नाथनगर में ‘स्वाभिमान संस्था’ की ओर से कारगिल विजय दिवस पर भव्य श्रद्धांजलि सभा का आयोजन; शहीदों की याद में जलाई गई मोमबत्तियां, संस्थापक जगतराम साह कर्णपुरी की अध्यक्षता में उमड़ी श्रद्धांजलि देने वालों की भीड़
भागलपुर, विशेष संवाददाता: भारतीय सेना के अदम्य साहस, पराक्रम और शौर्य के प्रतीक ऐतिहासिक 'कारगिल विजय दिवस' (Kargil Vijay Diwas) के अवसर पर भागलपुर के नाथनगर क्षेत्र में देशभक्ति की बयार बह उठी। स्थानीय सामाजिक संगठन 'स्वाभिमान संस्था' के तत्वावधान में देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर जवानों की याद में एक भव्य और भावुक श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान संस्था के सदस्यों, स्थानीय नागरिकों और युवाओं ने हाथों में मोमबत्तियां थामकर वीर सपूतों को नमन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के संस्थापक जगतराम साह कर्णपुरी ने की, जिनके कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में यह आयोजन पूरी तरह सफल और प्रेरणादायी रहा। इस विशेष अवसर पर उपस्थित वक्ताओं और सदस्यों ने कारगिल युद्ध के इतिहास, सैनिकों के बलिदान और वर्तमान पीढ़ी के कर्तव्यों पर अपने विचार रखे।
कारगिल विजय दिवस का महत्व और कार्यक्रम की पृष्ठभूमि
प्रत्येक वर्ष 26 जुलाई को देश उन वीर सैनिकों की याद में कारगिल विजय दिवस मनाता है, जिन्होंने साल 1999 में कारगिल की बर्फीली पहाड़ियों पर दुश्मनों को खदेड़कर तिरंगा फहराया था। इस युद्ध में भारतीय सेना के सैकड़ों जवानों ने देश की संप्रभुता के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था।
शहीदों के सम्मान में संस्था की पहल: नाथनगर जैसे ऐतिहासिक क्षेत्र में इस गौरवशाली दिवस को यादगार बनाने के लिए 'स्वाभिमान संस्था' ने इस श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। संस्था का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी के दिलों में राष्ट्रप्रेम की भावना को जागृत करना और देश के लिए मिटने वाले सैनिकों के बलिदान को सदा के लिए अमर रखना है।
मोमबत्तियां जलाकर दी गई श्रद्धांजलि: संध्या के समय आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। भारत माता की जय और 'वंदे मातरम्' के गगनभेदी नारों के बीच उपस्थित लोगों ने मोमबत्तियां प्रज्वलित कर कारगिल के अमर शहीदों को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
अध्यक्षीय संबोधन: संस्थापक जगतराम साह कर्णपुरी के विचार
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे 'स्वाभिमान संस्था' के संस्थापक जगतराम साह कर्णपुरी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कारगिल के वीर सैनिकों के शौर्य को याद किया।
शहीदों का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता: अपने संबोधन में जगतराम साह कर्णपुरी ने कहा कि आज हम अपने घरों में चैन की नींद इसलिए सो पा रहे हैं क्योंकि देश की सीमाओं पर हमारे सैनिक माइनस डिग्री तापमान और विकट परिस्थितियों में भी सजग पहरा दे रहे हैं। कारगिल का युद्ध भारतीय सेना के इतिहास का एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय है, जो हर भारतीय के दिल में राष्ट्रभक्ति की अलख जगाता है।
युवाओं को देश सेवा से प्रेरणा लेने का आह्वान: उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे सिर्फ सोशल मीडिया या औपचारिक रूप से राष्ट्रभक्ति न दिखाएं, बल्कि अपने दैनिक जीवन में अनुशासन, ईमानदारी और समाज सेवा के जरिए देश के विकास में अपना योगदान दें। यही सच्ची श्रद्धांजलि हमारे वीर जवानों के प्रति होगी।
सदस्यों और वक्ताओं के संबोधन
इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में स्वाभिमान संस्था के कई अन्य प्रमुख सदस्यों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कारगिल युद्ध की कठिनाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि टाइगर हिल और तोलोलिंग जैसी रणनीतिक चोटियों पर तिरंगा फहराना कोई आसान काम नहीं था, लेकिन भारतीय जवानों ने अपने अदम्य साहस और खून से इस असंभव को संभव कर दिखाया था।
शहीदों के परिवारों के प्रति सम्मान: वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि देश के वीर जवानों और उनके आश्रितों तथा परिवारों का सम्मान करना पूरे समाज का नैतिक कर्तव्य है। जब तक देशवासी अपने सैनिकों का सम्मान करते रहेंगे, तब तक देश की अखंडता को कोई आंच नहीं आ सकती।
संकल्प यात्रा: कार्यक्रम के अंत में सभी सदस्यों ने मिलकर यह संकल्प लिया कि संस्था भविष्य में भी इस तरह के राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों को निरंतर जारी रखेगी और समाज में राष्ट्रवाद व सामाजिक समरसता की भावना को बढ़ावा देगी।
नाथनगर में स्वाभिमान संस्था द्वारा आयोजित कारगिल विजय दिवस का यह श्रद्धांजलि कार्यक्रम इस बात का प्रतीक है कि भागलपुर की जनता अपने देश के वीर सपूतों के बलिदान को भूली नहीं है। संस्थापक जगतराम साह कर्णपुरी की अध्यक्षता में संपन्न हुए इस कार्यक्रम ने न केवल शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की, बल्कि स्थानीय युवाओं और नागरिकों के भीतर देश के प्रति समर्पण की भावना को और अधिक प्रगाढ़ किया। मोमबत्तियों की जगमगाहट के बीच शहीदों को दी गई यह श्रद्धांजलि इतिहास के पन्नों में अमर हो गई है।