'हर-घर तिरंगा' अभियान और 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पर उमड़ा बच्चों का उत्साह; निकाली गई भव्य प्रभात फेरी, गूंजे 'भारत माता की जय' के नारे

भागलपुर/अकबरनगर (विशेष संवाददाता): देश की आजादी के पावन पर्व स्वतंत्रता दिवस के जश्न और राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गौरवशाली 150 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर भागलपुर जिले के अकबरनगर क्षेत्र के सरकारी विद्यालयों में देशभक्ति का एक अद्भुत और प्रेरणादायी नजारा देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरणास्पद आह्वान पर चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी 'हर-घर तिरंगा' अभियान के तहत अकबरनगर के विभिन्न राजकीय एवं सरकारी विद्यालयों में बच्चों, शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों के बीच भारी उत्साह का माहौल है। बुधवार और गुरुवार को क्षेत्र के प्राथमिक, मध्य और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जहां छात्र-छात्राओं ने हाथों में तिरंगा थामकर और गगनभेदी नारे लगाते हुए भव्य प्रभात फेरियां निकालीं। नन्हे-मुन्नों के चेहरों पर देश के प्रति अटूट प्रेम और आंखों में चमक यह बता रही थी कि आने वाली पीढ़ी के दिलों में राष्ट्रवाद की यह भावना कितनी प्रगाढ़ रूप से समा चुकी है।

क्यों खास है यह आयोजन? 'हर-घर तिरंगा' और 'वंदे मातरम' का संगम

इस वर्ष का स्वतंत्रता दिवस समारोह कई मायनों में ऐतिहासिक और विशेष महत्व रखता है:

'वंदे मातरम' के 150 वर्ष: हमारे राष्ट्रीय जीवन में अमूल्य ऊर्जा और क्रांति का संचार करने वाले अमर गीत 'वंदे मातरम' के रचना और प्रभाव के 150 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस ऐतिहासिक मील के पत्थर को याद करते हुए स्कूलों में विशेष शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियां कराई जा रही हैं।

हर-घर तिरंगा का संकल्प: इस अभियान का मूल उद्देश्य हर नागरिक के मन में राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान जगाना और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों से नई पीढ़ी को रू-ब-रू कराना है। अकबरनगर के स्कूलों ने इस उद्देश्य को धरातल पर उतारने में बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका निभाई है।

प्रभात फेरी और नारों से गूंजा अकबरनगर बाजार

अकबरनगर क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों—जैसे मध्य विद्यालय अकबरनगर, उच्च विद्यालय और अन्य प्राथमिक परिसरों—से सुबह-सुबह जब बच्चों की प्रभात फेरी निकली, तो पूरा इलाका देशभक्ति के रंगों में रंग गया:

हाथों में तिरंगा, जुबां पर राष्ट्रभक्ति: बच्चे दो कतारों में अनुशासनबद्ध होकर हाथों में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा थामे चल रहे थे। उनके द्वारा लगाए जा रहे "भारत माता की जय", "वंदे मातरम" और "सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा" के नारों से पूरा बाजार और आसपास की गलियां गूंज उठीं।

स्थानीय लोगों का उत्साहवर्धन: जब बच्चों की यह प्रभात फेरी मुख्य मार्गों से गुजरी, तो दुकानों और घरों से निकलकर स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों ने ताली बजाकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया। कई बुजुर्गों की आंखें बच्चों के इस जज्बे को देखकर नम हो गईं।

स्कूलों में विशेष प्रतियोगिताओं और गोष्ठियों का आयोजन

प्रभात फेरी के अलावा विद्यालयों के भीतर बच्चों की प्रतिभा को निखारने और उन्हें इतिहास से जोड़ने के लिए कई रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया:

चित्रकला और भाषण प्रतियोगिता: बच्चों ने तिरंगे की बनावट, भारत के मानचित्र और स्वतंत्रता सेनानियों (जैसे महात्मा गांधी, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस और मंगल पांडे) के चित्रों को कागजों पर उकेरा। भाषण प्रतियोगिताओं में छात्र-छात्राओं ने 'वंदे मातरम' के इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में इसके महत्व पर अपने विचार रखे।

शिक्षकों का मार्गदर्शन: स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि तिरंगा केवल तीन रंगों का कपड़ा नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों भारतीयों के सम्मान, त्याग और बलिदान का प्रतीक है। शिक्षकों ने बच्चों को संविधान के प्रति निष्ठावान रहने और देश के विकास में अपना योगदान देने की शपथ दिलाई।

बच्चों और शिक्षकों की जुबानी—देशभक्ति का अनुभव

इस आयोजन में शामिल हुए छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से स्कूलों में किताबी ज्ञान के अलावा व्यावहारिक देशभक्ति की शिक्षा मिलती है:

शिक्षकों का संदेश: विद्यालयों के प्रधान शिक्षकों का कहना था कि सरकारी स्कूलों के बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ सांस्कृतिक और राष्ट्रीय कार्यक्रमों में हमेशा आगे रहते हैं। 'हर-घर तिरंगा' अभियान ने बच्चों के अंदर देश के प्रति समर्पण की भावना को और अधिक मजबूत किया है।

विद्यार्थियों का उत्साह: प्रभात फेरी में शामिल आठवीं और नौवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं ने बड़े गर्व के साथ कहा कि वे अपने घर पर भी तिरंगा फहराएंगे और अपने पड़ोसियों को भी इस अभियान के बारे में जागरूक करेंगे।

अकबरनगर के सरकारी स्कूलों में 'हर-घर तिरंगा' अभियान और 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष के उपलक्ष್ಯ में आयोजित ये कार्यक्रम इस बात का प्रमाण हैं कि हमारे देश की युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति और राष्ट्र के प्रति कितनी जागरूक और संवेदनशील है। प्रभात फेरियों और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से बच्चों में बोई गई देशभक्ति की यह बीज आने वाले समय में एक सशक्त, समृद्ध और सुरक्षित भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगी। अकबरनगर की धरती पर गूंजे ये नारे और बच्चों का यह उत्साह पूरे क्षेत्र में एक सकारात्मक और ऊर्जावान संदेश छोड़ गया है।