टीएमबीयू के पीजी गणित और भौतिकी विभाग के अध्यक्षों ने परीक्षा में कथित धोखाधड़ी पर विश्वविद्यालय द्वारा पूछे गए शोकॉज का दिया जवाब; पहले से लिखी उत्तर पुस्तिका के मामले में रखे अपने तर्क, तीन विद्यार्थियों पर भी है कार्रवाई की तलवार

भागलपुर, कार्यालय संवाददाता: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) में परीक्षाओं की पारदर्शिता और शुचिता से जुड़े एक बड़े मामले में नया मोड़ आ गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा परीक्षा के दौरान कथित रूप से धोखाधड़ी और पहले से लिखी गई उत्तर पुस्तिकाओं (Pre-written Answer Sheets) के मामले में पीजी गणित (Mathematics) और पीजी फिजिक्स (Physics) विभाग के विभागाध्यक्षों (HODs) से स्पष्टीकरण (Show-cause) की मांग की गई थी। इस पर दोनों विभागों के प्रमुखों ने अपना विस्तृत जवाब विश्वविद्यालय को सौंप दिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में तीन विद्यार्थियों की संलिप्तता भी सामने आई है, जिस कारण प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

क्या है पूरा मामला: पहले से लिखी उत्तर पुस्तिका का विवाद

विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, कुछ समय पूर्व आयोजित पीजी परीक्षाओं के दौरान एक गंभीर अनियमितता का मामला प्रकाश में आया था:

संदिग्ध उत्तर पुस्तिकाएं: परीक्षा मूल्यांकन और निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई थी कि कुछ छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं परीक्षा हॉल में मिलने वाले सादे कागजों के विपरीत पहले से ही भरी या लिखी हुई थीं। इस गंभीर चूक पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ी आपत्ति जताई थी।

शोकॉज नोटिस की प्रक्रिया: इस मामले को अनुशासनहीनता और परीक्षा प्रणाली में सेंधमारी मानते हुए टीएमबीयू प्रशासन ने पीजी गणित विभाग और पीजी फिजिक्स विभाग के प्रमुखों को नोटिस जारी कर एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर जवाब तलब किया था कि आखिर ऐसी लापरवाही कैसे हुई और परीक्षा केंद्रों पर इसकी सुचिता क्यों नहीं सुनिश्चित की जा सकी।

विभाग अध्यक्षों ने रखा अपना पक्ष और दिया जवाब

विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, दोनों विभागाध्यक्षों ने अपने-अपने शोकॉज का लिखित जवाब विश्वविद्यालय को भेज दिया है:

कार्यों और जिम्मेदारियों का स्पष्टीकरण: सूत्रों के मुताबिक, जवाब में दोनों विभागाध्यक्षों ने परीक्षा संचालन के दौरान बरती गई सावधानियों का हवाला दिया है और यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि उनके स्तर से परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के पूरे प्रयास किए गए थे। हालांकि, उन्होंने बाहरी परिस्थितियों और परीक्षा केंद्रों पर प्रबंधन की सीमाओं का भी जिक्र किया है।

विश्वविद्यालय की पैनी नजर: परीक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि दोनों विभागाध्यक्षों के जवाबों का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है। यदि उनके तर्कों से विश्वविद्यालय संतुष्ट नहीं होता है, तो आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

तीन विद्यार्थियों पर गिरी गाज, हो सकती है बड़ी कार्रवाई

इस पूरे प्रकरण में केवल शिक्षकों या विभागों की जवाबदेही तय नहीं हो रही है, बल्कि परीक्षा में अनुचित साधन अपनाने वाले छात्रों पर भी शिकंजा कसता जा रहा है:

छात्रों की भूमिका: जांच के दायरे में आए तीन विद्यार्थियों पर आरोप है कि उन्होंने परीक्षा नियमों को ताक पर रखकर अनुचित तरीकों का सहारा लिया था। इन तीनों छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं और परीक्षा के दौरान उनकी उपस्थिति की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।

अनुशासनात्मक समिति की बैठक: विश्वविद्यालय की परीक्षा बोर्ड और अनुशासन समिति इन तीनों छात्रों के खिलाफ यूएमएम (Unfair Means - UFM) के तहत सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रही है। इसमें उनका परीक्षा परिणाम रद्द करने के साथ-साथ उन्हें कुछ वर्षों के लिए परीक्षा से निष्कासित (Debar) करने का प्रावधान भी शामिल हो सकता है।

परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता को लेकर विश्वविद्यालय गंभीर

टीएमबीयू प्रशासन ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े कदम उठाने के संकेत दिए हैं:

सख्त निगरानी: कुलपति और परीक्षा नियंत्रक स्तर पर यह निर्देश दिए गए हैं कि भविष्य में होने वाली सभी पीजी और यूजी परीक्षाओं में उड़दस्तों (Flying Squads) की सक्रियता बढ़ाई जाए।

उत्तर पुस्तिकाओं की सीलिंग: परीक्षा के तुरंत बाद कॉपियों को सील करने और उन्हें सुरक्षित रखने की प्रक्रिया में और अधिक पारदर्शिता लाई जा रही है, ताकि किसी भी स्तर पर हेरफेर की गुंजाइश न बचे।

पीजी गणित और फिजिक्स विभाग के प्रमुखों द्वारा शोकॉज का जवाब दिए जाने और तीन विद्यार्थियों के इस मामले में फंसने से टीएमबीयू में एक बार फिर शैक्षणिक शुचिता और परीक्षा सुधार का मुद्दा गरमा गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों को अब नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। आगामी दिनों में अनुशासनात्मक समिति के निर्णय पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी, जिससे यह तय होगा कि दोषी पाए जाने वालों पर किस प्रकार का प्रशासनिक डंडा चलता है।