दिव्यांग मरीज को बाइक पर खटिया बांधकर पहुंचाया SKMCH, महीनों से पेंशन भी नहीं मिलने का आरोप
मुजफ्फरपुर। बिहार में सुशासन और ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को लेकर किए जा रहे दावों के बीच मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच से सामने आई एक तस्वीर ने स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक दिव्यांग मरीज को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाने के लिए उसके परिजनों को बाइक के ऊपर खटिया यानी चारपाई बांधनी पड़ी। इसी खटिया पर मरीज को लिटाकर अस्पताल लाया गया।
अस्पताल परिसर में जब बाइक पर बंधी खटिया पर मरीज को ले जाते हुए लोग पहुंचे तो आसपास मौजूद लोगों की नजर इस दृश्य पर टिक गई। कुछ ही देर में वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों के बीच इस बात को लेकर चर्चा होने लगी कि अगर गंभीर रूप से बीमार और चलने-फिरने में असमर्थ व्यक्ति को अस्पताल तक पहुंचने के लिए इस तरह का सहारा लेना पड़े, तो ग्रामीण स्वास्थ्य और परिवहन सुविधाओं की वास्तविक स्थिति क्या है।
मरीज की पहचान विनोद साह के रूप में बताई गई है। वह मुजफ्फरपुर जिले के हथौड़ी थाना क्षेत्र के शाहपुर गांव का रहने वाला बताया जा रहा है। विनोद दिव्यांग है और कुछ समय पहले सड़क दुर्घटना में उसका पैर टूट गया था। पैर में चोट लगने के बाद उसकी चलने-फिरने की क्षमता बेहद प्रभावित हुई। अब वह बेडसोर यानी लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने से होने वाले घाव से भी परेशान है।
परिजनों के लिए उसकी हालत में अस्पताल तक ले जाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया। एंबुलेंस या उपयुक्त परिवहन की व्यवस्था नहीं होने के कारण आखिरकार बाइक पर चारपाई बांधकर उसे अस्पताल लाने का रास्ता अपनाया गया।
बाइक पर चारपाई बांधकर अस्पताल पहुंचाया
विनोद साह को जब एसकेएमसीएच लाया गया तो वह सामान्य तरीके से अस्पताल पहुंचने की स्थिति में नहीं था। उसके परिजनों या साथ आए लोगों ने बाइक के ऊपर चारपाई बांधकर एक अस्थायी व्यवस्था तैयार की।
इसके बाद मरीज को उस चारपाई पर लिटाया गया और बाइक के माध्यम से अस्पताल तक लाया गया। यह तरीका न केवल असुविधाजनक था, बल्कि गंभीर रूप से घायल और बेडसोर से पीड़ित व्यक्ति के लिए काफी जोखिम भरा भी हो सकता है।
अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों ने जब यह दृश्य देखा तो वे हैरान रह गए। लोगों का कहना था कि मरीज को इलाज के लिए अस्पताल लाने की स्थिति ही स्वास्थ्य और परिवहन व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती है।
सड़क दुर्घटना के बाद बदली जिंदगी
बताया गया है कि विनोद साह कुछ समय पहले सड़क दुर्घटना का शिकार हुआ था। हादसे में उसका पैर टूट गया। इसके बाद उसकी शारीरिक स्थिति ऐसी हो गई कि उसके लिए सामान्य रूप से चलना-फिरना मुश्किल हो गया।
दिव्यांगता और चोट के कारण उसे लगातार देखभाल की आवश्यकता पड़ने लगी। लंबे समय तक बिस्तर पर रहने के कारण अब वह बेडसोर की समस्या से भी जूझ रहा है।
ऐसी स्थिति में मरीज को नियमित चिकित्सा जांच और उचित देखभाल की जरूरत होती है। लेकिन अस्पताल तक पहुंचना ही परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन गया।
बेडसोर ने बढ़ाई परेशानी
बेडसोर या प्रेशर सोर लंबे समय तक बिस्तर पर रहने वाले मरीजों में होने वाली गंभीर समस्या है। शरीर के किसी हिस्से पर लगातार दबाव पड़ने से त्वचा और अंदर के ऊतकों को नुकसान पहुंच सकता है।
दिव्यांग या लंबे समय तक चलने-फिरने में असमर्थ मरीजों में इस समस्या का खतरा अधिक रहता है। ऐसे मरीजों को समय-समय पर स्थिति बदलने, साफ-सफाई, उचित पोषण और चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत होती है।
विनोद की स्थिति में सड़क दुर्घटना के बाद पैर की समस्या और लंबे समय तक असहाय रहने की वजह से बेडसोर की समस्या बढ़ने की बात सामने आई है।
तीन-चार महीने से पेंशन नहीं मिलने का आरोप
विनोद की परेशानी केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। उसके परिवार की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि उसे पिछले तीन-चार महीनों से सामाजिक सुरक्षा पेंशन नहीं मिली है।
अगर कोई दिव्यांग व्यक्ति नियमित सामाजिक सुरक्षा पेंशन पर निर्भर है और कई महीनों तक उसे आर्थिक सहायता नहीं मिलती, तो उसके सामने इलाज, दवा, भोजन और दैनिक जरूरतों को पूरा करने में कठिनाई पैदा हो सकती है।
विनोद की आर्थिक स्थिति खराब होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाली सहायता उसके परिवार के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
हालांकि पेंशन क्यों रुकी है, इसका कारण क्या है और भुगतान में तकनीकी या प्रशासनिक समस्या है, इसकी स्पष्ट जानकारी संबंधित विभाग की जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।
ग्रामीण परिवहन व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना ने मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना और ग्रामीण इलाकों में मरीजों के आवागमन की व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती होती है। यदि मरीज चलने-फिरने में सक्षम नहीं है, तो सामान्य वाहन से भी उसे ले जाना मुश्किल हो सकता है।
ऐसे मामलों में एंबुलेंस, मरीजों के लिए उपयुक्त वाहन और स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य परिवहन व्यवस्था की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
विनोद को बाइक पर चारपाई बांधकर अस्पताल लाने की घटना यह सवाल खड़ा करती है कि गंभीर रूप से असहाय मरीजों के लिए उपलब्ध परिवहन सुविधा तक उसकी पहुंच क्यों नहीं हो सकी।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर लोगों की नाराजगी
एसकेएमसीएच परिसर में यह दृश्य देखने के बाद लोगों में नाराजगी दिखाई दी। अस्पताल पहुंचे लोगों ने इसे मानवीय संवेदनशीलता और स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़कर देखा।
लोगों का सवाल था कि एक ऐसा व्यक्ति जो खुद चलकर अस्पताल नहीं जा सकता, उसे इलाज के लिए किस व्यवस्था के तहत अस्पताल तक पहुंचाया जाना चाहिए।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार केवल अस्पताल और डॉक्टर उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। मरीज को घर से अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाना भी स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अस्पताल तक पहुंचना भी इलाज की प्रक्रिया का हिस्सा
गंभीर मरीजों के लिए अस्पताल तक पहुंचने का तरीका उनकी चिकित्सा स्थिति को प्रभावित कर सकता है। घायल पैर, बेडसोर और दिव्यांगता से जूझ रहे व्यक्ति को असुविधाजनक तरीके से लंबे समय तक ले जाना उसके लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा कर सकता है।
विशेष रूप से ऐसे मरीजों के लिए स्ट्रेचर, एंबुलेंस या उपयुक्त वाहन की आवश्यकता होती है।
विनोद के मामले में बाइक पर चारपाई का इस्तेमाल एक आपातकालीन और मजबूरी वाली व्यवस्था के रूप में सामने आया है। यह घटना इस बात पर ध्यान आकर्षित करती है कि ग्रामीण परिवारों को ऐसी परिस्थितियों में तत्काल सहायता किस प्रकार उपलब्ध कराई जाती है।
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की पहुंच जरूरी
दिव्यांग लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं आर्थिक सहायता का महत्वपूर्ण माध्यम हो सकती हैं। पेंशन से मिलने वाली राशि भले ही सीमित हो, लेकिन गरीब परिवारों के लिए दवा, भोजन और रोजमर्रा के खर्च में इसका योगदान महत्वपूर्ण होता है।
यदि किसी पात्र व्यक्ति को लगातार कई महीनों तक भुगतान नहीं मिलता, तो उसके कारण की जांच जरूरी है।
विनोद के मामले में भी संबंधित अधिकारियों द्वारा यह पता लगाया जाना चाहिए कि पेंशन भुगतान क्यों रुका है, लाभार्थी का रिकॉर्ड सही है या नहीं और किसी दस्तावेज या सत्यापन के कारण भुगतान प्रभावित हुआ है या नहीं।
दिव्यांग मरीजों के लिए अलग व्यवस्था की जरूरत
दिव्यांग और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए सामान्य स्वास्थ्य सुविधाओं से अलग कुछ विशेष व्यवस्थाओं की जरूरत होती है।
ऐसे मरीजों को अस्पताल पहुंचने, पंजीकरण कराने, जांच कराने और वार्ड तक ले जाने में सहायता की आवश्यकता हो सकती है।
ग्रामीण स्तर पर दिव्यांग मरीजों की पहचान और जरूरत के अनुसार उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों से जोड़ने की व्यवस्था मजबूत की जाए तो कई परिवारों को कठिन परिस्थितियों से बचाया जा सकता है।
परिवार पर बढ़ता आर्थिक बोझ
विनोद की बीमारी और दिव्यांगता का असर केवल उसकी शारीरिक स्थिति तक सीमित नहीं है। इलाज, दवा, यात्रा और देखभाल का खर्च परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी असर डाल सकता है।
अगर परिवार का कमाने वाला सदस्य खुद काम करने में असमर्थ हो जाए तो घरेलू आय कम हो सकती है। इसके साथ इलाज का खर्च बढ़ने पर आर्थिक संकट और गंभीर हो सकता है।
ऐसे समय में सामाजिक सुरक्षा पेंशन और सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं परिवार के लिए महत्वपूर्ण सहारा बन सकती हैं।
प्रशासन के सामने कई सवाल
इस घटना के बाद प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े होते हैं। पहला सवाल मरीज को समय पर उपयुक्त परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं होने का है। दूसरा सवाल सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भुगतान में कथित देरी का है।
इसके अलावा यह भी जरूरी है कि दिव्यांग और गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए ग्रामीण स्तर पर उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा की जाए।
यदि किसी मरीज को अस्पताल पहुंचने के लिए बाइक पर चारपाई बांधने की मजबूरी हो रही है, तो स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को इस तरह की परिस्थितियों के कारणों को समझना होगा।
केवल योजनाओं की घोषणा नहीं, जमीनी क्रियान्वयन जरूरी
सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा जब वह जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर पहुंचे। परिवहन, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा तीनों व्यवस्थाओं का आपस में जुड़ना जरूरी है।
एक मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए परिवहन की आवश्यकता है। अस्पताल पहुंचने के बाद इलाज की जरूरत है। इलाज के दौरान परिवार को आर्थिक सहायता की आवश्यकता हो सकती है।
यदि इनमें से किसी एक स्तर पर व्यवस्था कमजोर होती है, तो गरीब और दिव्यांग परिवार की परेशानी कई गुना बढ़ सकती है।
घटना से सीख लेने की जरूरत
विनोद साह का मामला एक व्यक्ति की परेशानी से आगे बढ़कर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की कई चुनौतियों की ओर संकेत करता है।
ऐसी घटनाओं को केवल वायरल तस्वीर या खबर के रूप में देखने के बजाय इससे जुड़े प्रशासनिक पहलुओं की भी जांच जरूरी है।
क्या गांव में मरीजों के लिए आपातकालीन परिवहन उपलब्ध था? क्या परिवार ने एंबुलेंस के लिए संपर्क किया था? यदि किया था तो सहायता क्यों नहीं मिली? सामाजिक सुरक्षा पेंशन का भुगतान क्यों रुका? क्या स्थानीय स्तर पर कोई वैकल्पिक सहायता उपलब्ध थी?
इन सवालों के जवाब मिलने से व्यवस्था में सुधार की दिशा तय की जा सकती है।
मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच में बाइक के ऊपर चारपाई बांधकर एक दिव्यांग मरीज को अस्पताल पहुंचाने की घटना ने स्वास्थ्य, ग्रामीण परिवहन और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
हथौड़ी थाना क्षेत्र के शाहपुर गांव के विनोद साह सड़क दुर्घटना के बाद पैर टूटने से चलने-फिरने में असमर्थ बताए जा रहे हैं। लंबे समय तक बिस्तर पर रहने के कारण वह बेडसोर की समस्या से भी जूझ रहे हैं। परिवार के अनुसार, पिछले तीन-चार महीनों से उन्हें सामाजिक सुरक्षा पेंशन भी नहीं मिली है, जिससे आर्थिक परेशानी बढ़ गई है।
बाइक पर चारपाई बांधकर अस्पताल पहुंचने का दृश्य यह बताता है कि योजनाओं और सुविधाओं की घोषणा के साथ उनका जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही जरूरी है।
दिव्यांग और गंभीर मरीजों के लिए सुरक्षित परिवहन, समय पर इलाज और सामाजिक सुरक्षा सहायता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। विनोद के मामले में भी पेंशन भुगतान में देरी और अस्पताल पहुंचने के साधन की उपलब्धता की जांच कर आवश्यक सहायता पहुंचाना जरूरी है।
यह घटना केवल एक परिवार की मजबूरी नहीं, बल्कि यह सोचने का अवसर भी है कि ग्रामीण क्षेत्र में सबसे कमजोर व्यक्ति तक सरकारी स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था वास्तव में कितनी आसानी से पहुंच रही है।