पूर्णिया विश्वविद्यालय में श्रद्धा के साथ मनाई गई भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि: सीनेट हॉल में शिक्षकों, अधिकारियों और छात्रों ने दी श्रद्धांजलि, युवाओं के लिए उनके विचारों को बताया प्रेरणास्त्रोत
बिहार के शिक्षा जगत के प्रमुख केंद्र माने जाने वाले पूर्णिया विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में देश के पूर्व राष्ट्रपति, महान वैज्ञानिक और 'मिसाइल मैन' के नाम से विश्वविख्यात भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि बेहद सादगी, भव्यता और अपार श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें पूर्णिया विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षकों, शोधार्थियों और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। सभी ने डॉ. कलाम के तैलচিত্র पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके महान जीवन तथा देश के प्रति उनके अमूल्य योगदान को याद किया।
क्या था कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य और आयोजन का स्वरूप?
प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, पूर्णिया विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी और विद्यार्थियों को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन संघर्ष, उनकी वैज्ञानिक सोच और उनके उच्च विचारों से अवगत कराना था। कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के अधिकारियों और प्राध्यापकों द्वारा दीप प्रज्वलन और डॉ. कलाम के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई।
इस दौरान पूरा सभागार डॉ. कलाम के सम्मान में गूंज उठा। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि डॉ. कलाम केवल एक राष्ट्रपति या वैज्ञानिक नहीं थे, बल्कि वे एक ऐसे महान दार्शनिक और शिक्षक थे, जिनका पूरा जीवन देश की सेवा और युवाओं के उत्थान के लिए समर्पित था।
वक्ताओं के विचार: "डॉ. कलाम के विचार युवाओं के लिए सबसे बड़ा प्रेरणास्त्रोत"
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए पूर्णिया विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्रोफेसरों, डीन और प्रशासनिक अधिकारियों ने डॉ. कलाम के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने प्रमुख रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर अपने विचार रखे:
सपनों को जीने की प्रेरणा: वक्ताओं ने कहा कि डॉ. कलाम का वह प्रसिद्ध कथन — "सपने वो नहीं जो हम सोते हुए देखते हैं, सपने वे हैं जो हमें सोने नहीं देते" — आज की युवा पीढ़ी के लिए एक मार्गदर्शक मंत्र है। उन्होंने हमेशा युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा दी।
सादा जीवन और उच्च विचार: देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद (राष्ट्रपति भवन) पर रहने के बावजूद डॉ. कलाम का जीवन अत्यंत सादगीपूर्ण था। उनकी असली पूंजी उनकी किताबें, उनका ज्ञान और उनके संस्कार थे।
शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का आधार मानना: डॉ. कलाम हमेशा से मानते थे कि शिक्षा ही वह सशक्त माध्यम है जो समाज और देश की तस्वीर बदल सकती है। वे छात्रों से विशेष स्नेह रखते थे और अक्सर स्कूलों व कॉलेजों में जाकर बच्चों से संवाद किया करते थे।
छात्रों ने भी साझा किए अपने अनुभव और संकल्प
इस श्रद्धांजलि सभा में शामिल होने वाले छात्र-छात्राओं में भी गजब का उत्साह और सम्मान देखने को मिला। कई शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने डॉ. कलाम के जीवन पर अपने विचार रखे। छात्रों का कहना था कि डॉ. कलाम का जीवन हमें यह सिखाता है कि सफलता कभी भी संसाधनों की मोहताज नहीं होती, बल्कि इसके लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और सच्ची लगन की आवश्यकता होती है।
छात्रों ने संकल्प लिया कि वे डॉ. कलाम के बताए मार्ग पर चलेंगे और अपने ज्ञान का उपयोग देश और समाज की भलाई के लिए करेंगे। कार्यक्रम के अंत में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई।
युवाओं और समाज के लिए एक चिरस्थायी संदेश
पूर्णिया विश्वविद्यालय के सीनेट हॉल में आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का प्रतीक है कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम आज भी करोड़ों भारतीयों, विशेषकर युवाओं के दिलों में जीवित हैं। उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित इन आयोजनों के माध्यम से यह संदेश घर-घर तक पहुँचता है कि यदि देश को एक विकसित राष्ट्र बनाना है, तो युवाओं को डॉ. कलाम की वैज्ञानिक दृष्टि, ईमानदारी और राष्ट्रभक्ति के पथ पर चलना होगा। यह आयोजन न केवल एक श्रद्धांजलि थी, बल्कि एक नई ऊर्जा और संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान भी था।