मुजफ्फरपुर नगर निगम बोर्ड की बैठक: बदहाल सड़कों और खराब स्ट्रीट लाइटों पर फूटा पार्षदों का गुस्सा; शहर की लचर व्यवस्था पर गरमाया सदन
मुजफ्फरपुर नगर निगम बोर्ड की बैठक एक बार फिर से हंगामेदार और तीखी बहसों के साए में नजर आई। शहर के विकास, बुनियादी सुविधाओं और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर आयोजित इस बैठक में पार्षदों का गुस्सा उस वक्त फूट पड़ा जब शहर की सड़कों की बदहाल स्थिति और खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों का मुद्दा सदन के पटल पर रखा गया। बैठक के दौरान कई वार्ड पार्षदों ने नगर निगम प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। पार्षदों का आरोप था कि शहर की जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है, लेकिन निगम स्तर पर कागजी दावों के अलावा धरातल पर कोई ठोस काम नजर नहीं आ रहा है।
सड़कों की खराब स्थिति पर पार्षदों का तीखा प्रहार
बोर्ड की बैठक की शुरुआत होते ही शहर के विभिन्न वार्डों की मुख्य और आंतरिक सड़कों की जर्जर हालत का मुद्दा छा गया। पार्षदों ने एक स्वर में कहा कि मुजफ्फरपुर शहर की अधिकांश सड़कें इन दिनों गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। जगह-जगह उबड़-खाबड़ रास्ते और गहरे गड्ढे राहगीरों और वाहन चालकों के लिए रोजाना दुर्घटनाओं का सबब बन रहे हैं।
कई पार्षदों ने अपने-अपने वार्डों का हवाला देते हुए बताया कि बारिश के दिनों में इन सड़कों की स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जहाँ जलजमाव के कारण सड़क के गड्ढे दिखाई नहीं देते और लोग चोटिल होकर गिरते हैं। पार्षदों ने आरोप लगाया कि बार-बार गुहार लगाने और प्रस्ताव पास होने के बावजूद सड़कों की मरम्मत या नए निर्माण कार्य की गति बेहद सुस्त है। इस लापरवाही के कारण आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
खराब स्ट्रीट लाइटों का मुद्दा भी छाया, अंधेरे में डूबे कई इलाके
सड़क के बाद बैठक में दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा शहर की खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों (Street Lights) का रहा। पार्षदों ने नगर निगम के अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि शहर के अधिकांश वार्डों में लगाई गई स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से खराब पड़ी हैं। रखरखाव के अभाव में रात होते ही कई प्रमुख मार्ग और गलियां पूरी तरह से अंधेरे में डूब जाती हैं।
अंधेरा होने के कारण इन इलाकों में असामाजिक तत्वों का आतंक बढ़ जाता है और महिलाओं, बुजुर्गों तथा रात में आने-जाने वाले राहगीरों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडराने लगता है। पार्षदों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि लाइटें खराब होने की शिकायत दर्ज कराने के महीनों बाद भी न तो उन्हें सुधारा जाता है और न ही नई लाइटें लगाई जाती हैं। इस व्यवस्था की लाचारी को लेकर सदन में काफी देर तक हंगामा और तीखी नोकझोंक होती रही।
अधिकारियों और मेयर का जवाब और आश्वासन
बोर्ड की बैठक में जब पार्षदों ने सड़कों और स्ट्रीट लाइटों के मुद्दे पर नगर निगम प्रशासन को घेर लिया, तो शीर्ष अधिकारियों और मेयर को सफाई देनी पड़ी। नगर निगम के अधिकारियों ने पार्षदों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए स्वीकार किया कि कुछ इलाकों में रखरखाव और मैंटेनेंस को लेकर समस्याएं जरूर आई हैं।
अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों को बदलने और उनकी मरम्मत के लिए एक विशेष अभियान (Special Drive) चलाया जाएगा। इसके साथ ही, जिन-जिन वार्डों में सड़कें ज्यादा जर्जर हैं, उनकी प्राथमिकता सूची तैयार कर जल्द से जल्द टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाएगी और निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा ताकि शहरवासियों को इस समस्या से निजात मिल सके।
जनता की उम्मीदें और निगम की जवाबदेही
मुजफ्फरपुर नगर निगम बोर्ड की इस बैठक ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि शहर की बुनियादी समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं। सड़क और रोशनी जैसी मूलभूत जरूरतें यदि पूरी नहीं होंगी, तो शहर का विकास अधूरा ही माना जाएगा। पार्षदों द्वारा उठाए गए इन कड़े सवालों के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नगर निगम प्रशासन अपने इन आश्वासनों को कितनी जल्दी धरातल पर उतारता है और मुजफ्फरपुर की जनता को कब तक गड्ढमुक्त सड़कें और रोशन गलियां नसीब होती हैं।