श्रावण मास में देवघर के तिवारी चौक पर विप्र समाज की अनूठी पहल; कांवरियों और शिवभक्तों की सेवा के लिए लगाया गया भव्य शिविर, 

भागलपुर, वरीय संवाददाता: सावन के पवित्र और पावन महीने में पूरा देश शिवमय हो चुका है। देवघर से लेकर भागलपुर और सुल्तानगंज तक कांवरियों का सैलाब उमड़ पड़ा है। इसी बीच, देवघर के प्रसिद्ध और व्यस्ततम तिवारी चौक पर विप्र समाज द्वारा शिवभक्तों की सेवा में एक बेहद प्रेरणादायक और भव्य आयोजन देखने को मिल रहा है। भागलपुर से हमारे विशेष संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, श्रावण मास के इस उल्लासपूर्ण माहौल में विप्र समाज द्वारा लगाए गए सेवा शिविर ने कांवरियों के सफर को और अधिक सुगम और आनंददायक बना दिया है। इस आयोजन की गूंज न केवल देवघर में बल्कि भागलपुर और आसपास के इलाकों में भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

तिवारी चौक पर सजा सेवा का दरबार, उमड़ी शिवभक्तों की भीड़

देवघर आने वाले हर कांवरिया और तीर्थयात्री के मार्ग में तिवारी चौक एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। बाबा बैद्यनाथ मंदिर की ओर बढ़ने वाले इस मार्ग पर विप्र समाज द्वारा लगाए गए शिविर में दिन-रात सेवा कार्यों का तांता लगा हुआ है:

थकान मिटाने के लिए विशेष व्यवस्था: सुल्तानगंज से 105 किलोमीटर की लंबी पैदल यात्रा तय करके जब शिवभक्त देवघर की सीमा में प्रवेश करते हैं, तो उनके पैरों में छाले और शारीरिक थकान साफ देखी जा सकती है। तिवारी चौक का यह शिविर ऐसे थके-हारे कांवरियों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहा है।

फलाहार, चाय और शुद्ध पेयजल: शिविर में आने वाले हर कांवरिया का स्वागत सत्कार देवतुल्य मानकर किया जा रहा है। यहां उनके लिए शुद्ध शाकाहारी फलाहार, चाय, शर्बत और ठंडे पानी की अनवरत व्यवस्था की गई है, ताकि लंबी यात्रा के बाद उन्हें तुरंत ऊर्जा मिल सके।

चिकित्सा और राहत शिविर बना मुख्य आकर्षण

लगातार नंगे पैर चलने के कारण कांवरियों को होने वाली शारीरिक परेशानियों को ध्यान में रखते हुए इस शिविर में स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष जोर दिया गया है:

डॉक्टरों और मेडिकल टीम की तैनाती: शिविर परिसर में ही एक सुसज्जित चिकित्सा कक्ष बनाया गया है जहां अनुभवी डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की टीम चौबीस घंटे मुस्तैद है।

फर्स्ट-एिड और मालिश सेवा: कांवरियों के पैरों की सिंकाई, दर्द निवारक स्प्रे, पट्टियां बांधने और मालिश करने के लिए विशेष सेवादार तैनात किए गए हैं। निःशुल्क दवाइयों के वितरण से सैकड़ों शिवभक्तों को राहत मिल रही है, जिससे वे बिना किसी शारीरिक कष्ट के बाबा दरबार की ओर बढ़ पा रहे हैं।

विप्र समाज की परंपरा और आतिथ्य सत्कार की मिसाल

भागलपुर और देवघर के सांस्कृतिक ताने-बाने में विप्र समाज हमेशा से धार्मिक और सामाजिक कार्यों में आगे रहा है:

अतिथि देवो भवः की भावना: आयोजकों का कहना है कि श्रावण मास में देश के कोने-कोने से आने वाले शिवभक्त वास्तव में भगवान शिव के ही रूप होते हैं। उनकी सेवा करना किसी भी सनातनी के लिए सबसे बड़ा सौभाग्य है।

युवाओं की बढ़-चढ़कर भागीदारी: इस सेवा शिविर को सफल बनाने में स्थानीय युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने मिलकर काम किया है। कोई कांवरियों के जूते-चप्पलों की संभाल कर रहा है, तो कोई उन्हें प्रेमपूर्वक भोजन परोस रहा है। इस निस्वार्थ सेवा भाव को देखकर हर आने-जाने वाला व्यक्ति अभिभूत हो रहा है।

कांवरियों में उत्साह और भोलेनाथ के जयकारे

तिवारी चौक पर मिल रही इस आत्मीय सेवा से अभिभूत होकर कांवरियों ने अपनी यात्रा के अनुभव साझा किए। उत्तर प्रदेश और झारखंड के विभिन्न जिलों से आए भक्तों का कहना था कि रास्ते भर मिलने वाले ऐसे सेवा शिविर ही इस कठिन यात्रा को आसान बनाते हैं। शिविर स्थल पर गूंज रहे "बम-बम भोले" और "हर हर महादेव" के जयकारों से पूरा इलाका पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंग गया है।

देवघर के तिवारी चौक पर विप्र समाज द्वारा की गई यह पहल केवल एक शिविर भर नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति के उस मूल मंत्र की जीवंत मिसाल है जो 'वसुधैव कुटुंबकम' और अतिथि सत्कार की सीख देता है। भागलपुर से लेकर देवघर तक फैली इस सेवा की महक ने साबित कर दिया है कि सच्ची भक्ति और जनसेवा ही सावन का असली सार है।