28 अगस्त को मनेगा भाई-बहन के प्रेम का पर्व, भद्रा से मुक्त रहेगा दिन; मिलेंगे कई शुभ मुहूर्त

पटना। भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन इस वर्ष 28 अगस्त को मनाया जाएगा। त्योहार को लेकर घरों और बाजारों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने और उनके सुख-समृद्धि की कामना करने के लिए राखी, मिठाई और पूजा सामग्री की खरीदारी कर रही हैं। वहीं भाई भी बहनों को उपहार देने की तैयारी में जुटे हैं।

इस वर्ष रक्षाबंधन को लेकर खास बात यह बताई जा रही है कि 28 अगस्त को भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा, जिसके कारण राखी बांधने के लिए कई शुभ समय उपलब्ध होंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल में शुभ कार्यों को करने से बचा जाता है। यही वजह है कि रक्षाबंधन पर भद्रा की स्थिति को लेकर हर वर्ष लोगों में विशेष उत्सुकता रहती है।

इस बार 27 अगस्त को भद्रा का प्रभाव रहने की बात कही गई है, जबकि 28 अगस्त को शुभ समय में भाई की कलाई पर राखी बांधी जा सकेगी। हालांकि शुभ मुहूर्त के समय को लेकर स्थानीय पंचांग और विद्वान पंडितों की गणना में अंतर हो सकता है। इसलिए परिवार अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग के अनुसार समय निर्धारित कर सकते हैं।

28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाने की तैयारी

रक्षाबंधन हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। सावन पूर्णिमा के अवसर पर मनाए जाने वाले इस पर्व का भाई-बहन के रिश्ते में विशेष महत्व है।

इस दिन बहनें भाई के माथे पर तिलक लगाती हैं, आरती करती हैं और उनकी कलाई पर राखी बांधती हैं। इसके बाद भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेते हुए उन्हें उपहार देते हैं।

रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और भावनात्मक संबंधों को मजबूत करने का अवसर भी माना जाता है।

भद्रा को लेकर क्यों रहती है विशेष सावधानी?

रक्षाबंधन के अवसर पर भद्रा का उल्लेख विशेष रूप से किया जाता है। धार्मिक परंपराओं में भद्रा को ऐसे समय के रूप में देखा जाता है जिसमें कई शुभ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है।

इसी कारण रक्षाबंधन पर राखी बांधने से पहले लोग भद्रा काल की जानकारी लेते हैं। इस वर्ष 27 अगस्त को भद्रा का प्रभाव रहने की बात कही जा रही है, जबकि 28 अगस्त को रक्षाबंधन के लिए शुभ समय मिलने की संभावना है।

पंडितों के अनुसार किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग और तिथि की गणना को ध्यान में रखना चाहिए।

कई शुभ मुहूर्त मिलने की उम्मीद

28 अगस्त को भद्रा के प्रभाव से मुक्त समय रहने के कारण रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए कई शुभ अवसर उपलब्ध होंगे। इससे उन परिवारों को सुविधा होगी जिनके सदस्य अलग-अलग समय पर एक-दूसरे से मिलते हैं।

बहनें अपनी सुविधा के अनुसार शुभ समय में भाई को राखी बांध सकती हैं। नौकरी, व्यवसाय या यात्रा के कारण दिन के किसी विशेष समय पर ही मिलने वाले भाई-बहनों के लिए भी यह सुविधा उपयोगी हो सकती है।

हालांकि सटीक शुभ मुहूर्त के लिए परिवारों को अपने स्थानीय पंचांग या क्षेत्र के पंडित से समय की पुष्टि करनी चाहिए।

बाजारों में बढ़ी रौनक

रक्षाबंधन नजदीक आते ही पटना समेत बिहार के कई शहरों और कस्बों के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। दुकानों पर अलग-अलग डिजाइन और कीमतों वाली राखियां उपलब्ध हैं।

बच्चों के लिए कार्टून कैरेक्टर और रंग-बिरंगी राखियां आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। युवाओं के लिए डिजाइनर राखियों की मांग भी देखने को मिल रही है।

पारंपरिक रुद्राक्ष, चंदन, मोती और कलावा वाली राखियों के साथ-साथ आधुनिक डिजाइन की राखियां भी बाजार में उपलब्ध हैं।

मिठाई और उपहार की भी बढ़ी मांग

रक्षाबंधन पर राखी के साथ मिठाई की खरीदारी की भी परंपरा है। भाई को राखी बांधने के बाद बहनें मिठाई खिलाती हैं। इसके चलते मिठाई दुकानों पर भी त्योहार से पहले तैयारियां तेज हो गई हैं।

इसके अलावा भाई अपनी बहनों को कपड़े, आभूषण, घड़ी, कॉस्मेटिक, मोबाइल एक्सेसरीज और अन्य उपहार देने की तैयारी करते हैं।

ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन के कारण इस बार लोग घर बैठे राखी और उपहार भी मंगवा रहे हैं। दूर रहने वाले भाई-बहन एक-दूसरे के घर राखी और उपहार भेजकर त्योहार मनाने की तैयारी कर रहे हैं।

दूर रहने वाले भाई-बहनों में भी उत्साह

आज के समय में रोजगार और पढ़ाई के कारण कई भाई-बहन अलग-अलग शहरों में रहते हैं। ऐसे में हर किसी के लिए रक्षाबंधन पर एक साथ मिलना संभव नहीं होता।

ऐसे परिवारों में डाक और ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं के जरिए राखी भेजने का चलन बढ़ा है। बहनें पहले ही अपने भाइयों के लिए राखी भेज देती हैं ताकि त्योहार के दिन वे उसे अपनी कलाई पर बांध सकें।

वीडियो कॉल और ऑनलाइन माध्यमों ने भी दूर रहने वाले परिवारों के लिए त्योहार मनाना आसान कर दिया है। कई भाई-बहन वीडियो कॉल के जरिए राखी बांधने की रस्म में शामिल होते हैं।

धार्मिक दृष्टि से रक्षाबंधन का महत्व

रक्षाबंधन का धार्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से विशेष महत्व है। सावन पूर्णिमा के दिन मनाए जाने वाले इस त्योहार को भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक माना जाता है।

पौराणिक कथाओं में भी रक्षा सूत्र और भाई-बहन के संबंध से जुड़ी कई कहानियां मिलती हैं। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में रक्षाबंधन मनाने की परंपराओं में कुछ अंतर देखने को मिलता है।

कई स्थानों पर इस दिन पूजा-पाठ, दान और धार्मिक अनुष्ठान भी किए जाते हैं।

बहनें करती हैं भाई की लंबी उम्र की कामना

रक्षाबंधन के दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधते हुए उसके सुख, समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना करती हैं।

भाई भी बहन की रक्षा और हर परिस्थिति में उसका साथ देने का संकल्प लेता है। यही भावना इस पर्व को केवल धार्मिक आयोजन से आगे बढ़ाकर भावनात्मक त्योहार बनाती है।

समय के साथ रक्षाबंधन का स्वरूप भी बदला है, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते में इसके महत्व में कमी नहीं आई है।

पर्यावरण के प्रति भी बढ़ी जागरूकता

अब कई लोग पर्यावरण के अनुकूल राखियों को भी प्राथमिकता देने लगे हैं। बाजारों में कागज, कपड़े, लकड़ी और प्राकृतिक सामग्री से बनी राखियां उपलब्ध हैं।

लोग प्लास्टिक और ऐसे पदार्थों से बनी राखियों से बचने की कोशिश कर रहे हैं जिन्हें इस्तेमाल के बाद आसानी से नष्ट नहीं किया जा सकता।

स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाई गई हस्तनिर्मित राखियों की मांग भी त्योहार के दौरान बढ़ती है। इससे छोटे दुकानदारों और स्थानीय कारोबारियों को भी आर्थिक लाभ मिलता है।

स्कूलों और संस्थानों में भी आयोजन

रक्षाबंधन के अवसर पर कई स्कूलों और सामाजिक संस्थानों में भाईचारे और सामाजिक सद्भाव से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

बच्चे एक-दूसरे को राखी बांधते हैं और त्योहार के महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। कई संस्थानों में देश के सैनिकों और समाज की सुरक्षा में योगदान देने वाले लोगों के सम्मान में भी राखी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

इस तरह रक्षाबंधन व्यक्तिगत रिश्तों के साथ सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश भी देता है।

यात्रा को लेकर भी बढ़ेगी भीड़

रक्षाबंधन पर बड़ी संख्या में लोग अपने भाई-बहनों के घर जाते हैं। ऐसे में बस, ट्रेन और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों में भीड़ बढ़ सकती है।

दूसरे शहरों में रहने वाले भाई-बहन त्योहार मनाने के लिए अपने घर लौटते हैं। बिहार के प्रमुख शहरों और रेलवे स्टेशनों पर त्योहार के आसपास यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना रहती है।

यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी यात्रा की योजना पहले से बनाएं और संभव हो तो टिकट और परिवहन की व्यवस्था समय रहते सुनिश्चित करें।

त्योहार में सुरक्षा और संयम जरूरी

त्योहार के दौरान बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ बढ़ने के कारण लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। बच्चों को भीड़ में अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।

खरीदारी के दौरान यातायात नियमों का पालन करना और वाहन निर्धारित स्थान पर ही पार्क करना जरूरी है।

धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान भी स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए ताकि त्योहार शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से मनाया जा सके।

28 अगस्त को लेकर उत्साह

इस वर्ष रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाए जाने को लेकर लोगों में खास उत्साह है। 27 अगस्त को भद्रा का प्रभाव रहने के कारण कई परिवार पहले से ही शुभ समय की जानकारी ले रहे हैं।

28 अगस्त को भद्रा से मुक्त समय में राखी बांधने के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध होने की बात कही जा रही है। हालांकि सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग और विद्वान पंडित की सलाह लेना बेहतर रहेगा।

कुल मिलाकर, रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी को मजबूत करने वाला पर्व है। त्योहार के मौके पर जहां बाजारों में रौनक बढ़ रही है, वहीं परिवारों में भी तैयारियां तेज हो गई हैं। दूर रहने वाले भाई-बहन भी राखी और उपहार भेजकर इस रिश्ते की गर्माहट बनाए रखने की तैयारी कर रहे हैं।