पुरानी बाजार से गिरफ्तार व्यवसायी समीर खान का बड़ा खुलासा, सीतामढ़ी का चोर मो. इरफान उर्फ आर्यन गिरोह में रखता था 'ट्रेजरर'

बिहार के मुजफ्फरपुर और झारखंड-बिहार के आपराधिक गलियारों से एक सनसनीखेज और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस की गिरफ्त में आए एक व्यवसायी ने पूछताछ के दौरान ऐसे खुलासे किए हैं, जिसने चोरी और अपराधियों के एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश कर दिया है। रांची/मुजफ्फरपुर के प्रमुख संवाददाताओं से प्राप्त जानकारी के अनुसार, शहर के पुरानी बाजार से गिरफ्तार किए गए व्यवसायी समीर खान ने पुलिस की पूछताछ में यह राज खोला है कि सीतामढ़ी का कुख्यात चोर मो. इरफान उर्फ आर्यन उसे अपने आपराधिक गिरोह में 'ट्रेजरर' (खजांची/हिसाब-किताब रखने वाला) बनाकर रखता था।

इरफान चोरी के बाद मिलने वाले माल और पैसों को ठिकाने लगाने तथा उसका पूरा लेखा-जोखा रखने की जिम्मेदारी समीर खान को सौंप रखी थी। इस मामले ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है और दोनों जिलों की पुलिस इस अंतरराज्यीय या अंतरजिला चोर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई है। आइए इस पूरे सनसनीखेज मामले, समीर खान के खुलासों, मो. इरफान उर्फ आर्यन के आपराधिक नेटवर्क और पुलिस की कार्रवाई का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।

घटना की पृष्ठभूमि: पुरानी बाजार से व्यवसायी समीर खान की गिरफ्तारी

अपराध की दुनिया में सफेदपोश या प्रतिष्ठित व्यवसायियों की आड़ में किस तरह अवैध कामों को अंजाम दिया जाता है, यह मामला इसका एक सटीक उदाहरण है।

व्यवसायी की आड़ में काला कारोबार: मुजफ्फरपुर के व्यस्त और प्रसिद्ध बाजार क्षेत्र 'पुरानी बाजार' में व्यवसाय करने वाला समीर खान बाहर से भले ही एक सामान्य कारोबारी नजर आता था, लेकिन अंदरखाने वह अपराधियों के एक बड़े नेटवर्क से जुड़ा हुआ था।

पुलिस के हत्थे चढ़ा समीर: खुफिया इनपुट और तकनीकी सर्विलांस (Technical Surveillance) के आधार पर पुलिस ने जब पुरानी बाजार में छापेमारी की, तो समीर खान पुलिस के शिकंजे में आ गया। गिरफ्तारी के बाद जब उससे कड़ाई से पूछताछ की गई, तो एक के बाद एक कई चौंकाने वाले राज बाहर आने लगे।

मुख्य सरगना मो. इरफान उर्फ आर्यन और समीर खान की भूमिका

पूछताछ के दौरान गिरफ्तार व्यवसायी समीर खान ने पुलिस को बताया कि इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड या मुख्य संचालक सीतामढ़ी जिले का रहने वाला मो. इरफान उर्फ आर्यन है।

इरफान का आपराधिक दायरा: मो. इरफान आपराधिक वारदातों को अंजाम देने में माहिर है और वह चोरी की घटनाओं को सुनियोजित तरीके से अंजाम देता है। सीतामढ़ी से लेकर मुजफ्फरपुर और अन्य पड़ोसी जिलों तक उसके चोर गिरोह का जाल फैला हुआ है।

समीर को बनाया गया था 'ट्रेजरर': पूछताछ में समीर ने स्वीकार किया कि इरफान चोरी के जरिए आने वाले माल और कैश को सुरक्षित रखने तथा उसका हिसाब-किताब मेंटेन करने के लिए उसे ही अपना 'ट्रेजरर' यानी खजांची बना रखा था। चोरी का माल समीर के पास ही पहुंचता था, जहां से वह उसे आर्थिक लेनदेन या अन्य माध्यमों से खपाने में मदद करता था।

चोरी के माल का बंटवारा और वित्तीय प्रबंधन

एक संगठित अपराध गिरोह के रूप में यह गैंग किस प्रकार काम करता था, इसका खुलासा समीर खान के बयानों से होता है:

चोरी के बाद ठिकाना: जब इरफान और उसके गुर्गे किसी बड़ी चोरी या सेंधमारी की घटना को अंजाम देते थे, तो चोरी का सारा सामान (विशेषकर आभूषण और नकदी) सबसे पहले समीर खान के पास पहुंचता था।

ट्रेजरर का काम: समीर का मुख्य काम उस चोरी के माल का मूल्यांकन करना, उसकी सुरक्षा करना और गिरोह के सदस्यों के बीच पैसों का बंदरबांट या हिसाब रखना होता था। एक व्यवसायी होने के कारण उसे पैसों को मैनेज करने का अनुभव था, जिसका इस्तेमाल वह इस आपराधिक सिंडिकेट के लिए कर रहा था।

पुलिस की आगे की कार्रवाई और गिरोह के अन्य गुर्गों की तलाश

समीर खान की गिरफ्तारी और उसके द्वारा किए गए खुलासे के बाद पुलिस ने अपनी जांच का दायरा काफी बढ़ा दिया है।

मो. इरफान की धरपकड़ के लिए छापेमारी: पुलिस अब मुख्य सरगना मो. इरफान उर्फ आर्यन की गिरफ्तारी के लिए सीतामढ़ी और मुजफ्फरपुर के संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है। पुलिस का मानना है कि इरफान के पकड़े जाने पर चोरी के कई अन्य अनसुलझे मामलों का भी खुलासा हो सकता है।

अन्य सहयोगियों की पहचान: पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इस गिरोह में समीर और इरफान के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल हैं, जो चोरी का सामान खरीदने या बेचने में इनकी मदद करते थे।

मुजफ्फरपुर के पुरानी बाजार से गिरफ्तार व्यवसायी समीर खान और सीतामढ़ी के चोर मो. इरफान उर्फ आर्यन का यह गठजोड़ यह साबित करता है कि अपराधी किस तरह सफेदपोश लोगों को अपने साथ मिलाकर अपराध का साम्राज्य चलाते हैं। समीर खान का गिरोह में 'ट्रेजरर' के रूप में काम करना और चोरी के माल का हिसाब रखना एक गंभीर आपराधिक साजिश का हिस्सा है। पुलिस की यह कार्रवाई अपराध की कमर तोड़ने की दिशा में एक अहम कदम है, और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस गिरोह के बाकी बचे सरगना भी कानून की गिरफ्त में होंगे।