कांवरियों की कठिन राह: मुजफ्फरपुर में बाबा गरीबनाथ मंदिर तक का सफर बना चुनौती, टूटी सड़कें और तेज धूप से बढ़ी मुश्किलें

पवित्र सावन मास के इस पावन अवसर पर जहाँ एक ओर पूरा माहौल भगवान शिव की भक्ति में सराबोर है, वहीं दूसरी ओर मुजफ्फरपुर में बाबा गरीबनाथ धाम आने वाले कांवरियों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जिला प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद, कांवरियों का बाबा गरीबनाथ मंदिर तक का सफर बेहद कठिन और कष्टदायक साबित हो रहा है। चिलचिलाती धूप और रास्ते में फैली टूटी-फूटी सड़कों के कारण शिव भक्तों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

वैशाली जिले के बिठौली गांव से आए कांवरियों के एक जत्थे ने प्रशासन के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए जिला प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप करने और सड़कों से कंकड़ तथा नुकीले पत्थरों को हटाने की पुरजोर मांग की है।

कठिनाइयों से भरा सफर: तेज धूप और बदहाल सड़कें

सावन की शुरुआत के साथ ही मुजफ्फरपुर की ओर आने वाले सभी मुख्य मार्गों पर कांवरियों का तांता लगा हुआ है। हज़ारों की संख्या में भक्त नंगे पांव बोल बम के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन इस बार का सफर पिछले वर्षों की तुलना में अधिक कष्टदायक बन गया है:

भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप: आसमान से बरसती आग और उमस भरी गर्मी ने कांवरियों की सहनशक्ति की कड़ी परीक्षा लेनी शुरू कर दी है। दिन के समय पैदल चलना और भी मुश्किल हो गया है।

टूटी और जर्जर सड़कें: कई जगहों पर सड़कें पूरी तरह से उबड़-खाबड़ और क्षतिग्रस्त हैं। सड़कों के बीचों-बीच बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं, जिनमें चलना नंगे पांव चल रहे कांवरियों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है।

नुकीले कंकड़ और पत्थर: सड़कों की मरम्मत के अभाव में या निर्माण कार्यों के कारण बिखरे कंकड़ और नुकीले पत्थर कांवरियों के पैरों में चुभ रहे हैं, जिससे उनके पैरों में छाले पड़ रहे हैं और कई लोग जख्मी भी हो रहे हैं।

वैशाली के बिठौली गांव के जत्थे की पीड़ा

वैशाली जिले के प्रसिद्ध बिठौली गांव से आया कांवरियों का एक बड़ा जत्था जब मुजफ्फरपुर की सीमा में प्रवेश कर बाबा गरीबनाथ मंदिर की ओर बढ़ रहा था, तो उन्हें भारी दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। जत्थे में शामिल श्रद्धालुओं ने मीडिया और स्थानीय प्रशासन के सामने अपनी गंभीर समस्याएं रखीं।

जत्थे के एक सदस्य ने दर्द बयां करते हुए कहा, "हम लोग सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करके बाबा गरीबनाथ को जल चढ़ाने आ रहे हैं। आस्था के आगे हमारी शारीरिक पीड़ा का कोई मोल नहीं है, लेकिन जिस तरह की बदहाल सड़कें प्रशासन ने छोड़ रखी हैं, वह हमारे लिए अभिशाप बन गई हैं। रास्ते में फैले नुकीले कंकड़ हमारे पैरों को लहूलुहान कर रहे हैं।"

जत्थे के सदस्यों ने विशेष रूप से जिला प्रशासन से मांग की है कि:

कंकड़ और पत्थर हटाए जाएं: कांवरिया मार्ग पर जहाँ-कहाँ बिखरे कंकड़ और निर्माण सामग्री के टुकड़ों को तुरंत साफ किया जाए।

सड़कों पर पानी का छिड़काव: तेज धूप और गर्म डामर (सड़क) के कारण कांवरियों के पैर जल रहे हैं, इसलिए मुख्य मार्गों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाए।

चिकित्सा शिविर: हर कुछ दूरी पर मेडिकल कैंप लगाए जाएं जहाँ जख्मी कांवरियों के पैरों की मरहम-पट्टी और प्राथमिक उपचार की मुफ्त व्यवस्था हो।

प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उठते सवाल

हर साल सावन के महीने में लाखों कांवरिया मुजफ्फरपुर के ऐतिहासिक बाबा गरीबनाथ मंदिर में जल अर्पण करने पहुंचते हैं। जिला प्रशासन द्वारा हर साल बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं कि कांवरियों के मार्ग को सुगम और सुरक्षित बनाया जाएगा, परंतु धरातल पर स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है।

मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति: श्रद्धालुओं का आरोप है कि त्योहार से ठीक पहले सड़कों की सुध नहीं ली जाती, जिसके कारण अंतिम समय में की गई खानापूर्ति बारिश और भारी ट्रैफिक के कारण उखड़ जाती है।

पेयजल और विश्राम की कमी: कई ग्रामीण और संपर्क मार्गों पर जहां से कांवरिया गुजरते हैं, वहां पेयजल और छांव की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।

स्थानीय लोगों और स्वयंसेवकों की पहल

प्रशासनिक कमियों के बीच, मुजफ्फरपुर के स्थानीय लोग और विभिन्न स्वयंसेवी संगठन कांवरियों की मदद के लिए आगे आए हैं। कई स्थानों पर सेवा शिविर लगाए गए हैं जहाँ कांवरियों को नींबू पानी, ओआरएस घोल, फल और प्राथमिक चिकित्सा दी जा रही है। स्थानीय युवाओं द्वारा सड़कों से नुकीले कंकड़ अपने हाथों से हटाने के भी प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि किसी भी शिव भक्त को चोट न लगे।

बाबा गरीबनाथ के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे इन शिव भक्तों की निष्ठा और अटूट आस्था किसी भी बाधा से बड़ी है। पैरों में छाले और चिलचिलाती धूप भी उनके कदमों को रोक नहीं पा रही है। हालांकि, वैशाली के बिठौली गांव के जत्थे द्वारा उठाई गई मांग पूरी तरह जायज है।

अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस चेतावनी और कांवरियों की पीड़ा को कितनी जल्दी गंभीरता से लेता है। यदि समय रहते सड़कों की सफाई और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो यह कठिन यात्रा श्रद्धालुओं के लिए और अधिक कष्टदायक बन सकती है। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ही इन भक्तों के सफर को सुगम बना सकती है।