बिहार में पैक्स के कंप्यूटरीकरण को मिली नई रफ्तार, केंद्र ने जारी किए 53.90 करोड़ रुपये; भागलपुर की 728 समितियां होंगी और सशक्त

भागलपुर: बिहार में सहकारिता व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के कंप्यूटरीकरण और डिजिटलीकरण के लिए राज्य को 53.90 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी की गई है। इस पहल का उद्देश्य पैक्स को पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है, ताकि किसानों को बेहतर और तेज सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

यह जानकारी लोकसभा में भागलपुर से जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद अजय कुमार मंडल द्वारा पूछे गए अतारांकित प्रश्न संख्या-438 के लिखित उत्तर में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने दी। संसद में दिए गए इस जवाब के बाद बिहार के सहकारिता क्षेत्र में नई उम्मीद जगी है। विशेष रूप से भागलपुर जिले की 728 सक्रिय पैक्स समितियों को इस योजना से बड़ा लाभ मिलने की संभावना है।

संसद में उठा बिहार के पैक्स का मुद्दा

लोकसभा के मानसून सत्र के दौरान भागलपुर सांसद अजय कुमार मंडल ने बिहार में पैक्स समितियों के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण की प्रगति को लेकर केंद्र सरकार से जानकारी मांगी। उन्होंने जानना चाहा कि राज्य में पैक्स को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और इसके लिए कितनी राशि उपलब्ध कराई गई है।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अपने लिखित उत्तर में बताया कि केंद्र सरकार देशभर में सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए व्यापक स्तर पर काम कर रही है। इसी अभियान के तहत बिहार के पैक्स समितियों के कंप्यूटरीकरण के लिए अब तक 53.90 करोड़ रुपये की सहायता जारी की जा चुकी है।

4,495 पैक्स को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने की योजना

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि बिहार की 4,495 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इन समितियों में कंप्यूटर, आवश्यक हार्डवेयर, इंटरनेट कनेक्टिविटी, सॉफ्टवेयर और डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन की व्यवस्था विकसित की जा रही है।

इस पहल का उद्देश्य किसानों को मिलने वाली सेवाओं को तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाना है। डिजिटलीकरण के बाद ऋण वितरण, सदस्यता, खाता प्रबंधन, अनाज खरीद, उर्वरक वितरण और अन्य सहकारी सेवाओं का संचालन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

भागलपुर की 728 सक्रिय समितियों को मिलेगा लाभ

भागलपुर जिले में वर्तमान में 728 सक्रिय पैक्स समितियां कार्यरत हैं। ये समितियां किसानों को कृषि ऋण, खाद-बीज उपलब्ध कराने, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और धान-गेहूं जैसी फसलों की सरकारी खरीद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

डिजिटलीकरण के बाद इन समितियों के कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी, रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे और किसानों को विभिन्न सेवाओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक आधारित व्यवस्था लागू होने से भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी और किसानों का भरोसा सहकारिता संस्थाओं पर और मजबूत होगा।

'सहकार से समृद्धि' अभियान को मिलेगी मजबूती

सांसद अजय कुमार मंडल ने केंद्र सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में 'सहकार से समृद्धि' का अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि सहकारिता आंदोलन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता तथा दक्षता बढ़ेगी।

सांसद ने यह भी कहा कि भागलपुर सहित पूरे बिहार के किसान इस योजना से लाभान्वित होंगे और सहकारी समितियां पहले से अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेंगी।

कंप्यूटरीकरण से क्या होंगे फायदे?

पैक्स के डिजिटलीकरण से किसानों और समितियों दोनों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है।

सभी सदस्य और लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा।

ऋण वितरण और भुगतान प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी होगी।

सरकारी योजनाओं की निगरानी आसान होगी।

धान और गेहूं की खरीद से संबंधित भुगतान में तेजी आएगी।

खातों का ऑडिट और वित्तीय प्रबंधन अधिक व्यवस्थित होगा।

किसानों को समय पर जानकारी और सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

कागजी कार्यवाही कम होने से कार्यक्षमता बढ़ेगी।

किसानों को मिलेगी आधुनिक सेवाएं

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ने के बाद पैक्स समितियां आधुनिक बैंकिंग और सहकारी सेवाओं के करीब पहुंच जाएंगी। भविष्य में किसानों को ऑनलाइन आवेदन, भुगतान की जानकारी, ऋण स्थिति और अन्य सेवाओं का लाभ भी मिल सकता है।

डिजिटल रिकॉर्ड के कारण किसी भी प्रकार के विवाद का समाधान भी अधिक आसानी से किया जा सकेगा।

बिहार की कृषि व्यवस्था को मिलेगा नया आधार

बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां बड़ी संख्या में किसान सहकारी समितियों पर निर्भर रहते हैं। पैक्स किसानों को कृषि ऋण, बीज, उर्वरक, फसल खरीद और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रमुख माध्यम हैं।

ऐसे में इन संस्थाओं का आधुनिकीकरण राज्य की कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंप्यूटरीकरण का कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा होता है, तो इससे किसानों को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा।

सरकार की प्राथमिकता में सहकारिता क्षेत्र

केंद्र सरकार लगातार सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए नई योजनाएं लागू कर रही है। सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता, डिजिटल प्रबंधन और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

सहकारिता मंत्रालय का मानना है कि मजबूत पैक्स प्रणाली न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति देगी।

आगे की राह

53.90 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मिलने के बाद अब बिहार में पैक्स समितियों के कंप्यूटरीकरण का कार्य और तेज होने की उम्मीद है। आने वाले समय में सभी निर्धारित समितियों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य पूरा किया जाएगा।

भागलपुर सहित पूरे बिहार के किसानों की निगाह अब इस बात पर है कि यह योजना कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से जमीन पर लागू होती है। यदि सरकार तय समय सीमा के भीतर कंप्यूटरीकरण का कार्य पूरा कर लेती है, तो सहकारिता क्षेत्र में यह एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

सहकारिता विशेषज्ञों का भी मानना है कि तकनीक आधारित पैक्स व्यवस्था भविष्य में किसानों को अधिक पारदर्शी, तेज और भरोसेमंद सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे न केवल कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि ग्रामीण विकास और किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।