महिषी में सावन की चौथी सोमवारी पर उमड़े शिव भक्त: दूसरी ओर रक्षाबंधन के पावन पर्व पर सहरसा बाजार में छाई रौनक

 बिहार के सहरसा जिले के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल महिषी में सावन मास की चौथी सोमवारी के अवसर पर श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब देखने को मिला। चिलचिलाती धूप और उमस के बावजूद शिव भक्तों की आस्था में कोई कमी नहीं आई। सुबह से ही विभिन्न शिवालयों और प्रसिद्ध मंदिरों में भक्तों ने कतारबद्ध होकर शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित किया, विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और देवाधिदेव महादेव का भव्य श्रृंगार किया। वहीं दूसरी ओर, सावन के अंतिम पड़ाव और रक्षाबंधन के पावन पर्व के आगमन से सहरसा का मुख्य बाजार पूरी तरह गुलजार हो गया है। राखी, मिठाइयों और कपड़ों की दुकानों पर खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ने से पूरा बाजार पर्व के उल्लास से महक उठा है।

 महिषी में सावन की चौथी सोमवारी: गूंजा 'हर-हर महादेव' का नारा

महिषी प्रखंड क्षेत्र में सावन की चौथी सोमवारी का पर्व अत्यंत धार्मिक उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया।

सुबह से ही मंदिरों में भक्तों का तांता: महिषी के प्राचीन और प्रसिद्ध शिव मंदिरों में अहले सुबह से ही जलाभिषेक के लिए भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर इस अनुष्ठान में हिस्सा लिया।

गंगाजल और बेलपत्र अर्पण: दूर-दराज से पहुंचे भक्तों ने पवित्र गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित कर भगवान शिव की आराधना की।

भगवान शिव का अलौकिक श्रृंगार: पुजारियों और स्थानीय युवाओं द्वारा भगवान भोलेनाथ का विशेष और आकर्षक श्रृंगार किया गया, जिसे देखने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयकारों से पूरा महिषी क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।

धार्मिक महत्व और सांस्कृतिक उल्लास

सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए समर्पित है, और इसकी हर सोमवारी का अपना विशेष महत्व होता है।

चौथी सोमवारी का विशेष फल: मान्‍यताओं के अनुसार, सावन की चौथी सोमवारी के दिन व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं और मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।

श्रद्धालुओं का उत्साह: सावन के समापन की ओर बढ़ रहे इस अंतिम चरण में शिव भक्तों की श्रद्धा देखते ही बनती थी। प्रशासन द्वारा भी मंदिरों के आसपास सुरक्षा और शांति व्यवस्था के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए थे, ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना न करना पड़े।

रक्षाबंधन के पावन पर्व पर सहरसा बाजार में रौनक

सावन मास के समापन और भाई-बहन के पवित्र प्रेम के प्रतीक पर्व रक्षाबंधन के नजदीक आते ही सहरसा जिला मुख्यालय सहित विभिन्न बाजारों (जैसे थाना चौक, महावीर चौक, और दूर्गा स्थान चौक) की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है।

रंग-बिरंगी राखियों की दुकानें: बाजार में सजी राखियों की दुकानें हर किसी का मन मोह रही हैं। रेशमी धागों से लेकर बच्चों के लिए कार्टून वाली राखियां, और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक व फैंसी राखियों की बड़ी रेंज बाजार में उपलब्ध है।

खरीदारों की भारी भीड़: बहनों में अपने भाइयों के लिए कलाई पर बांधने वाली सबसे सुंदर राखी खरीदने की होड़ सी मची है। सुबह से लेकर देर शाम तक बाजारों में खरीदारों की भीड़ बनी रहती है, जिससे दुकानदारों के चेहरों पर भी खुशी साफ झलक रही है।

मिठाइयों और कपड़ों के बाजारों में जबरदस्त उछाल

रक्षाबंधन का त्योहार बिना मिठाइयों और उपहारों के अधूरा माना जाता है, यही वजह है कि सहरसा की मिठाई की दुकानों पर भी खासी चहल-पहल देखी जा रही है।

मिठाइयों की विशेष मांग: रसगुल्ला, काजू कतली, सोनपापड़ी और विभिन्न प्रकार की पारंपरिक मिठाइयों की बंपर बिक्री हो रही है। दुकानदारों ने शुद्धता और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखते हुए मिठाइयों के विशेष स्टॉक तैयार किए हैं।

वस्त्र बाजार में उमंग: भाई-बहनों के लिए नए परिधानों (कपड़ों) की खरीदारी के लिए भी परिधान बाजारों (रेडीमेड गारमेंट्स) में ग्राहकों का तांता लगा हुआ है। इस त्योहारी सीजन में बाजार का कारोबार काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

सहरसा जिले में एक तरफ जहां महिषी के शिवालयों में सावन की चौथी सोमवारी पर आस्था की त्रिवेणी बही, वहीं दूसरी ओर रक्षाबंधन के त्योहार ने पूरे शहर के बाजारों में खुशियों और उत्साह का रंग भर दिया है। यह समय सहरसा वासियों के लिए भक्ति और पारिवारिक उल्लास का एक अनूठा संगम साबित हो रहा है, जहां धर्म और संस्कृति दोनों के रंग एक साथ खिल उठे हैं।