‘कैनाल मैन’ लौंगी भुइयां के अधूरे सपनों को मिलेगा नया जीवन, सीडब्ल्यूएस ने शुरू किया हरित भूमि और सिंचाई अभियान
गया: An inspiring story from Kothilwa village in the Naxal-affected Lutua Panchayat of Bihar's Gaya district is entering a new chapter. जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित इस सुदूर गांव के 75 वर्षीय लौंगी भुइयां, जिन्हें आज पूरी दुनिया ‘कैनाल मैन’ के नाम से जानती है, के वर्षों पुराने सपनों को अब नई दिशा मिलने जा रही है। सिकंदराबाद (तेलंगाना) की सामाजिक संस्था सेंटर फॉर वर्ल्ड सॉलिडेरिटी (CWS) ने उनके अधूरे जल संरक्षण और सिंचाई विकास के सपनों को साकार करने का बीड़ा उठाया है।
संस्था ने क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा, पोषण, जल संरक्षण, कृषि विकास और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को लेकर व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। इस पहल से न केवल किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है, बल्कि पलायन की समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आने की संभावना है।
संघर्ष से मिली ‘कैनाल मैन’ की पहचान
लौंगी भुइयां को 'कैनाल मैन' की पहचान किसी सरकारी सम्मान या पारिवारिक विरासत से नहीं मिली।
उन्होंने लगभग तीन दशक से अधिक समय तक लगातार कठिन परिश्रम कर अकेले पहाड़ काटकर नहर बनाने का असाधारण कार्य किया। उनका उद्देश्य केवल इतना था कि वर्षा का पानी व्यर्थ बहने के बजाय खेतों तक पहुंचे और गांव के किसानों को सिंचाई की सुविधा मिल सके।
उनकी यह कहानी पूरे देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रेरणा का विषय बन चुकी है।
पानी की कमी ने बदल दी जिंदगी
कोठिलवा गांव घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों से घिरा हुआ है।
वर्षों तक यहां बारिश का अधिकांश पानी पहाड़ियों से बहकर निकल जाता था। खेतों तक पानी नहीं पहुंचने के कारण किसान केवल वर्षा आधारित खेती करने को मजबूर थे।
सिंचाई की सुविधा नहीं होने से कृषि उत्पादन कम होता था और ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर बनी रहती थी।
पहाड़ काटकर बनाई पांच किलोमीटर लंबी नहर
इन कठिन परिस्थितियों को देखते हुए लौंगी भुइयां ने अकेले ही पहाड़ काटकर लगभग पांच किलोमीटर लंबी नहर बनाने का संकल्प लिया।
उन्होंने वर्षों तक बिना किसी आधुनिक मशीन या सरकारी सहायता के लगातार मेहनत की। धीरे-धीरे उनकी बनाई नहर ने वर्षा के पानी को खेतों तक पहुंचाना शुरू किया और गांव के कई किसानों को सिंचाई का लाभ मिलने लगा।
यह कार्य आज भी ग्रामीणों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
अब CWS ने संभाली जिम्मेदारी
लौंगी भुइयां की उम्र बढ़ने के साथ उनके कई सपने अधूरे रह गए थे।
अब सिकंदराबाद स्थित सामाजिक संस्था सेंटर फॉर वर्ल्ड सॉलिडेरिटी (CWS) ने इन सपनों को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।
संस्था का उद्देश्य क्षेत्र में जल संरक्षण, कृषि उत्पादकता, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करना है।
सर्वेक्षण कार्य हुआ पूरा
CWS के इंजीनियर शंकर दा और उनकी तकनीकी टीम ने लौंगी भुइयां की कार्ययोजनाओं और क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का विस्तृत सर्वेक्षण पूरा कर लिया है।
सर्वेक्षण के आधार पर ऐसी योजनाएं तैयार की जा रही हैं, जिनसे अधिक से अधिक किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
हरित भूमि अभियान की शुरुआत
संस्था ने हरित भूमि कार्यक्रम के तहत क्षेत्र में बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया है।
इस अभियान में सामूहिक वृक्षारोपण, जल संरक्षण, मिट्टी संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पेड़ लगाने से वर्षा जल संरक्षण और भूजल स्तर में सुधार होगा।
कई विशेषज्ञ और समाजसेवी जुड़े
इस अभियान में CWS के निदेशक मनमय सिंह, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी तुलिका मुखर्जी, प्रखंड समन्वयक रामलखन प्रसाद तथा समाजसेवी राधेश्याम ठाकुर, सोनम कुमारी, समता कुमारी और बिमला कुमारी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
इन सभी का लक्ष्य स्थानीय समुदाय को विकास कार्यों में सहभागी बनाना है।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
यदि परियोजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो आसपास के कई गांवों के किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी।
इससे फसल उत्पादन बढ़ेगा, कृषि लागत कम होगी और किसानों की आय में भी वृद्धि होने की संभावना है।
पलायन पर लग सकती है रोक
लंबे समय से रोजगार और सिंचाई की कमी के कारण क्षेत्र के कई युवा रोज़गार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करते रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कृषि और जल संसाधन मजबूत होते हैं, तो स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पलायन की समस्या भी कम हो सकती है।
पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
हरित भूमि अभियान केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है।
इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता को बढ़ावा देना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करना भी है।
सामूहिक वृक्षारोपण से क्षेत्र का हरित आवरण बढ़ेगा और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होगा।
ग्रामीणों में नई उम्मीद
गांव के लोगों का कहना है कि लौंगी भुइयां ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा गांव की भलाई के लिए समर्पित कर दिया।
अब किसी संस्था द्वारा उनके कार्यों को आगे बढ़ाया जाना पूरे गांव के लिए गर्व और आशा की बात है।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में उनके क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है।
प्रेरणा की मिसाल हैं लौंगी भुइयां
लौंगी भुइयां की कहानी यह साबित करती है कि मजबूत इच्छाशक्ति और समाज के प्रति समर्पण से एक व्यक्ति भी बड़ा बदलाव ला सकता है।
उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद जो कार्य किया, वह आज भी जल संरक्षण और सामुदायिक विकास का प्रेरणादायक उदाहरण माना जाता है।
गया जिले के कोठिलवा गांव के ‘कैनाल मैन’ लौंगी भुइयां ने अपने अथक परिश्रम से जल संरक्षण और सिंचाई का जो सपना देखा था, उसे अब सेंटर फॉर वर्ल्ड सॉलिडेरिटी (CWS) नई दिशा देने जा रही है। हरित भूमि अभियान, वृक्षारोपण, जल संरक्षण और कृषि विकास जैसी योजनाओं से न केवल किसानों को लाभ मिलेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
लौंगी भुइयां का जीवन इस बात का उदाहरण है कि दृढ़ निश्चय, मेहनत और समाज के प्रति समर्पण से असंभव दिखने वाले कार्य भी संभव बनाए जा सकते हैं। उनके अधूरे सपनों को साकार करने की यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।