कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही: एक पक्ष की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज, दूसरे पक्ष की उपेक्षा से उठे सवाल; पुलिस कार्यशैली पर लग रहे गंभीर आरोप

पूर्णिया (बिहार): बिहार के पूर्णिया जिले से पुलिस प्रशासन की कार्यशैली और पक्षपातपूर्ण रवैये को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। न्याय व्यवस्था में जहाँ दोनों पक्षों की बात सुनकर निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद की जाती है, वहीं यहाँ कानून के दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लग रहा है। प्राप्त विवरण के अनुसार, एक ही विवाद में एक पक्ष की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली, जबकि दूसरे पक्ष द्वारा लिखित शिकायत देने के बावजूद पुलिस ने कोई भी सुसंगत कार्रवाई नहीं की। इस तरह के एकतरफा रवैये से पीड़ित दूसरे पक्ष में भारी आक्रोश व्याप्त है और पुलिस की भूमिका पर बड़े सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।

आइए जानते हैं इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि, पुलिसिया लापरवाही के आयामों और निष्पक्ष न्याय की मांग को लेकर उठ रही आवाज़ों का एक विस्तृत विश्लेषण।

 विवाद की पृष्ठभूमि और एकतरफा कार्रवाई

मामला पूर्णिया जिले के किसी स्थानीय थाने से जुड़ा है, जहाँ दो पक्षों के बीच किसी बात को लेकर आपसी विवाद या मारपीट की घटना घटी थी।

एक पक्ष की एफआईआर दर्ज: विवाद के बाद जब एक पक्ष थाने पहुँचा और अपनी शिकायत दर्ज कराई, तो पुलिस ने बिना देर किए त्वरित कार्रवाई करते हुए तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर ली।

दूसरे पक्ष की अनदेखी: इसके विपरीत, जब दूसरा पक्ष अपनी पीड़ा और साक्ष्यों के साथ न्याय की गुहार लगाने थाने पहुँचा, तो पुलिस ने उनकी बात अनसुनी कर दी और न तो कोई सनहा (General Diary) दर्ज किया और न ही कोई कानूनी कार्रवाई की।

 पुलिस कार्यशैली पर उठते गंभीर सवाल

कानूनी जानकारों और स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि पुलिस का यह रवैया कानून के शासन के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।

निष्पक्षता का अभाव: पुलिस का काम किसी एक पक्ष का पक्ष लेना नहीं, बल्कि निष्पक्ष रूप से अनुसंधान कर सच्चाई का पता लगाना होता है। जब पुलिस खुद ही पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने लगे, तो आम जनता का कानून से भरोसा उठने लगता है।

दबाव या लापरवाही: दूसरे पक्ष की शिकायत पर कार्रवाई न होने के पीछे स्थानीय स्तर पर किसी प्रकार के दबाव या पुलिसकर्मियों की कर्तव्य निर्वहन में भारी लापरवाही को मुख्य वजह माना जा रहा है।

 न्याय की गुहार और आगे की स्थिति

अपने साथ हुए अन्याय और पुलिस द्वारा सुनवाई न किए जाने से आहत दूसरे पक्ष के लोगों ने उच्चाधिकारियों तक गुहार लगाने का मन बनाया है।

एसएसपी या एसपी से शिकायत: पीड़ित पक्ष का कहना है कि वे इस मामले की लिखित शिकायत पूर्णिया के पुलिस अधीक्षक (SP) या वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से करेंगे, ताकि निष्पक्ष जाँच हो सके और दोषी पुलिसकर्मियों व विरोधी पक्ष पर उचित कार्रवाई हो सके।

पारदर्शिता की आवश्यकता: कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए यह आवश्यक है कि पुलिस बिना किसी दबाव या भेदभाव के दोनों पक्षों की शिकायतों की सत्यता की जाँच करे।

पूर्णिया में पुलिस द्वारा एक पक्ष पर मेहरबानी और दूसरे पक्ष की शिकायत की अनदेखी करने का यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलता है। कर्तव्य निर्वहन में इस तरह की लापरवाही न केवल न्याय के अधिकारों का हनन करती है, बल्कि समाज में तनाव को भी बढ़ाती है। उच्चाधिकारियों को इस मामले का संज्ञान लेकर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कदम उठाना चाहिए, ताकि आम जनता में कानून के प्रति विश्वास बरकरार रह सके।