पूर्व मेयर डॉ. वीणा यादव ने किया शुभारंभ, महिलाओं के सामूहिक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से झूमा शहर

भागलपुर: बिहार की सांस्कृतिक नगरी और सिल्क सिटी भागलपुर में सावन के पवित्र महीने की छटा इन दिनों चरम पर है। इसी क्रम में शहर की प्रतिष्ठित सामाजिक संस्था 'मां आनंदी संस्था' के तत्वावधान में एक अत्यंत आकर्षक और रंगारंग सावन महोत्सव का आयोजन किया गया। हरियाली, उल्लास और सांस्कृतिक परंपरा के प्रतीक इस पर्व पर आयोजित कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ भागलपुर की पूर्व महापौर डॉ. वीणा यादव तथा संस्था की अन्य प्रमुख सदस्याओं ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सावन के गीतों, पारंपरिक परिधानों और मनमोहक प्रस्तुतियों से सजा यह आयोजन महिलाओं के बीच आपसी सौहार्द और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का एक बेहतरीन माध्यम साबित हुआ।

पारंपरिक परिधानों और हरियाली के बीच सजी महफिल

कार्यक्रम स्थल को सावन की थीम यानी हरे और पीले रंगों, फूलों तथा प्राकृतिक सजावट के साथ बेहद खूबसूरती से सजाया गया था। इस महोत्सव में भाग ले रही सभी महिलाएं और युवतियां पारंपरिक सावन के लिबास—विशेषकर हरी और पीली साड़ियों तथा पारंपरिक आभूषणों—में सजी नजर आईं, जिससे पूरा माहौल पूरी तरह उत्सवमय हो गया।

मंच पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण महिलाओं और सदस्याओं द्वारा प्रस्तुत किए गए सामूहिक नृत्य और पारंपरिक कजरी व सावन गीत रहे। सुरीली धुनों पर थिरकती महिलाओं ने बारिश और हरियाली के इस मौसम की सुंदरता को मंच पर जीवंत कर दिया।

पूनम और अन्य सदस्याओं की सक्रिय भागीदारी: संस्था की सक्रिय सदस्या पूनम सहित अन्य पदाधिकारियों ने इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं और गेम्स का भी आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित महिलाओं ने बड़े उत्साह के साथ हिस्सा लिया।

पूर्व मेयर डॉ. वीणा यादव ने की संस्था के प्रयासों की सराहना

कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद अपने संबोधन में मुख्य अतिथि एवं पूर्व महापौर डॉ. वीणा यादव ने 'मां आनंदी संस्था' के इस अनूठे प्रयास की भूरी-भरी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भागलपुर की महिलाएं केवल परिवार संभालने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज के सांस्कृतिक ताने-बाने को मजबूत करने और अपनी प्राचीन परंपराओं को जीवंत रखने में भी बढ़-चढ़कर योगदान दे रही हैं।

डॉ. यादव ने कहा कि सावन का महीना महिलाओं के लिए उमंग, भाईचारे और प्रकृति के प्रति प्रेम का संदेश लेकर आता है। इस तरह के आयोजनों से न केवल मानसिक तनाव दूर होता है, बल्कि आपसी मेल-जोल और सामाजिक रिश्तों में प्रगाढ़ता भी आती है।

महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक धरोहर का अनूठा संगम

सावन महोत्सव के दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे को सावन की बधाई दी और पारंपरिक लोकगीतों पर झूला झूलने का आनंद लिया। संस्था की ओर से इस अवसर पर विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक खेलों जैसे सावन क्वीन प्रतियोगिता, मेहंदी और म्यूजिकल चेयर का भी आयोजन किया गया, जिसमें विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।

सामाजिक समरसता का संदेश: इस महोत्सव में शहर के विभिन्न हिस्सों से आईं महिलाओं ने भाग लिया, जिससे समाज के हर वर्ग के बीच एक मजबूत और सकारात्मक संदेश गया।

सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण: आयोजकों का मानना है कि भागलपुर की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए इस प्रकार के उत्सव जरूरी हैं, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी भी अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी रहे।

उल्लास के साथ संपन्न हुआ महोत्सव

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों और अतिथियों के लिए पारंपरिक व्यंजनों का प्रबंध किया गया था। सावन के इस पावन पर्व पर आयोजित 'मां आनंदी संस्था' का यह महोत्सव भागलपुर के सामाजिक और सांस्कृतिक पटल पर एक यादगार और प्रफुल्लित करने वाला अध्याय बन गया, जिसकी चर्चा शहरभर में हो रही है।