छठी वित्त योजना में कथित फर्जी जांच रिपोर्ट सौंपने वाले कनीय अभियंता अजय भारती पर कार्रवाई की मांग; उच्चस्तरीय जांच और वित्तीय अनियमितता उजागर करने की हुंकार

बिहार के ग्रामीण विकास और पंचायती राज व्यवस्था में योजनाओं के क्रियान्वयन और उसमें बरती जाने वाली अनियमितताओं को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। जब सरकारी तंत्र में बैठे जिम्मेदार अधिकारी ही योजनाओं की पारदर्शिता को ताक पर रखकर कागजों पर विकास दिखाने का खेल खेलते हैं, तो आम जनता का आक्रोश सड़कों पर उतरना स्वाभाविक हो जाता है। समस्तीपुर जिले के अंतर्गत आने वाले खानपुर प्रखंड की श्रीपुर गाहर पूर्वी पंचायत (Shripur Gahar Purvi Panchayat) से एक ऐसा ही गंभीर मामला प्रकाश में आया है, जहाँ छठी वित्त योजना (6th Finance Commission Scheme) के तहत कराए गए विकास कार्यों या फंड के उपयोग में भारी धांधली का आरोप लगाया गया है।

इस पूरे प्रकरण के केंद्र में ग्रामीण जनता का गुस्सा कनीय अभियंता (Junior Engineer - JE) अजय भारती के खिलाफ फूट पड़ा है। ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि कनीय अभियंता अजय भारती ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए स्थल पर बिना किसी वास्तविक कार्य के या मानकों को ताक पर रखकर गलत और मनगढ़ंत जांच रिपोर्ट (Wrong Inspection Report) प्रस्तुत की है, जिससे सरकारी राशि के बंदरबांट का रास्ता साफ हो सके। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद से श्रीपुर गाहर पूर्वी पंचायत के वार्डों और गांवों में भारी तनाव का माहौल है। आक्रोशित ग्रामीणों ने लिखित और मौखिक रूप से जिला प्रशासन से कनीय अभियंता अजय भारती के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कड़ी कानूनी और विभागीय कार्रवाई करने की मांग की है। आइए खानपुर के श्रीपुर गाहर पूर्वी पंचायत में घटी इस प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।

पृष्ठभूमि: छठी वित्त योजना और श्रीपुर गाहर पूर्वी पंचायत का विवाद

स्थानीय निकायों और पंचायतों के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा समय-समय पर वित्तीय आयोगों के माध्यम से करोड़ों रुपये की राशि आवंटित की जाती है, ताकि गांवों की तकदीर और तस्वीर बदल सके।

छठी वित्त योजना का उद्देश्य: पंचायतों में पेयजल, स्वच्छता, नाली-गली निर्माण और मूलभूत बुनियादी ढांचे के विकास के लिए छठी वित्त योजना के तहत मिलने वाली राशि का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाना अनिवार्य होता है। इसके लिए नियम यह है कि कार्य पूरा होने के बाद तकनीकी विशेषज्ञों यानी कनीय अभियंताओं द्वारा स्थल निरीक्षण कर उसकी रिपोर्ट सौंपी जाती है।

भ्रष्टाचार की बू: श्रीपुर गाहर पूर्वी पंचायत में जब छठी वित्त योजना के तहत विभिन्न योजनाओं की कागजी प्रक्रिया पूरी होने लगी, तो स्थानीय जागरूक ग्रामीणों को उसमें गंभीर गड़बड़ियों की बू आई। ग्रामीणों ने जब जमीन पर उतरकर पड़ताल की, तो पाया कि योजनाओं के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है या फिर कागजों पर ही कार्य दिखाकर राशि की निकासी की तैयारी है।

ग्रामीणों के गंभीर आरोप: कनीय अभियंता अजय भारती पर गलत जांच रिपोर्ट देने का दावा

श्रीपुर गाहर पूर्वी पंचायत के प्रबुद्ध नागरिकों और वार्ड सदस्यों ने कनीय अभियंता अजय भारती की कार्यप्रणाली पर सीधे तौर पर अंगुली उठाई है और कई गंभीर आरोप जड़े हैं।

फर्जी और मनगढ़ंत जांच रिपोर्ट सौंपना: ग्रामीणों का मुख्य आरोप यह है कि कनीय अभियंता अजय भारती ने धरातल पर हुए कार्यों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किए बिना ही अपने कार्यालय में बैठकर या संवेदकों (Contractors) के साथ मिलकर एकतरफा और गलत जांच रिपोर्ट तैयार कर दी। इस रिपोर्ट में धरातल से उलट तस्वीर पेश की गई ताकि अवैध निकासी को सही ठहराया जा सके।

मिलीभगत और सरकारी धन की लूट: ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई तकनीकी अधिकारी ही इस तरह की गलत रिपोर्ट पेश करने लगे, तो पारदर्शिता की सारी उम्मीदें दम तोड़ देती हैं। इस मामले में ठेकेदारों, बिचौलियों और कनीय अभियंता अजय भारती के बीच गहरी मिलीभगत है, जिसका उद्देश्य जनता के टैक्स के पैसों का दुरुपयोग करना है।

आक्रोशित ग्रामीणों की मांग: उच्चस्तरीय जांच और तत्काल कार्रवाई

कनीय अभियंता की इस कथित कारगुजारियों से आहत ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है और प्रशासनिक अधिकारियों तक अपनी बात पहुँचा दी है।

निष्पक्ष जांच की पुरजोर मांग: ग्रामीणों ने समस्तीपुर जिला प्रशासन और खानपुर प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि श्रीपुर गाहर पूर्वी पंचायत में छठी वित्त योजना के तहत जितनी भी योजनाओं की फाइलें पास हुई हैं और जिन पर कनीय अभियंता अजय भारती ने अपनी रिपोर्ट दी है, उनकी एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय टीम से भौतिक जांच कराई जाए।

दोषी अभियंता पर विभागीय व कानूनी कार्रवाई: ग्रामीणों की दो टूक मांग है कि यदि जांच में कनीय अभियंता अजय भारती दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें तुरंत निलंबित किया जाए और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा अन्य सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर जेल भेजा जाए।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया और आगे की राह

इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद खानपुर प्रखंड और जिला मुख्यालय के प्रशासनिक गलियारों में भी सुगबुगाहट तेज हो गई है।

अधिकारियों का आश्वासन: हालांकि स्थानीय प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है, लेकिन उच्चाधिकारियों ने यह जरूर कहा है कि ग्रामीणों द्वारा दिए गए ज्ञापनों और शिकायतों की गंभीरता से समीक्षा की जा रही है। यदि कनीय अभियंता स्तर पर कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो किसी को बख्शा नहीं जाएगा।

भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता की एकजुटता: श्रीपुर गाहर पूर्वी पंचायत की यह घटना इस बात का प्रतीक है कि अब ग्रामीण अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रहे हैं और सरकारी योजनाओं में होने वाली लूट को चुपचाप सहन करने के बजाय उसका प्रतिकार कर रहे हैं।

खानपुर के श्रीपुर गाहर पूर्वी पंचायत में छठी वित्त योजना के अंतर्गत कनीय अभियंता अजय भारती द्वारा कथित तौर पर गलत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने का मामला सिर्फ एक पंचायत का विवाद नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण विकास योजनाओं में फैले भ्रष्टाचार की एक बानगी है। जब तक तकनीकी पदों पर बैठे अधिकारी अपनी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय नहीं देंगे, तब तक जमीनी स्तर पर विकास के दावे खोखले साबित होते रहेंगे। ग्रामीणों द्वारा की जा रही जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग पूरी तरह से न्यायसंगत है। अब यह जिला प्रशासन की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी बनती है कि वे इस मामले में पारदर्शी जांच कराकर दूध का दूध और पानी का पानी करें, ताकि सरकारी धन के लुटेरों के हौसले पस्त हो सकें और जनता का व्यवस्था पर विश्वास कायम रह सके।