बाबा गरीबनाथ का अलौकिक महाशृंगार: 21 किलो फूलों से सजा दरबार, विशेष पूजा के बाद भक्तों को लगाया गया मसालेदार खिचड़ी का भोग

पवित्र सावन मास के इस पावन और उत्सवपूर्ण माहौल में बिहार के प्रसिद्ध बाबा गरीबनाथ मंदिर में आस्था का एक बेहद ही मनमोहक और भव्य नजारा देखने को मिला। सावन के इस विशेष अवसर पर बाबा गरीबनाथ का 21 किलोग्राम ताजे और सुगंधित फूलों से भव्य महाशृंगार किया गया। मंदिर के गर्भगृह में सजे इस अलौकिक स्वरूप के दर्शन करने के लिए सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा।

मंदिर के मुख्य पुजारी आशुतोष पाठक द्वारा विधि-विधान से दूध, दही, गंगाजल और अन्य पवित्र द्रव्यों से बाबा का रुद्राभिषेक और पूजन किया गया। इसके उपरांत, संध्या बेला में महाआरती के बाद बाबा को पारंपरिक और विशेष मसालेदार खिचड़ी का भोग अर्पित किया गया, जिसे बाद में प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया गया।

भव्य महाशृंगार: फूलों से सजा भोलेनाथ का दरबार

सावन मास के इन विशेष दिनों में बाबा गरीबनाथ के दर्शन का महत्व और भी बढ़ जाता है। इसी आस्था को और प्रगाढ़ करते हुए इस बार मंदिर को बेहद खूबसूरती से सजाया गया है।

21 किलो फूलों का उपयोग: बाबा के शृंगार के लिए विशेष रूप से कोलकाता और अन्य नजदीकी बाजारों से विभिन्न प्रकार के ताजे फूल मंगाए गए थे। गुलाब, गेंदा, चमेली, और बैजयंती के फूलों से गर्भगृह और बाबा के शिवलिंग का ऐसा मनमोहक शृंगार किया गया कि देखने वाले बस देखते ही रह गए।

दिव्य और अलौकिक रूप: फूलों की भीनी-भीनी खुशबू और मंदिर परिसर में गूंजते मंत्रोच्चार ने पूरे वातावरण को पूरी तरह से आध्यात्मिक और शिवमय बना दिया। जब सुबह के समय मंदिर के पट खुले, तो फूलों से सजे बाबा के इस रूप के दर्शन पाकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।

पुजारी आशुतोष पाठक द्वारा विधि-विधान से पूजा

धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला में मंदिर के प्रधान पुजारी आशुतोष पाठक ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना संपन्न कराई।

पंचामृत स्नान: पुजारी ने भगवान शिव को सबसे पहले दूध, दही, घी, शहद और शर्करा (पंचामृत) से स्नान कराया। इसके बाद शुद्ध गंगाजल और केसर मिश्रित जल से अभिषेक किया गया।

विशिष्ट पूजन सामग्री: अभिषेक के दौरान बेलपत्र, धतूरा, भांग, मदार के फूल, चंदन, और इत्र अर्पित किए गए। पुजारी आशुतोष पाठक ने बताया कि सावन मास में बाबा गरीबनाथ का यह विशेष शृंगार और पूजन भक्तों के कष्टों को दूर करने और उनकी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला होता है।

कल्याण की कामना: पूजा के अंत में देश और समाज की सुख-शांति, समृद्धि और अच्छी बारिश के लिए विशेष प्रार्थना की गई।

महाभोग: मसालेदार खिचड़ी की परंपरा और उसका महत्व

बाबा गरीबनाथ के दरबार में पूजा-अर्चना और महाशृंगार के बाद एक विशेष परंपरा का निर्वहन किया गया, जो यहाँ के आयोजनों का एक मुख्य आकर्षण होता है। पूजा के समापन पर बाबा को मसालेदार खिचड़ी का भव्य भोग लगाया गया।

भोग की विशेषता: यह खिचड़ी चावल, दाल, ताजी सब्जियों और विभिन्न प्रकार के पारंपरिक खड़े मसालों के साथ विशेष रूप से तैयार की जाती है। आयुर्वेद और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में भगवान को गर्म और सात्विक भोग लगाने की परंपरा है।

प्रसाद वितरण: भगवान को भोग लगाने के बाद इस स्वादिष्ट और ऊर्जावान मसालेदार खिचड़ी के प्रसाद को हजारों श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया गया। लाइन में लगकर भक्तों ने इस महाप्रसाद को ग्रहण किया और इसे बाबा का आशीर्वाद माना। श्रद्धालुओं का कहना था कि इस प्रसाद को पाने से मन को असीम शांति और संतुष्टि मिलती है।

मंदिर परिसर में गूंजा 'हर-हर महादेव' का जयकारा

शृंगार दर्शन और भोग के समय पूरा मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के नारों से गूंज उठा। दूर-दराज से आए शिव भक्तों ने कतारों में खड़े होकर बाबा गरीबनाथ के इस अद्भुत रूप का दर्शन किया।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़: सावन की इस विशेष तिथि पर मुजफ्फरपुर के अलावा आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में शिव भक्त पहुंचे थे। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सभी में बाबा के दर्शन की एक अलग ही होड़ देखने को मिली।

सुरक्षा और प्रबंधन: श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन समिति और स्थानीय पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आए। बैरिकेडिंग के माध्यम से भक्तों को व्यवस्थित तरीके से गर्भगृह तक भेजा जा रहा था ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।

बाबा गरीबनाथ धाम में हुआ यह 21 किलो फूलों का महाशृंगार और मसालेदार खिचड़ी का महाभोग इस बात का प्रतीक है कि यहाँ की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं कितनी जीवंत हैं। कठिन यात्राओं और मौसम की चुनौतियों के बीच जब भक्त बाबा के इस अलौकिक रूप का दर्शन करते हैं, तो उनकी सारी थकान और कष्ट दूर हो जाते हैं। यह आयोजन एक बार फिर यह साबित कर गया कि मुजफ्फरपुर की धरती पर सावन का महीना आस्था, समर्पण और उल्लास का सबसे बड़ा पर्व है।