महात्मा गांधी के ऐतिहासिक आगमन के शताब्दी वर्ष पर होगा भव्य राष्ट्रीय समारोह; बापू के विचारों को संरक्षित करने का संकल्प, ऐतिहासिक लाजपत पार्क समेत अन्य स्थलों की सुरक्षा पर मंथन
भागलपुर, विशेष संवाददाता: सिल्क सिटी भागलपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरा पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पदार्पण के सौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक भव्य और ऐतिहासिक राष्ट्रीय समारोह आयोजित करने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस त्रिदिवसीय राष्ट्रीय समारोह का मुख्य उद्देश्य बापू के पवित्र विचारों, उनके आदर्शों और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े उनके संस्मरणों को नई पीढ़ी के बीच संरक्षित करना है। इस संबंध में हाल ही में आयोजित उच्चस्तरीय बैठकों और विचार-विमर्श के दौरान भागलपुर के प्रतिष्ठित ऐतिहासिक स्थलों, विशेष रूप से स्वतंत्रता आंदोलन के साक्षी रहे लाजपत पार्क (Lajpat Park) और अन्य धरोहर स्थलों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सौंदर्यीकरण को लेकर गंभीर चर्चा की गई है। प्रशासनिक अधिकारियों, बुद्धिजीवियों और गांधीवादी विचारकों की मौजूदगी में यह संकल्प लिया गया है कि बापू की स्मृतियों को सहेजने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
महात्मा गांधी और भागलपुर का ऐतिहासिक जुड़ाव
इतिहास के पन्नों को पलटें तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का भागलपुर से एक गहरा और अटूट नाता रहा है। चंपारण सत्याग्रह के बाद बिहार में यदि किसी शहर से गांधीजी का सबसे अधिक जुड़ाव रहा, तो वह अंग क्षेत्र यानी भागलपुर था। अपने जीवनकाल में गांधीजी ने अलग-अलग अवसरों पर भागलपुर की चार ऐतिहासिक यात्राएं की थीं:
प्रथम आगमन (1917): गांधीजी पहली बार 15 अक्टूबर 1917 को बिहार छात्र सम्मेलन की अध्यक्षता करने के लिए काठियाबाड़ी वेशभूषा में भागलपुर आए थे। इसी यात्रा के दौरान उन्होंने स्थानीय भूमि पर हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने और मातृभाषा के अधिकाधिक उपयोग पर जोर दिया था।
द्वितीय आगमन (1920): असहयोग आंदोलन के सिलसिले में वे दिसंबर 1920 में तीसरी श्रेणी के डिब्बे में यात्रा करते हुए भागलपुर पहुंचे थे, जहां टिल्हा कोठी के मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित कर उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत की मुखालफत की थी।
तृतीय आगमन (1925): अक्टूबर 1925 में भागलपुर यात्रा के दौरान उन्होंने अपना 56वां जन्मदिन सादगी के साथ मनाया था। उस दौरान महिलाओं में जागृति, पर्दा प्रथा के उन्मूलन और खादी के प्रचार-प्रसार को लेकर विशेष सभाएं आयोजित की गई थीं।
चतुर्थ आगमन (1934-35): बिहार के विनाशकारी भूकंप के पश्चात पीड़ितों की सहायता और राहत कार्यों का जायजा लेने के लिए बापू ने भागलपुर का दौरा किया था और ऐतिहासिक लाजपत पार्क में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया था।
शताब्दी वर्ष पर भव्य राष्ट्रीय समारोह की रूपरेखा
बापू के भागलपुर आगमन के सौ वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय समारोह में देश भर के प्रख्यात गांधीवादी विचारक, शिक्षाविद्, साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता हिस्सा लेंगे।
शोध ग्रंथ का प्रकाशन और लोकार्पण: इस शताब्दी समारोह के अवसर पर अंग प्रदेश में महात्मा गांधी के प्रभाव और उनके चार ऐतिहासिक दौरों पर आधारित एक विशेष शोध ग्रंथ का लोकार्पण किया जाएगा। इसमें स्वतंत्रता सेनानियों और बापू से जुड़े अनछुए प्रसंगों को संकलित किया गया है।
विराट पुस्तक मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम: प्रसिद्ध प्रकाशन संस्थानों के सहयोग से एक भव्य पुस्तक मेले का आयोजन किया जाएगा, जिसमें गांधीवादी साहित्य की प्रमुख पुस्तकें उपलब्ध रहेंगी। इसके साथ ही सर्वधर्म प्रार्थना, सद्भावना यात्रा, संगोष्ठियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से बापू के शांति और अहिंसा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।
लाजपत पार्क सहित ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा पर विशेष मंथन
बैठक के दौरान सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा भागलपुर के ऐतिहासिक धरोहर स्थलों के संरक्षण और उनकी सुरक्षा का रहा:
लाजपत पार्क का महत्व: स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अनगिनत ऐतिहासिक सभाओं और आंदोलनों का गवाह रहा लाजपत पार्क आज भी शहर के दिल में बसता है। बैठक में चर्चा की गई कि इस पार्क की ऐतिहासिक गरिमा को बनाए रखते हुए इसकी सुरक्षा और रखरखाव को चाक-चौबंद किया जाए।
अतिक्रमण और रखरखाव से मुक्ति: प्रशासन और शहर के प्रबुद्ध नागरिकों ने मिलकर यह निर्णय लिया है कि लाजपत पार्क जैसे धरोहर स्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी गौरवशाली विरासत से रूबरू हो सकें। इसके अलावा शहर में बापू से जुड़े अन्य स्थलों को भी संरक्षित करने की योजना बनाई जा रही है।
प्रतिमा स्थापना की मांग: इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक संगठनों और गांधीवादियों द्वारा यह पुरजोर मांग भी उठाई गई है कि शताब्दी वर्ष के इस पावन अवसर पर शहर के प्रमुख स्थलों पर बापू की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाए, ताकि उनके विचार सदैव समाज को प्रेरित करते रहें।
महात्मा गांधी के आगमन के शताब्दी वर्ष पर भागलपुर में आयोजित होने जा रहा यह राष्ट्रीय समारोह केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह बापू के सत्य, अहिंसा और स्वावलंबन के मार्ग पर चलने का एक पुनर्संकल्प है। लाजपत पार्क जैसे ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा और उनके संरक्षण की दिशा में उठाया गया यह कदम भागलपुर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को एक नई पहचान और मजबूती प्रदान करेगा।