टीएनबी लॉ कॉलेज में भागलपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (बुटा) के अध्यक्ष डॉ. मिहिर मोहन मिश्र सुमन का भव्य अभिनंदन; शिक्षक हितों की रक्षा और संगठन को धारदार बनाने पर हुई विस्तृत चर्चा

भागलपुर, विशेष संवाददाता: उच्च शिक्षा और शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षकों के अधिकारों, उनके कल्याण और बौद्धिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए संघर्षरत भागलपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (बुटा - BHUUTA) के नवनिर्वाचित या वर्तमान अध्यक्ष डॉ. मिहिर मोहन मिश्र सुमन को टीएनबी लॉ कॉलेज (T.N.B. Law College) परिसर में एक गरिमामयी समारोह के दौरान सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों से पहुंचे वरिष्ठ और युवा शिक्षकों ने भारी उत्साह के साथ उनका स्वागत किया। सम्मान समारोह के उपरांत एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें संघ के सांगठनिक ढांचे को और अधिक मजबूत बनाने तथा शिक्षकों की लंबे समय से लंबित मांगों और समस्याओं के समाधान पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

टीएनबी लॉ कॉलेज परिसर में उमड़े शिक्षक, जोरदार स्वागत

कार्यक्रम की शुरुआत टीएनबी लॉ कॉलेज के सभागार में शिक्षकों की उपस्थिति और डॉ. मिहिर मोहन मिश्र सुमन के अभिनंदन के साथ हुई:

फूल-मालाओं और अंगवस्त्र से स्वागत: कॉलेज परिसर में पहुंचते ही शिक्षकों और प्रशासनिक कर्मियों ने डॉ. मिश्र का जोरदार स्वागत किया। उन्हें पारंपरिक अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ और प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

शिक्षकों में दिखा भारी जोश: इस आयोजन में भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के अंतर्गत आने वाले विभिन्न संकायों के प्रोफेसर और शिक्षक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. मिहिर मोहन मिश्र सुमन के नेतृत्व में शिक्षक संघ को एक नई ऊर्जा और दिशा मिली है, जो विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित करते हुए शिक्षकों के हक की लड़ाई को मजबूती से लड़ रहा है।

संगठन को मजबूत बनाने और सांगठनिक एकता पर मंथन

सम्मान समारोह के बाद आयोजित विचार-विमर्श सत्र में विश्वविद्यालय के शिक्षकों की एकता और संगठन की मजबूती पर विशेष जोर दिया गया:

बुनियादी मुद्दों पर चर्चा: बैठक के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के समक्ष कई प्रकार की प्रशासनिक और वित्तीय चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे में बिखराव को छोड़कर पूरी एकजुटता के साथ संघ को मजबूत करना समय की सबसे बड़ी मांग है।

सक्रिय संवाद की जरूरत: डॉ. मिश्र ने बल दिया कि शिक्षक संघ केवल एक मंच नहीं है, बल्कि यह académicos के अधिकारों की रक्षा का एक मजबूत कवच है। उन्होंने सभी शिक्षकों से आह्वान किया कि वे अपनी इकाइयों को जमीनी स्तर पर सक्रिय करें ताकि किसी भी समस्या का त्वरित और संवाद के जरिए समाधान निकाला जा सके।

डॉ. मिहिर मोहन मिश्र सुमन का संकल्प: "शिक्षक हितों से कोई समझौता नहीं"

सम्मान के बाद सभा को संबोधित करते हुए भागलपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. मिहिर मोहन मिश्र सुमन ने शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया और अपनी प्रतिबद्धता दोहराई:

शिक्षकों के मान-सम्मान और हक की लड़ाई: डॉ. मिश्र ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन या सरकार के समक्ष शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए संघ पूरी दृढ़ता के साथ खड़ा है। शिक्षकों के बकाए, पदोन्नति (Promotion), पेंशन और अन्य सेवा शर्तों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

शैक्षणिक माहौल में सुधार की पहल: उन्होंने कहा कि संघ केवल शिक्षकों की समस्याओं के समाधान तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भागलपुर विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने और विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार करने में भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाएगा।

विभिन्न कॉलेजों के प्राध्यापकों ने रखे अपने विचार

इस अवसर पर टीएनबी लॉ कॉलेज सहित अन्य अंगीभूत महाविद्यालयों के कई वरिष्ठ शिक्षकों और पदाधिकारियों ने भी अपने विचार रखे:

वक्ताओं के मुख्य बिंदु: वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में जब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों और स्थानीय प्रशासनिक नीतियों के बीच कई बार असमंजस की स्थिति बनती है, तब एक मजबूत शिक्षक संघ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। डॉ. मिहिर मोहन मिश्र सुमन के नेतृत्व में इस दिशा में सार्थक कदम उठाए जा रहे हैं।

भवी योजना की रूपरेखा: बैठक के अंत में यह निर्णय लिया गया कि आगामी दिनों में विश्वविद्यालय के सभी कॉलेजों में जाकर शिक्षकों की व्यक्तिगत और सामूहिक समस्याओं की सूची तैयार की जाएगी और एक चरणबद्ध तरीके से विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर उनका निदान कराया जाएगा।

टीएनबी लॉ कॉलेज में आयोजित यह अभिनंदन समारोह और विचार-विमर्श बैठक भागलपुर विश्वविद्यालय के शैक्षणिक जगत में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है। डॉ. मिहिर मोहन मिश्र सुमन के नेतृत्व में शिक्षक संघ ने जिस प्रकार एकजुटता और संकल्प का परिचय दिया है, उससे यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में शिक्षकों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए आंदोलन और संवाद का सिलसिला और अधिक तेज होगा। इस आयोजन ने संपूर्ण शिक्षक समुदाय में एक नया विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया है।