बांकीपुर उपचुनाव के एग्जिट पोल: प्रशांत किशोर की पार्टी की भारी बढ़त का दावा, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के गढ़ में सत्ताधारी दल को तगड़ा झटका मिलने के आसार
बिहार की राजनीति के केंद्रबिंदु और राजधानी की सबसे वीआईपी सीट मानी जाने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट (Bankipur Assembly Constituency) पर हुए उप-चुनाव के मतदान संपन्न होने के बाद सामने आए विभिन्न एग्जिट पोल्स (Exit Polls) ने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। इस हाई-प्रोफाइल उपचुनाव के बाद आए कम से कम तीन प्रमुख एग्जिट पोल के आंकड़ों ने सभी समीकरणों को उलटते हुए एक नए राजनीतिक समीकरण की ओर इशारा किया है। इन सर्वेक्षणों में रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर की नवगठित ‘जन सुराज पार्टी’ (Jan Suraaj Party) को भारी बढ़त मिलने का दावा किया जा रहा है।
सबसे खास बात यह है कि ये सभी एग्जिट पोल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर नेता और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस पारंपरिक और अजेय गढ़ में भाजपा की हार का अनुमान लगा रहे हैं। लगभग तीन दशकों से भगवा खेमे के कब्जे वाली इस सीट पर आए इन रुझानों ने सत्ताधारी दल की नींद उड़ा दी है। आइए बांकीपुर उपचुनाव के इन सनसनीखेज एग्जिट पोल, विभिन्न एजेंसियों के आंकड़ों और इसके दूरगामी राजनीतिक प्रभावों का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
पृष्ठभूमि: क्या कहते हैं प्रमुख एग्जिट पोल के आंकड़े?
बांकीपुर उपचुनाव में 34.30 प्रतिशत मतदान संपन्न होने के बाद विभिन्न शोध एवं सर्वेक्षण एजेंसियों (जैसे जनमत पोल्स, डीवी रिसर्च और पोल पंडित) द्वारा अपने एग्जिट पोल के नतीजे जारी किए गए हैं। इन सभी के आंकड़ों में एक चौंकाने वाला ट्रेंड देखने को मिला है:
जनमत पोल्स का अनुमान: इस एजेंसी के सर्वे के अनुसार, जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर को बांकीपुर में बंपर बढ़त मिलती दिख रही है। एजेंसी का दावा है कि जन सुराज को यहाँ 49 से 52 प्रतिशत तक वोट मिल सकते हैं। वहीं, भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा के दूसरे स्थान पर रहने और उन्हें 34 से 36 फीसदी वोट मिलने की संभावना जताई गई है, जबकि आरजेडी की रेखा गुप्ता काफी पीछे छूटती नजर आ रही हैं।
डीवी रिसर्च का सर्वे: इस एग्जिट पोल के मुताबिक भी प्रशांत किशोर इस सीट पर बाजी मारते नजर आ रहे हैं। डीवी रिसर्च के अनुसार, पीके की पार्टी को करीब 43 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है, जबकि भाजपा उम्मीदवार को 39 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं। इस सर्वे में भी आरजेडी तीसरे पायदान पर फिसलती दिख रही है।
पोल पंडित का दावा: इस सर्वेक्षण एजेंसी ने तो प्रशांत किशोर की रिकॉर्ड और निर्णायक जीत का अनुमान जताया है। पोल पंडित के अनुसार, जन सुराज पार्टी को बांकीपुर में 50 प्रतिशत से अधिक यानी आधे से ज्यादा वोट मिल सकते हैं, जबकि भाजपा का वोट शेयर गिरकर 38 से 42 प्रतिशत के बीच सिमट सकता है।
नितिन नवीन के गढ़ में सेंध: क्यों है यह भाजपा के लिए बड़ा झटका?
बांकीपुर विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास भाजपा के लिए बेहद गौरवशाली रहा है।
पारंपरिक मजबूत किला: यह सीट पिछले लगभग तीन दशकों से लगातार भारतीय जनता पार्टी के पास रही है। यहां से नितिन नवीन लगातार पांच बार विधायक चुने गए और उनके पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद यह उपचुनाव कराना पड़ा। नितिन नवीन के पिता नबीन किशोर प्रसाद सिन्हा भी यहां से विधायक रह चुके हैं।
गढ़ बचाने की चुनौती: ऐसे में, यदि एग्जिट पोल के ये दावे सच साबित होते हैं, तो यह भाजपा और विशेषकर उसके शीर्ष नेतृत्व के लिए एक बहुत बड़ा मनोवैज्ञानिक और राजनीतिक झटका होगा। एक वीआईपी और शहरी सीट पर जहां सवर्ण और वैश्य मतदाता निर्णायक माने जाते हैं, वहां इस तरह का उलटफेर सीधे तौर पर पारंपरिक मतदाताओं के मोहभंग को दर्शाता है।
आरजेडी की स्थिति और त्रिकोणीय मुकाबले का हाल
इन एग्जिट पोल्स में एक और बात जो सबसे ज्यादा चौंकानी वाली सामने आई है, वह यह है कि पारंपरिक तौर पर मजबूत मानी जाने वाली राष्ट्रीय जनता दल (RJD) इस मुकाबले में काफी पिछड़ती हुई नजर आ रही है।
मुख्य मुकाबला बनाम त्रिकोण: जानकारों का मानना था कि मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच होगा, लेकिन जन सुराज की आक्रामक जमीननी पकड़ ने इस लड़ाई को सीधा 'भाजपा बनाम जन सुराज' में तब्दील कर दिया है। आरजेडी उम्मीदवार रेखा गुप्ता को अधिकांश सर्वे में दहाई के आंकड़े (9 से 15 फीसदी) तक ही सीमित दिखाया गया है।
बांकीपुर उप-चुनाव के इन एग्जिट पोल्स ने भले ही प्रशांत किशोर और उनकी जन सुराज पार्टी के खेमे में भारी उत्साह भर दिया हो, लेकिन राजनीतिक इतिहास गवाह है कि एग्जिट पोल हमेशा अंतिम सत्य नहीं होते। कम मतदान प्रतिशत (34.30%) के बीच इन सर्वेक्षणों के अनुमान कितने सटीक बैठते हैं, इसका वास्तविक फैसला तो आगामी 3 अगस्त को होने वाली वोटों की गिनती और आधिकारिक परिणामों के आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। तब तक इन आंकड़ों ने बिहार की सियासत का पारा जरूर सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।