगातार समय पर वेतन न मिलने या इस तरह की प्रशासनिक अड़चनों के कारण शिक्षक मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं, जिसका सीधा असर उनकी शिक्षण कार्यक्षमता पर भी पड़ रहा है।
परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ का कड़ा रुख और चेतावनी
मामले की गंभीरता को देखते हुए परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के नेतृत्व में शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल मुखर हो गया है। संघ के पदाधिकारियों ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) से मुलाकात कर तत्काल इस समस्या के समाधान की मांग की है।
संघ के जिलाध्यक्ष और प्रमुख नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि "प्रशासन की सुस्ती और तकनीकी लचर व्यवस्था का खामियाजा शिक्षक क्यों भुगतें? एक महीने से आईडी न मिलना और इसके नाम पर 26,000 परिवारों को भूखा रखना प्रशासनिक अराजकता को दर्शाता है।"
संघ की प्रमुख मांगें और अल्टीमेटम:
तत्काल आईडी जारी हो: राज्य मुख्यालय स्तर से तुरंत समन्वय स्थापित कर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को अधिकृत आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराया जाए।
युद्धस्तर पर वेतन भुगतान: आईडी मिलते ही अगले 48 घंटों के भीतर सभी 26,000 शिक्षकों के खाते में पेंडिंग वेतन की राशि भेजी जाए।
आंदोलन की चेतावनी: यदि अगले कुछ दिनों में शिक्षकों के खाते में वेतन नहीं पहुँचा, तो परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ जिला शिक्षा कार्यालय के समक्ष विशाल धरना-प्रदर्शन और तालाबंदी करने के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया
जब इस मामले को लेकर मीडिया ने शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क किया, तो उनकी तरफ से यह आश्वासन दिया गया कि तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए राज्य मुख्यालय को पत्र लिख दिया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी टीम इस पर काम कर रही है और जल्द ही आईडी जनरेट होने की उम्मीद है। हालांकि, अधिकारी यह स्पष्ट करने से बचते नजर आए कि आखिर एक महीने तक इस साधारण सी तकनीकी प्रक्रिया में इतनी लंबी देरी क्यों हुई।
मुजफ्फरपुर में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को एक महीने से आईडी न मिलने के कारण 26,000 से अधिक शिक्षकों के वेतन का लटकना प्रशासनिक व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। शिक्षा और शिक्षकों को समाज की रीढ़ माना जाता है, लेकिन यदि उन्हें अपनी मेहनत की कमाई के लिए इस तरह संघर्ष करना पड़े, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ की चेतावनी के बाद अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस गंभीर संकट को कितनी जल्दी दूर करता है और शिक्षकों को राहत पहुँचाता है।