विक्रमशिला सेतु बंद करने की तिथि बढ़ाने का अनुरोध गंगा में बढ़ते जलस्तर और बाढ़ के हालात को देख जिला प्रशासन ने भेजा प्रस्ताव, 15 दिन टल सकती है तारीख
भागलपुर: भागलपुर और सीमांचल को जोड़ने वाली लाइफलाइन कहे जाने वाले विक्रमशिला सेतु की मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्यों को लेकर एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। गंगा नदी में लगातार बढ़ रहे जलस्तर और भीषण बाढ़ के हालातों को मध्यनजर रखते हुए जिला प्रशासन ने राज्य मुख्यालय को एक विशेष अनुरोध पत्र भेजा है। इसके तहत सेतु पर आवागमन पूरी तरह बंद कर निर्माण कार्य शुरू करने की निर्धारित तिथि को कम से कम 15 दिन आगे बढ़ाने का आग्रह किया गया है। प्रशासन के इस कदम से जहां एक ओर आम जनता और प्रशासनिक अमले को बाढ़ के बीच वैकल्पिक व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा, वहीं यात्रियों की आवाजाही को लेकर बनी असमंजस की स्थिति भी फिलहाल कुछ हफ्तों के लिए टल सकती है।
क्यों पड़ी तिथि बढ़ाने की आवश्यकता? (गंगा का बढ़ता जलस्तर)
विक्रमशिला सेतु के जीर्णोद्धार और स्थायी मरम्मत के लिए पहले से ही समय-सारणी तय की जा चुकी थी, लेकिन प्राकृतिक आपदा ने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं:
बाढ़ और जलस्तर का दबाव: इन दिनों गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के आसपास पहुंच चुका है या लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में नदी के भीतर या पुल के पिलरों के आसपास किसी भी प्रकार का नया निर्माण या भारी मशीनरी का संचालन करना बेहद जोखिम भरा साबित हो सकता है।
वैकल्पिक व्यवस्थाओं में कठिनाई: सेतु बंद होने की स्थिति में जिला प्रशासन को नाव परिचालन और अन्य वैकल्पिक परिवहन व्यवस्थाएं करनी होती हैं। बाढ़ के तेज बहाव और उफनती हुई गंगा में जलमार्ग संचालन सुरक्षा मानकों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
प्रशासनिक चिंताएं: इन्हीं व्यावहारिक और सुरक्षात्मक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने मुख्यालय से समन्वय स्थापित कर निर्माण कार्य की शुरुआत और सेतु बंद करने की तिथि को 15 दिन आगे बढ़ाने का दबाव बनाया है।
पथ निर्माण विभाग के सचिव को भेजा गया अनुरोध पत्र
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा उच्च स्तर पर पत्राचार किया गया है:
आधिकारिक प्रस्ताव: जिला प्रशासन की ओर से पथ निर्माण विभाग के सचिव को औपचारिक अनुरोध पत्र भेजकर वर्तमान परिस्थितियों से अवगत कराया गया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि इस9 विषम परिस्थिति में तुरंत कड़े प्रतिबंध लागू किए गए, तो आम जनता की मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं।
मुख्यालय के निर्देश का इंतजार: हालांकि जिला प्रशासन ने प्रस्ताव भेज दिया है, फिर भी अंतिम निर्णय राज्य मुख्यालय और पुल निर्माण निगम के दिशा-निर्देशों के बाद ही तय होगा। तब तक प्रशासन अपनी तैयारियों को बैकअप प्लान के साथ मजबूत करने में जुटा है।
स्थाई मरम्मत और स्टील ब्रिज निर्माण की चल रही है तैयारी
विक्रमशिला सेतु को लेकर सरकार और निर्माण एजेंसियों की योजनाएं पहले से ही गतिमान हैं:
बेली ब्रिज की जगह स्टील ब्रिज: सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्सों की स्थायी मरम्मत के लिए अब बेली ब्रिज के स्थान पर अधिक मजबूत स्टील ब्रिज तैयार करने और नए स्लैब फिक्स करने की योजना है.
सामग्री की आपूर्ति: हरियाणा के पंचकुला से नए स्लैब और निर्माण से जुड़ी अन्य सामग्रियां भागलपुर पहुंचनी शुरू हो चुकी हैं, ताकि मौसम साफ होते ही युद्धस्तर पर काम शुरू किया जा सके।
30 नवंबर तक लक्ष्य: अधिकारियों के अनुसार, सभी बाधाओं को पार करते हुए आगामी 30 नवंबर तक पुल के पुनर्निर्माण कार्यों को पूरी तरह से मुकम्मल कर इसे सुचारू रूप से आवागमन के लिए खोलने का लक्ष्य रखा गया है।
आम जनता और व्यापारियों पर असर
विक्रमशिला सेतु के बंद होने की तारीख आगे बढ़ने की सुगबुगाहट से स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने राहत की सांस ली है:
त्योहारी सीजन और आवागमन: भागलपुर से नवगछिया, कटिहार, पूर्णिया और अन्य सीमांचल जिलों के बीच रोजाना हजारों लोग सफर करते हैं। यदि तिथि बढ़ती है, तो लोगों को अपनी व्यावसायिक और व्यक्तिगत यात्राओं की योजना बनाने के लिए थोड़ा और वक्त मिल जाएगा।
प्रशासनिक चौकसियां: जिला प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि जलस्तर कम होने या नियंत्रण में आने के बाद बिना किसी प्रशासनिक चूक के कार्य को अंजाम दिया जा सके।
गंगा में बढ़ते जलस्तर के कारण विक्रमशिला सेतु बंद करने की तिथि को 15 दिन आगे बढ़ाने का जिला प्रशासन का यह अनुरोध पूरी तरह से जनहित और सुरक्षा को समर्पित एक व्यावहारिक कदम है। बाढ़ की विभीषिका और तकनीकी तैयारियों के बीच यह फैसला यह सुनिश्चित करता है कि जल्दबाजी में कोई ऐसा कदम न उठाया जाए जिससे आम नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़े। अब निगाहें राज्य मुख्यालय के आधिकारिक निर्णय पर टिकी हैं कि इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर कब तक लगती है।