एसकेएमसीएच में नवजात को सौंपने के लिए रिश्वत मांगने का आरोप, नर्सिंग स्टाफ पर ₹3,000 मांगने का आरोप, जांच के आदेश
मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर स्थित श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसकेएमसीएच) से भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है। एक नवजात बच्ची के परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ ने बच्ची को सौंपने के लिए उनसे पैसे की मांग की। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ और सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए।
परिजनों के अनुसार, नर्सिंग स्टाफ ने नवजात को सौंपने के बदले ₹3,000 की मांग की। काफी बातचीत के बाद परिजनों ने ₹1,700 दे दिए, लेकिन इसके बावजूद बच्ची उन्हें नहीं सौंपी गई। इससे नाराज परिजनों ने अस्पताल में विरोध शुरू कर दिया और मामला बढ़ते-बढ़ते पुलिस तक पहुंच गया।
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद कथित रूप से लिए गए ₹1,700 परिजनों को वापस कर दिए गए। घटना को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल अधीक्षक ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
परिजनों ने लगाए अवैध वसूली के आरोप
परिजनों का कहना है कि बच्ची के जन्म के बाद उन्होंने अस्पताल की सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली थीं। जब वे नवजात को अपने साथ ले जाने के लिए नर्सिंग स्टाफ के पास पहुंचे तो उनसे कथित रूप से ₹3,000 की मांग की गई।
परिजनों ने बताया कि उन्होंने इतनी राशि देने में असमर्थता जताई। इसके बाद काफी बातचीत के बाद ₹1,700 दिए गए, लेकिन फिर भी बच्ची को तुरंत नहीं सौंपा गया।
इससे नाराज होकर उन्होंने नर्सिंग स्टाफ पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए विरोध शुरू कर दिया।
अस्पताल में हुआ हंगामा
घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल में मौजूद अन्य मरीजों के परिजन और लोग भी वहां एकत्र हो गए। देखते ही देखते नर्सिंग स्टाफ और परिजनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।
कुछ समय के लिए अस्पताल के वार्ड में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई लोगों ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों में इस तरह की अवैध वसूली की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं, जिससे गरीब मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
अस्पताल के सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन मामला तब शांत हुआ जब पुलिस मौके पर पहुंची।
पुलिस के हस्तक्षेप से मामला शांत
घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस अस्पताल पहुंची और दोनों पक्षों से बातचीत की।
पुलिस अधिकारियों ने मामले को शांत कराने का प्रयास किया और बातचीत के दौरान कथित रूप से लिए गए ₹1,700 परिजनों को वापस करा दिए गए।
रुपये वापस मिलने के बाद तत्काल विवाद तो शांत हो गया, लेकिन परिजनों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
अस्पताल अधीक्षक ने दिए जांच के आदेश
घटना की गंभीरता को देखते हुए एसकेएमसीएच के अधीक्षक ने पूरे मामले की जांच के आदेश जारी किए हैं।
जांच में यह पता लगाया जाएगा कि क्या वास्तव में किसी कर्मचारी ने नियमों के विरुद्ध पैसे की मांग की या स्वीकार किए। इसके लिए परिजनों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि यदि जांच में कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी अस्पतालों की पारदर्शिता पर उठे सवाल
इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।
सरकारी अस्पतालों में मरीजों को निर्धारित नियमों के अनुसार बिना किसी अवैध शुल्क के सेवाएं मिलनी चाहिए। ऐसे आरोप न केवल अस्पताल की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी डालते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच और समय पर कार्रवाई जरूरी है ताकि लोगों का भरोसा सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर बना रहे।
दोषियों पर कार्रवाई की मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
उनका कहना है कि अस्पताल सेवा और संवेदनशीलता का केंद्र होना चाहिए, न कि अवैध वसूली का। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से निगरानी व्यवस्था और शिकायत निवारण प्रणाली को और मजबूत बनाने की मांग भी की।
निष्पक्ष जांच का भरोसा
अस्पताल प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होगी।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
प्रशासन ने लोगों से भी अपील की है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता की जानकारी सीधे अस्पताल प्रशासन को दें ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके।
मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच में नवजात बच्ची को परिजनों को सौंपने के लिए नर्सिंग स्टाफ द्वारा कथित रूप से ₹3,000 की रिश्वत मांगने का मामला सामने आने के बाद अस्पताल में हंगामा मच गया। परिजनों का आरोप है कि ₹1,700 देने के बाद भी बच्ची उन्हें तुरंत नहीं सौंपी गई। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद राशि वापस कराई गई और मामला शांत हुआ। अस्पताल अधीक्षक ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।