शहर की बदहाल सड़कें नारद पुल से कांवरिया पथ तक अतिक्रमण और बालू के ढेरों ने बढ़ाई राहगीरों की मुसीबत

भागलपुर/क्षेत्रीय रिपोर्ट: श्रावणी मेला के नजदीक आते ही कांवरिया पथ और शहर की प्रमुख सड़कों की बदहाली एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। जगह-जगह बालू के ढेर, सड़कों पर फैला अतिक्रमण और नारद पुल के पास रास्ते का पूरी तरह अवरुद्ध होना न केवल प्रशासन की लचर व्यवस्था को दर्शाता है, बल्कि आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं के लिए बड़ी मुसीबत का संकेत भी दे रहा है।

नारद पुल पर 'ब्लॉक' है रास्ता

श्रावणी मेला में अब गिने-चुने दिन शेष रह गए हैं, लेकिन कांवरिया पथ की तैयारियां अधूरी पड़ी हैं। स्थिति यह है कि नारद पुल के पास रास्ता पूरी तरह ब्लॉक हो गया है। स्थानीय लोगों और कांवरियों का कहना है कि वहां न केवल अतिक्रमण का बोलबाला है, बल्कि गंदगी और जलजमाव की समस्या ने भी जीना मुहाल कर दिया है। नारद पुल के पास एक ओर जहाँ वाटर पोस्ट से पानी तो गिर रहा है, लेकिन दूसरी ओर शौचालय की बदहाली और गोबर की सड़ांध ने स्थिति को और भी नारकीय बना दिया है। यहाँ से गुजरने वाले श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

सड़कों पर 'बालू का साम्राज्य'

केवल नारद पुल ही नहीं, बल्कि कांवरिया पथ के पूरे मार्ग में जगह-जगह सफेद बालू के ढेर लगा दिए गए हैं। कहीं-कहीं तो बालू अभी तक बिछाया भी नहीं गया है, जिससे मार्ग उबड़-खाबड़ बना हुआ है। अंडरपास के आगे भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही है, जहाँ बेतरतीब ढंग से रखे गए बालू के ढेर वाहनों और पैदल चलने वालों के लिए बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। कई जगहों पर पशुओं का चारा और अन्य सामान रखकर रास्ते को सिकोड़ दिया गया है, जिससे सड़क की चौड़ाई काफी कम हो गई है।

अतिक्रमण से सिकुड़ती सड़कें

बिहार के कई जिलों की तरह, स्थानीय सड़कों पर अतिक्रमण एक गंभीर समस्या बन चुका है। सड़कों के किनारे दुकानें सजने लगी हैं, लेकिन रास्ते तैयार नहीं हैं। कहीं बांस-बल्ले से घेरकर तो कहीं पक्की दीवारें बनाकर लोगों ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है। हालांकि प्रशासन द्वारा समय-समय पर बुलडोजर कार्रवाई की जाती है, लेकिन कार्रवाई के कुछ समय बाद ही स्थिति फिर पुरानी जैसी हो जाती है।

प्रशासन की चुप्पी पर ग्रामीणों का आक्रोश

ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। श्रावणी मेला जैसी महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, बावजूद इसके व्यवस्था में सुधार नदारद है। स्थिति यह है कि मंत्री स्तर के निरीक्षण के दौरान भी उन्हें गुजरने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है।

सुधार की सख्त जरूरत

सड़कों पर पसरे इस अतिक्रमण और गंदगी के कारण न केवल दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है, बल्कि शहर की सुंदरता और सुगम यातायात भी प्रभावित हो रहा है। यदि समय रहते इन अवरोधों को नहीं हटाया गया और सड़कों का समतलीकरण नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में कांवरियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

स्थानीय जनता ने एक बार फिर प्रशासन से मांग की है कि नारद पुल से लेकर पूरे कांवरिया पथ तक से अतिक्रमण हटाया जाए, बालू के ढेरों को साफ किया जाए और मार्ग को श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए सुलभ बनाया जाए।