पटना छात्र प्रदर्शन पर बीजेपी विधायक श्याम बाबू का बड़ा दावा, बोले- "मेरी हत्या हो सकती थी, हमलावर छात्र नहीं बल्कि गुंडे थे"
पटना: बिहार की राजधानी पटना में बुधवार को हुए छात्र प्रदर्शन और उसके दौरान हुई हिंसा का मामला अब सियासी रूप से और अधिक गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक श्याम बाबू प्रसाद यादव ने विधानसभा में दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान उनकी हत्या हो सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी गाड़ी को निशाना बनाया गया, पथराव किया गया और जान बचाने के लिए उन्हें एक दुकान में छिपना पड़ा। विधायक ने यह भी कहा कि हमला करने वाले छात्र नहीं थे, बल्कि राजनीतिक दलों से जुड़े गुंडे और असामाजिक तत्व थे। (Hindustan Live)
सदन में सुनाई पूरी आपबीती
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान श्याम बाबू ने कहा कि जब वह सदन की ओर जा रहे थे, तभी प्रदर्शनकारी भीड़ ने उनकी गाड़ी को घेर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि गाड़ी पर जमकर पथराव किया गया और हालात इतने गंभीर हो गए कि उन्हें अपनी जान बचाने के लिए एक दुकान में शरण लेनी पड़ी। विधायक ने कहा कि यदि वह समय रहते वहां से नहीं निकलते, तो कोई भी अप्रिय घटना हो सकती थी।
उन्होंने सदन में भावुक होते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों पर इस तरह का हमला बेहद चिंताजनक है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनके अनुसार, यह हमला पूर्व नियोजित प्रतीत होता है और इसका उद्देश्य भय का माहौल बनाना था। (Hindustan Live)
"ये छात्र नहीं, गुंडे थे"
श्याम बाबू ने अपने बयान में कहा कि प्रदर्शन की आड़ में हिंसा फैलाने वाले लोग छात्र नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि भीड़ में ऐसे लोग शामिल थे जिनका उद्देश्य केवल उपद्रव करना और राजनीतिक माहौल बिगाड़ना था। उनके अनुसार, वास्तविक छात्र अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखते हैं, लेकिन जिस तरह से सरकारी वाहनों, जनप्रतिनिधियों और पुलिस पर हमला किया गया, उससे साफ है कि हिंसा करने वाले असामाजिक तत्व थे। (Navbharat Times)
विपक्ष ने किया विरोध
विधायक के बयान के बाद विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। विपक्षी सदस्यों ने विधायक के आरोपों पर आपत्ति जताई और कहा कि पूरे छात्र आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद सदन में जोरदार हंगामा हुआ और कुछ समय के लिए कार्यवाही भी प्रभावित रही। (India TV)
छात्र प्रदर्शन क्यों हुआ?
पटना में बुधवार को विभिन्न छात्र संगठनों के नेतृत्व में प्रदर्शन आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारी छात्र NEET पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे समेत कई मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे थे। मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ, जिसके बाद स्थिति हिंसक हो गई। कई स्थानों पर पथराव, लाठीचार्ज और अफरा-तफरी की घटनाएं सामने आईं। (Navbharat Times)
कई लोग हुए घायल
प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों, पत्रकारों और कुछ प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी खबर सामने आई। प्रशासन के अनुसार, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। घटना के बाद राजधानी के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई तथा पूरे राज्य में जिला प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए। (Navbharat Times)
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
इस घटना के बाद बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। भाजपा नेताओं ने घटना की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं विपक्ष का कहना है कि छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है और सरकार अपनी विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे आरोप लगा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छात्र आंदोलन और उसके बाद हुई हिंसा आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकती है। विधानसभा के मानसून सत्र में भी इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिल सकता है।
प्रशासन की कार्रवाई
पटना पुलिस ने घटना के बाद विभिन्न वीडियो फुटेज और सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू कर दी है। हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और प्रशासन का कहना है कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों से बचने और शांति बनाए रखने की अपील भी की है। (Navbharat Times)
पटना में छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। भाजपा विधायक श्याम बाबू के "मेरी हत्या हो सकती थी" और "हमलावर छात्र नहीं बल्कि गुंडे थे" जैसे गंभीर आरोपों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। दूसरी ओर, विपक्ष इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बता रहा है। अब सभी की नजर पुलिस जांच पर है, जिससे स्पष्ट हो सकेगा कि हिंसा के लिए जिम्मेदार लोग कौन थे और घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या थे।