महिला अस्पताल की जर्जर दीवार बनी 'यमराज', कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
सुल्तानगंज (भागलपुर): विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला के दौरान सुल्तानगंज में लाखों की संख्या में कांवरियों का सैलाब उमड़ता है। उत्तरवाहिनी गंगा तट से जल भरकर देवघर के लिए प्रस्थान करने वाले कांवरियों के लिए शहर की हर गली और रास्ता अहम हो जाता है। इन्हीं में से एक अति-संवेदनशील मार्ग है—'महिला अस्पताल गली'। यह मार्ग न केवल कांवरियों के लिए, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी आवाजाही का मुख्य साधन है। लेकिन, वर्तमान में यह गली मौत के मुहाने पर खड़ी है। इस गली की चारदीवारी इतनी जर्जर हो चुकी है कि वह कभी भी भरभरा कर गिर सकती है, जिससे किसी बड़ी अनहोनी का खतरा मंडरा रहा है।
भीड़ का दबाव और जर्जर दीवार का जोखिम
श्रावणी मेला के दौरान इस गली में तिल रखने की भी जगह नहीं होती। हजारों कांवरियों का जत्था दिन-रात यहां से गुजरता है। ऐसे में जर्जर दीवार का खड़ा रहना किसी बड़े खतरे को आमंत्रण देने जैसा है। अस्पताल प्रबंधन और स्थानीय लोगों का कहना है कि दीवार की ईंटें उखड़ रही हैं और वह अंदर की तरफ झुक गई है। तेज हवा या भारी भीड़ के दबाव से यह दीवार किसी भी क्षण ढह सकती है।
अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चिंता जाहिर करते हुए कहा, "हमने कई बार संबंधित विभाग को इस खतरे के बारे में सूचित किया है। मेला शुरू हो चुका है और भीड़ का दबाव बढ़ता जा रहा है, लेकिन अभी तक मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हो सका है।"
क्यों है यह रास्ता इतना महत्वपूर्ण?
सुल्तानगंज में श्रावणी मेला के दौरान मुख्य सड़कों पर जाम की स्थिति बनी रहती है। ऐसे में कांवरिया शॉर्टकट के रूप में महिला अस्पताल गली का उपयोग करते हैं। यह गली गंगा घाट को मुख्य बाजार और रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले रास्तों से जोड़ती है।
सुरक्षा का अभाव: दीवार के नीचे से होकर हर रोज हजारों श्रद्धालु गुजरते हैं। यदि यह दीवार गिरती है, तो भगदड़ मच सकती है और जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है।
प्रशासनिक अनदेखी: स्थानीय प्रशासन द्वारा बैरिकेडिंग और सफाई पर तो ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन बुनियादी ढांचे की इस खतरनाक कमी को नजरअंदाज किया जा रहा है।
क्या कहते हैं अस्पताल प्रबंधन और स्थानीय लोग?
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने दीवार की मरम्मत के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि अस्पताल का परिसर और दीवार का बाहरी हिस्सा सार्वजनिक उपयोग में आता है, इसलिए इसे केवल अस्पताल के बजट से ठीक कराना संभव नहीं है।
स्थानीय निवासी और दुकानदारों का कहना है कि, "प्रशासन कांवरियों की सुविधा के लिए करोड़ों रुपये खर्च करता है, लेकिन क्या एक दीवार की मरम्मत के लिए बजट नहीं है? अगर कल को कोई हादसा होता है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?" निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि श्रावणी मेला खत्म होने तक वहां अस्थायी सुरक्षा घेरा बनाया जाए ताकि लोग दीवार के करीब न जाएं।
प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल
सुल्तानगंज के इस महत्वपूर्ण मार्ग पर मंडरा रहे खतरे को लेकर प्रशासनिक उदासीनता चर्चा का विषय बनी हुई है। नगर परिषद और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय की कमी के कारण मरम्मत का काम लटका हुआ है। जब मेला अपने चरम पर होता है, तब छोटी-सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है।
अति-आवश्यक उपाय: अब भी वक्त है
हादसे को रोकने के लिए प्रशासन को तुरंत निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:
अस्थायी सुरक्षा (Support): जब तक दीवार की पक्की मरम्मत न हो, तब तक बांस-बल्ली का सहारा (Scaffolding) देकर इसे सुरक्षित किया जाए।
डायवर्जन: कांवरियों की भीड़ को फिलहाल इस गली के बजाय किसी सुरक्षित वैकल्पिक रास्ते से मोड़ा जाए।
चेतावनी बोर्ड: गली के दोनों मुहानों पर 'खतरा' और 'सावधान' के बोर्ड लगाए जाएं ताकि राहगीर सचेत रहें।
सुरक्षा सर्वोपरि
श्रावणी मेला आस्था और भक्ति का संगम है, लेकिन इसमें सुरक्षा सबसे पहले आनी चाहिए। सुल्तानगंज की महिला अस्पताल गली की यह दीवार न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली की परीक्षा ले रही है, बल्कि यह उन हजारों श्रद्धालुओं के जीवन की भी सुरक्षा का सवाल है जो अपनी मन्नत पूरी करने सुल्तानगंज आते हैं।
यदि प्रशासन समय रहते नहीं जागा, तो यह जर्जर दीवार आने वाले दिनों में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस खबर के प्रकाशन के बाद तुरंत संज्ञान लेगा और दीवार की मरम्मत कर सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करेगा।