मायागंज अस्पताल में थमने का नाम नहीं ले रहा ठगी का काला कारोबार बीते दो दिनों में सामने आए मामलों से मचा हड़कंप, मरीजों और परिजनों को बनाया जा रहा है निशाना
भागलपुर: उत्तर बिहार और सीमांचल क्षेत्र के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान कहे जाने वाले जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (मायागंज अस्पताल) में इलाज कराने आने वाले गरीब और असहाय मरीजों के साथ धोखाधड़ी और ठगी का सिलसिला लगातार जारी है। अस्पताल प्रशासन और सुरक्षा बलों की तमाम सख्ती के बावजूद सक्रिय ठग गिरोह बाज नहीं आ रहे हैं। प्राप्त ताजा जानकारी के अनुसार, बीते दो दिनों में अस्पताल परिसर के भीतर मरीजों और उनके परिजनों को ठगी का शिकार बनाने के कई नए मामले प्रकाश में आए हैं। इन घटनाओं ने एक बार फिर अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और स्वास्थ्य प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे आम जनता में भारी रोष व्याप्त है।
बीते दो दिनों में कैसे दिया गया वारदातों को अंजाम?
अस्पताल सूत्रों और पीड़ित परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ठगों ने बड़े शातिर तरीके से अपनी वारदातों को अंजाम दिया है:
दलालों और फर्जी एजेंटों का जाल: अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड, ओपीडी (OPD) काउंटर और दवा काउंटर के आसपास सक्रिय ठग खुद को अस्पताल का कर्मचारी या किसी बड़े डॉक्टर का करीबी बताकर मरीजों के तीमारदारों को अपने जाल में फंसाते हैं।
जांच और बाहर से दवा के नाम पर ठगी: बीते दो दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां ठगों ने कम समय में खून की जांच (Blood Test), एक्स-रे या एमआरआई (MRI) सस्ते में कराने का झांसा दिया और हजारों रुपए लेकर रफूचक्कर हो गए।
सरकारी योजनाओं के नाम पर धोखाधड़ी: आयुष्मान भारत या अन्य सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर भी भोले-भाले ग्रामीण मरीजों से अवैध वसूली की जा रही है, जिससे गरीब परिवार आर्थिक तंगी के बीच और अधिक पिस रहे हैं।
अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक खामियां
मायागंज अस्पताल में इस प्रकार की आपराधिक गतिविधियां कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण इन पर लगाम नहीं कस पा रही है:
निगरानी का अभाव: अस्पताल के विशाल परिसर में सीसीटीवी कैमरों की कमी और कई जगहों पर उनके खराब होने का फायदा ये शातिर अपराधी उठाते हैं।
निजी सुरक्षा गार्डों की संदिग्ध भूमिका: कई बार मरीजों के परिजनों द्वारा यह भी आरोप लगाया जाता है कि अस्पताल परिसर में तैनात कुछ निजी सुरक्षाकर्मियों और दलालों के बीच सांठगांठ होती है, जिसके कारण ये बेखौफ होकर अपनी गतिविधियों को अंजाम देते हैं।
पुलिस चौकी की निष्क्रियता: अस्पताल परिसर में पुलिस चौकी होने के बावजूद त्वरित कार्रवाई न होना पीड़ितों के लिए एक बड़ी निराशा का कारण बनता है, जिससे ठगों के हौसले बुलंद हैं।
पीड़ितों की पीड़ा और आम जनता का आक्रोश
दूर-दराज के गांवों से अपने बीमार परिजनों को लेकर मायागंज अस्पताल पहुंचने वाले लोग पहले से ही मानसिक और आर्थिक रूप से टूटे होते हैं:
दोहरी मार: इलाज के खर्चों से जूझ रहे गरीबों के साथ जब अस्पताल परिसर में ठगी हो जाती है, तो उनकी स्थिति दयनीय हो जाती है। पैसे छिन जाने के कारण कई मरीज समय पर दवा या जांच नहीं करा पाते हैं।
प्रशासन के खिलाफ गुस्सा: स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कड़ा रोष व्यक्त करते हुए मांग की है कि परिसर में सक्रिय ऐसे दलाल गिरोहों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
मायागंज अस्पताल में बीते दो दिनों के दौरान मरीजों के साथ हुई ठगी की ये घटनाएं अस्पताल की व्यवस्था पर एक बड़ा कलंक हैं। जब तक प्रशासन कड़े कदम उठाकर परिसर में सक्रिय दलालों और फर्जी एजेंटों के नेटवर्क को नेस्तनाबूद नहीं करता, तब तक गरीब मरीजों का यूं ही शोषण होता रहेगा। आवश्यकता इस बात की है कि अस्पताल प्रबंधन पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर एक विशेष अभियान चलाए, ताकि इस पवित्र चिकित्सा संस्थान को ठगों के चंगुल से पूरी तरह मुक्त कराया जा सके और मरीजों को सुरक्षित माहौल मिल सके।