भागलपुर के गोराडीह प्रखंड की मोहनपुर और सालपुर पंचायत में 'सबका सम्मान-जीवन आसन' कार्यक्रम के तहत लगा भव्य सहयोग शिविर; डीएम और एसएसपी ने सुनी समस्याएं, मौके पर मिले 19 आवेदन

भागलपुर (विशेष संवाददाता): ग्रामीण क्षेत्रों में सुदूर बैठे आम नागरिकों तक शासन और प्रशासन की पहुंच को सुनिश्चित करने तथा उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा लगातार विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में भागलपुर जिले के गोराडीह प्रखंड के अंतर्गत आने वाली मोहनपुर और सालपुर पंचायत में 'सबका सम्मान-जीवन आसन' कार्यक्रम के तहत एक विशाल सहयोग शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी यानी जिलाधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने खुद सुदूर ग्रामीण इलाके में पहुंचकर आम जनता की फरियाद सुनी और अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। इस जन-कल्याणकारी शिविर में ग्रामीणों ने भारी उत्साह के साथ हिस्सा लिया और अपनी समस्याओं से जुड़े कुल 19 आवेदन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे।

क्या है 'सबका सम्मान-जीवन आसन' कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य?

बिहार सरकार और स्थानीय प्रशासन की यह एक बेहद महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना और उनकी शिकायतों का मौके पर ही निपटारा करना है:

शिकायतों का जमीनी समाधान: अक्सर ग्रामीण इलाकों के लोगों को छोटे-छोटे कामों या राशन कार्ड, पेंशन, भूमि विवाद और पुलिस मामलों के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं। इस कार्यक्रम के तहत तमाम विभागों के अधिकारी खुद गांवों में शिविर लगाकर लोगों की समस्याओं का समाधान करते हैं।

सम्मान और सुरक्षा की गारंटी: नाम के अनुरूप 'सबका सम्मान-जीवन आसन' अभियान का मकसद नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ना और उन्हें प्रशासनिक व पुलिस स्तर पर एक सुरक्षित और सम्मानित माहौल प्रदान करना है।

मोहनपुर और सालपुर पंचायत में उमड़ी ग्रामीणों की भीड़

गोराडीह प्रखंड की मोहनपुर और सालपुर पंचायत में आयोजित इस शिविर को लेकर ग्रामीणों में सुबह से ही भारी उत्सुकता देखने को मिली। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद के साथ शिविर का रुख किया:

शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी: भागलपुर के जिलाधिकारी और एसएसपी जब खुद खुली जीप या गाड़ियों से काफिले के साथ पंचायत भवन और शिविर स्थल पर पहुंचे, तो ग्रामीणों का उत्साह और बढ़ गया। प्रशासनिक प्रमुखों को अपने बीच पाकर आम जनता ने खुलकर अपनी पीड़ा और शिकायतें उनके सामने रखीं।

संवेदनशील रवैया: दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने एक-एक ग्रामीण की बात बड़े ही धैर्य और संवेदनशीलता के साथ सुनी। कई बुजुर्गों और महिलाओं की समस्याएं सुनकर उन्होंने मौके पर मौजूद प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO), अंचल अधिकारी (CO) और स्थानीय थाना प्रभारी को तुरंत फोन कर समाधान के निर्देश दिए।

शिविर में प्राप्त हुए कुल 19 आवेदन: प्रमुख समस्याएं क्या थीं?

इस विशेष सहयोग शिविर के दौरान विभिन्न मामलों से जुड़े कुल 19 लिखित आवेदन प्राप्त हुए, जिन पर प्रशासनिक अमले ने तुरंत फाइलें तैयार करनी शुरू कर दीं:

भूमि विवाद और पैतृक जमीन के मामले: ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक मामले जमीन की पैमाइश, सीमांकन और आपसी विवाद से जुड़े आए। एसएसपी ने थाना और अंचल अधिकारी की संयुक्त टीम बनाकर इन मामलों के त्वरित निष्पादन का आदेश दिया।

वृद्धा पेंशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं: कई बुजुर्गों ने शिकायत की कि उन्हें महीनों से वृद्धा पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है। डीएम ने समाज कल्याण विभाग के अधिकारी को मौके पर ही निर्देश दिया कि पात्र लाभुकों का आवेदन तत्काल स्वीकृत किया जाए।

राशन कार्ड और आवास योजना: प्रधानमंत्री आवास योजना और राशन कार्ड से जुड़े छूटे हुए परिवारों ने भी अपने आवेदन सौंपे, जिस पर डीएम ने जांचोपरांत सूची में नाम शामिल करने का आश्वासन दिया।

पुलिस और सुरक्षा से जुड़ी शिकायतें: कुछ ग्रामीणों ने स्थानीय स्तर पर उत्पन्न सुरक्षा और विवादों को लेकर एसएसपी के समक्ष अपनी बातें रखीं, जिस पर एसएसपी ने तुरंत पुलिस बल को गश्त बढ़ाने और निष्पक्ष जांच करने का निर्देश दिया।

अधिकारियों का संदेश: "जनता की समस्या का समाधान ही हमारी प्राथमिकता"

शिविर के दौरान मीडिया और ग्रामीणों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी और एसएसपी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार और प्रशासन की मंशा है कि जनता को अपनी छोटी-छोटी शिकायतों के लिए शहर के दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें:

अधिकारियों को सख्त निर्देश: शिविर में मौजूद सभी मैदानी अधिकारियों (Field Officers) को यह चेतावनी दी गई कि जो 19 आवेदन प्राप्त हुए हैं, उनका निपटारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर हो जाना चाहिए। इसमें किसी भी प्रकार की हीला-हावाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

फीडबैक प्रणाली: प्रशासन ने यह भी कहा कि इन आवेदनों पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी मॉनिटरिंग सीधे जिला मुख्यालय स्तर से की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि हर फरियादी को वास्तविक न्याय मिला है या नहीं।

ग्रामीणों में खुशी की लहर और सकारात्मक प्रतिक्रिया

मोहनपुर और सालपुर पंचायत के ग्रामीणों ने इस अनूठी पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा की है:

"पहली बार घर आकर सुनी गई समस्याएं": स्थानीय बुजुर्गों का कहना था कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार इतने बड़े अधिकारियों (DM और SSP) को अपने गांव के बीच चौपाल लगाकर उनकी समस्याएं सुनते देखा है। इससे प्रशासन के प्रति आम जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।

उम्मीदों का नया सवेरा: ग्रामीणों को अब पूरी उम्मीद है कि इन 19 आवेदनों के जरिए उनकी वर्षों पुरानी समस्याएं चुटकियों में हल हो जाएंगी।

गोराडीह प्रखंड की मोहनपुर और सालपुर पंचायत में आयोजित 'सबका सम्मान-जीवन आसन' सहयोग शिविर इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब प्रशासनिक अमला खुद चलकर जनता के द्वार पहुंचता है, तो शासन व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कई गुना बढ़ जाता है। डीएम और एसएसपी द्वारा ग्रामीणों की समस्याएं सुनना और मौके पर 19 आवेदन प्राप्त कर उनके त्वरित निष्पादन के निर्देश देना एक सराहनीय कदम है। यदि इसी प्रकार की सक्रियता राज्य के हर प्रखंड और पंचायत में दिखाई जाए, तो निश्चित रूप से ग्रामीण भारत की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल सकती हैं।