बिहार में डीएम, बीडीओ समेत अफसरों के तबादलों पर केंद्र सरकार की आपत्ति, जनगणना कार्य प्रभावित होने की आशंका
पटना: बिहार सरकार द्वारा हाल ही में किए गए बड़े पैमाने पर प्रशासनिक तबादलों पर केंद्र सरकार ने गंभीर आपत्ति जताई है। जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने जिलाधिकारी (DM), उप विकास आयुक्त (DDC), अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) समेत कई प्रशासनिक अधिकारियों का एक साथ बड़े स्तर पर तबादला किया है। इन तबादलों को लेकर केंद्र सरकार ने कहा है कि जिन अधिकारियों को भारत की आगामी जनगणना से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है, उनके स्थानांतरण पर पहले से रोक लगाने के निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद कई ऐसे अधिकारियों का तबादला कर दिया गया, जिससे जनगणना की तैयारियों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
जनगणना को लेकर पहले ही जारी किए गए थे निर्देश
केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय और भारत के रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय (Registrar General of India) की ओर से सभी राज्यों को पहले ही स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि जनगणना से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों का स्थानांतरण अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों को छोड़कर नहीं किया जाए। इसका उद्देश्य यह था कि जनगणना जैसे विशाल और संवेदनशील अभियान में प्रशासनिक निरंतरता बनी रहे तथा अधिकारियों को अपने कार्यक्षेत्र की पूरी जानकारी उपलब्ध रहे।
बताया जा रहा है कि बिहार सरकार द्वारा जारी हालिया तबादला सूची में ऐसे कई अधिकारी शामिल हैं, जिन्हें जनगणना संबंधी दायित्व सौंपे गए थे। इसी कारण केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है।
बड़े पैमाने पर हुए प्रशासनिक फेरबदल
राज्य सरकार ने हाल के दिनों में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने और विभिन्न जिलों में कार्यकुशलता बढ़ाने के उद्देश्य से बड़ी संख्या में अधिकारियों का तबादला किया है। इनमें कई जिलाधिकारियों, उप विकास आयुक्तों, एसडीओ, बीडीओ और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है और समय-समय पर प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुसार अधिकारियों का स्थानांतरण किया जाता है। हालांकि, जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान यह फैसला अब विवाद का कारण बन गया है।
केंद्र ने जताई नाराजगी
सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार का मानना है कि जनगणना की तैयारियां पहले से निर्धारित समय-सीमा के अनुसार चल रही हैं। ऐसे में जिन अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है या जिन्हें स्थानीय स्तर पर जनगणना की जिम्मेदारी सौंपी गई है, उनका अचानक स्थानांतरण पूरी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को भेजे गए पत्र में कहा है कि जनगणना कार्य से जुड़े अधिकारियों के स्थानांतरण पर तत्काल रोक लगाई जाए। यदि किसी अधिकारी का तबादला अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में किया गया है, तो उसका विस्तृत कारण भी उपलब्ध कराया जाए।
जनगणना क्यों है महत्वपूर्ण?
भारत की जनगणना दुनिया की सबसे बड़ी प्रशासनिक और सांख्यिकीय कवायद मानी जाती है। इसके आधार पर देश की जनसंख्या, सामाजिक संरचना, शिक्षा, रोजगार, आवास, आर्थिक स्थिति और अन्य महत्वपूर्ण आंकड़े तैयार किए जाते हैं।
इन्हीं आंकड़ों के आधार पर केंद्र और राज्य सरकारें विभिन्न विकास योजनाएं बनाती हैं। संसाधनों का आवंटन, कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, शहरी और ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत ढांचे से जुड़े फैसलों में भी जनगणना के आंकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जनगणना से जुड़े अधिकारियों का लगातार स्थानांतरण होता है, तो नए अधिकारियों को संबंधित क्षेत्र की जानकारी लेने, स्थानीय प्रशासनिक ढांचे को समझने और जनगणना की तैयारियों को दोबारा व्यवस्थित करने में अतिरिक्त समय लग सकता है। इससे अभियान की गति प्रभावित हो सकती है।
हालांकि कुछ प्रशासनिक विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि नए अधिकारियों को समय पर प्रशिक्षण और आवश्यक संसाधन उपलब्ध करा दिए जाएं, तो किसी भी संभावित बाधा को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।
बिहार सरकार का पक्ष
राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस मुद्दे पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि सभी तबादले नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किए गए हैं और शासन का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना है।
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार केंद्र सरकार की आपत्तियों का अध्ययन कर रही है और यदि आवश्यक हुआ तो जनगणना कार्य से जुड़े अधिकारियों के संबंध में उचित निर्णय लिया जा सकता है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज
इस मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार से सवाल किया है कि जब केंद्र सरकार की ओर से पहले ही स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके थे, तब ऐसे अधिकारियों का स्थानांतरण क्यों किया गया।
वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि प्रशासनिक तबादले शासन की नियमित प्रक्रिया हैं और इन्हें राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका दावा है कि सरकार जनगणना सहित सभी राष्ट्रीय कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
आगे क्या हो सकता है?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बिहार सरकार केंद्र सरकार की आपत्तियों पर क्या कदम उठाती है। यदि केंद्र की सलाह के अनुरूप जनगणना कार्य से जुड़े अधिकारियों के तबादलों की समीक्षा की जाती है, तो कुछ आदेशों में संशोधन या स्थगन भी संभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय से जनगणना जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया को बिना किसी व्यवधान के पूरा किया जा सकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण या संशोधित आदेश जारी होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।