पूजा से पूर्व विषहरी स्थानों के पहुंच-पथ बने परेशानी का सबब, कीचड़ और जलजमाव से जूझ रहे श्रद्धालु
भागलपुर (संवाद सूत्र): शहर में आस्था और लोकपर्व के महापर्वों का दौर शुरू होने वाला है, लेकिन नगर निगम के तमाम उन दावों की कलई खुलती नजर आ रही है, जिनमें हर बार त्योहारों से पहले शहर की साफ-सफाई और बुनियादी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का दावा किया जाता है। आगामी विषहरी पूजा (मां विशहरी पूजा / मनसा पूजा) के मद्देनजर शहर के विभिन्न इलाकों में स्थित प्रसिद्ध विषहरी स्थानों और उससे जुड़े पहुंच-पथों (Approach Roads) की स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है। पूजा के पावन अवसर पर मां के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को सुगम मार्ग मिलने के बजाय कीचड़, जलजमाव और जगह-जगह फैले कचरे से होकर गुजरना पड़ रहा है। निगम प्रशासन की इस उदासीनता के कारण स्थानीय लोगों और पूजा समितियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
दावा बनाम हकीकत: कागजी वादों तक सीमित रहा निगम का सफाई अभियान
नगर निगम और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शहर के सभी प्रमुख मंदिरों और पूजा स्थलों के आसपास विशेष सफाई अभियान चलाने के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन धरातल पर तस्वीर बिल्कुल विपरीत है:
सड़क पर पसरा कीचड़ और पानी: विषहरी स्थानों तक जाने वाले मुख्य संपर्क मार्गों पर जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह ठप होने के कारण नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। बारिश के मौसम ने इस स्थिति को और अधिक भयावह बना दिया है, जिससे रास्ते पूरी तरह कीचड़मय हो गए हैं।
स्ट्रीट लाइटों का अभाव: कई प्रमुख विषहरी मंदिरों की ओर जाने वाले पहुंच-पथों पर लगी स्ट्रीट लाइटें महीनों से खराब पड़ी हैं। शाम ढलते ही इन रास्तों पर अंधेरा छा जाता है, जिससे महिलाओं और बुजुर्गों का रात के वक्त मंदिर पहुंचना जोखिम भरा हो गया है।
श्रद्धालुओं और पूजा समितियों की बढ़ी मुश्किलें
विषहरी पूजा को लेकर भागलपुर और आसपास के ग्रामीण-शहरी इलाकों में उत्साह का माहौल है, लेकिन बदहाल रास्तों के कारण भक्तों की राह मुश्किल हो गई है:
पूजा समितियों का दर्द: विभिन्न पूजा समितियों के पदाधिकारियों ने बताया कि उन्होंने कई बार नगर निगम के अधिकारियों और संबंधित वार्ड पार्कों को लिखित व मौखिक रूप से पहुंच-पथों की मरम्मत और साफ-सफाई के लिए आवेदन दिया था, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। समितियों का कहना है कि अगर समय रहते रास्ते ठीक नहीं किए गए, तो पूजा के दौरान आने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करना और उन्हें सुरक्षित निकालना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।
नंगे पांव आने वाले भक्तों की पीड़ा: विषहरी पूजा में मन्नत पूरी होने पर या पारंपरिक अनुष्ठान के तहत बड़ी संख्या में श्रद्धालु नंगे पांव मंदिर पहुंचते हैं। ऐसे में रास्तों पर फैले कंकर-पत्थर, टूटी सड़कें और कीचड़ उनके लिए भारी शारीरिक कष्ट का कारण बन रहे हैं।
संक्रमण और स्वास्थ्य का मंडराता खतरा
सड़कों पर जमा गंदा पानी और उसके आसपास लगे कचरे के ढेरों से केवल आवागमन ही बाधित नहीं हो रहा है, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य संकट भी पैदा हो रहा है:
मच्छरों का प्रकोप: जलजमाव के कारण मच्छरों का भारी प्रजनन हो रहा है, जिससे मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका कई गुना बढ़ गई है।
तीव्र दुर्गंध: रास्तों पर बह रहा नालियों का गंदा पानी और सड़ता कचरा आसपास के दुकानदारों और रहवासियों का जीना मुहाल कर रहा है। पूजा के दौरान उमड़ने वाली भीड़ के बीच इस तरह की अस्वच्छता किसी बड़ी बीमारी को बुलावा दे सकती है।
जनता की चेतावनी और प्रशासनिक प्रतिक्रिया की मांग
स्थानीय नागरिकों, दुकानदारों और श्रद्धालुओं ने अब इस व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी है:
तत्काल सुधार की मांग: प्रबुद्ध नागरिकों ने नगर निगम से मांग की है कि पूजा शुरू होने से पहले युद्ध स्तर पर विशेष सफाई अभियान चलाकर इन पहुंच-पथों से गाद (Sludge) हटाई जाए, ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव किया जाए और खराब लाइटों को तुरंत ठीक कराया जाए।
आंदोलन की चेतावनी: लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम ने अगले एक-दो दिनों के भीतर जमीनी स्तर पर सुधार नहीं किया, तो वे पूजा के दौरान विरोध प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।
विषहरी पूजा जैसे महत्वपूर्ण लोकपर्व से ठीक पहले विषहरी स्थानों के पहुंच-पथों की यह दुर्दशा नगर निगम की लचर कार्यशैली और लचर मॉनिटरिंग की पोल खोलती है। प्रशासनिक दावों और हकीकत के बीच की यह खाई न केवल विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगाती है, बल्कि जनता की आस्था के साथ खिलवाड़ भी है। यह देखना बेहद अहम होगा कि निगम प्रशासन इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेकर कब तक इन रास्तों को चलने योग्य बनाता है ताकि श्रद्धालु बिना किसी बाधा के माता के दरबार में अपनी हाजिरी लगा सकें।