सिमरी बख्तियारपुर में सावन की चौथी सोमवारी: बाबा मटेश्वर धाम के पास पुल संख्या 47 पर लगा भीषण जाम, कांवरियों को हुई भारी परेशानी
बिहार के सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल क्षेत्र में सावन मास की चौथी सोमवारी के अवसर पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। प्रसिद्ध बाबा मटेश्वर धाम में जलाभिषेक करने के लिए दूर-दराज से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इस भारी जनसैलाब और वाहनों के अत्यधिक दबाव के कारण मंदिर मार्ग पर स्थित पुल संख्या 47 के पास एक भीषण ट्रैफिक जाम लग गया। स्थिति इतनी विकट हो गई कि मुंगेर जिले के सुल्तानगंज और अन्य गंगा घाटों से पैदल गंगाजल लेकर आ रहे हजारों कांवरियों को सुबह तक इस भयंकर जाम से निकलने में भारी मशक्कत करनी पड़ी। प्रशासनिक व्यवस्थाओं के दावों के बावजूद अचानक उमड़ी भीड़ के आगे ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई, जिससे घंटों अफरा-तफरी का माहौल रहा।
बाबा मटेश्वर धाम में चौथी सोमवारी पर उमड़ी भारी भीड़
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है, और जब बात चौथी सोमवारी की हो, तो बाबा मटेश्वर धाम में श्रद्धालुओं का उत्साह अपने चरम पर होता है।
श्रद्धालुओं का तांता: चौथी सोमवारी के मौके पर अहले सुबह से ही बाबा मटेश्वर धाम के प्रांगण में "हर-हर महादेव" और "बोल बम" के जयकारे गूंजने लगे। स्थानीय लोगों के साथ-साथ पड़ोसी जिलों से भी बड़ी संख्या में शिव भक्त भगवान भोलेनाथ को जल अर्पित करने पहुंचे।
कांवरियों का आगमन: मुंगेर जिले के विभिन्न घाटों से पवित्र गंगाजल भरकर पैदल यात्रा पूरी करने वाले कांवरियों का जत्था जैसे ही सिमरी बख्तियारपुर क्षेत्र में प्रवेश किया, भक्तों की संख्या अचानक से काफी बढ़ गई। इसी अत्यधिक भीड़ के कारण मुख्य मार्ग पर दबाव हद से ज्यादा बढ़ गया।
पुल संख्या 47 पर भीषण जाम: कांवरियों और चालकों की बढ़ी मुसीबत
सिमरी बख्तियारपुर के बाबा मटेश्वर धाम जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित पुल संख्या 47 यातायात के लिहाज से एक अतिसंवेदनशील और व्यस्त पॉइंट है, जहां चौथी सोमवारी के दिन यातायात पूरी तरह ध्वस्त हो गया।
वाहनों और श्रद्धालुओं की लंबी कतारें: मंदिर जाने वाले निजी वाहन, ऑटो, ट्रैक्टर और पैदल चल रहे कांवरियों की भीड़ एक ही रास्ते पर आ जाने से महाजाम की स्थिति उत्पन्न हो गई। गाड़ियां घंटों तक अपनी जगह पर थमी रहीं।
कांवरियों की परेशानी: जो कांवरिया पूरी रात पैदल चलकर और कंधे पर कांवड़ उठाए भगवान को जल चढ़ाने जा रहे थे, वे इस भीषण जाम में बुरी तरह फंस गए। थके-हारे कांवरियों को सुबह तक जाम से निकलने के लिए जूझना पड़ा, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं। पैदल चलने के लिए भी सुरक्षित जगह की कमी के कारण उन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।
प्रशासनिक व्यवस्था और ट्रैफिक नियंत्रण की चुनौतियां
इस बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन को लेकर प्रशासन के इंतजाम नाकाफी साबित हुए, जिसकी वजह से आम जनता और श्रद्धालुओं को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
पुलिस बल की कमी और नाकेबंदी: हालांकि स्थानीय प्रशासन द्वारा जगह-जगह पुलिसकर्मियों की तैनाती के दावे किए गए थे, लेकिन अचानक उमड़े जनसैलाब और वाहनों के भारी रेले के आगे ट्रैफिक पुलिस के प्रयास कम पड़ गए। भारी वाहनों के प्रवेश पर समय रहते पूरी तरह रोक न लगाए जाने के कारण यह स्थिति पैदा हुई।
प्रशासनिक मशक्कत: जैसे ही जाम की सूचना उच्चाधिकारियों तक पहुंची, स्थानीय थाना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद यातायात को धीरे-धीरे सुचारू करवाया गया। सुबह होने के बाद जाकर स्थिति पर कुछ हद तक नियंत्रण पाया जा सका।
स्थानीय लोगों और पंडा समाज की प्रतिक्रिया
इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों, दुकानदारों और पंडा समाज के लोगों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि हर वर्ष सावन की प्रत्येक सोमवारी को बाबा मटेश्वर धाम में भारी भीड़ उमड़ती है, जिसके बावजूद प्रशासन द्वारा पहले से ठोस ट्रैफिक प्लान तैयार नहीं किया जाता है।
स्थायी समाधान की मांग: लोगों ने मांग की है कि भविष्य में आने वाले आयोजनों (विशेषकर अंतिम सोमवारी या विशेष पर्वों) पर भारी वाहनों के रूट को पूरी तरह डायवर्ट किया जाए ताकि कांवरियों और पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की बाधा का सामना न करना पड़े।
बेहतर बैरिकेडिंग की जरूरत: श्रद्धालुओं ने यह भी सुझाव दिया कि मुख्य मार्गों और पुल संख्या 47 जैसे व्यस्त स्थानों पर विशेष बैरिकेडिंग और यातायात कर्मियों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।
सिमरी बख्तियारपुर के बाबा मटेश्वर धाम के पास पुल संख्या 47 पर सावन की चौथी सोमवारी को लगा यह भीषण जाम एक बार फिर बड़े आयोजनों में प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोलता है। एक तरफ जहां शिव भक्तों की अगाध आस्था और कांवरियों का उत्साह देखने लायक था, वहीं दूसरी तरफ कुप्रबंधन के कारण उन्हें जो कष्ट झेलना पड़ा, उस पर प्रशासन को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति न हो।