आरओबी निर्माण के कारण भोलानाथ पुल क्षेत्र में नारकीय स्थिति; जलजमाव से निपटने के लिए मोरंग और वैकल्पिक मार्गों का सहारा, सुस्त रफ्तार से जूझ रहे शहरवासी
भागलपुर, विशेष संवाददाता: सिल्क सिटी भागलपुर के बहुप्रतीक्षित और अति-महत्वपूर्ण भोलानाथ रेलवे ओवरब्रिज (ROB) / फ्लाईओवर का निर्माण कार्य इन दिनों शहरवासियों के लिए सुविधा के बजाय एक बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। मिरजानहाट शीतला स्थान से लेकर भीखनपुर गुमटी तक बनने वाले इस आरओबी परियोजना के निर्माण में हो रही अत्यधिक देरी और इसके चलते जगह-जगह उत्पन्न हुए गंभीर जलजमाव ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। स्थिति यह है कि डिक्शन मोड़, इशाकचक और भीखनपुर जैसे प्रमुख इलाकों में जलजमाव और कीचड़ से निजात पाने के लिए प्रशासन और स्थानीय लोगों को मोरंग (बालू/गिट्टी) डालने तथा वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है।
क्यों बनी है गंभीर जलजमाव की समस्या?
भोलानाथ पुल क्षेत्र में लंबे समय से जलजमाव एक नासूर बन चुका है। फ्लाईओवर निर्माण के दौरान कई जगहों पर मुख्य नालियों के मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं, जिससे हल्की बारिश या नाले का गंदा पानी सड़कों पर फैल जाता है:
कीचड़ और बदबूदार पानी का साम्राज्य: डिक्शन मोड़ और पिलर निर्माण स्थलों के पास महीनों से पानी जमा होने के कारण वह हिस्सा किसी दलदल या कंदरा में तब्दील हो चुका है। यहां सड़ते पानी और कचरे के कारण मच्छरों का प्रकोप और संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
मोरंग और ईंट के टुकड़ों का इस्तेमाल: कीचड़ भरी सड़कों पर वाहनों के फिसलने और लोगों के पैदल चलने में हो रही भारी दिक्कतों को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत सड़कों पर मोरंग (बालू) और ईंट के टुकड़े गिराए जा रहे हैं, ताकि किसी तरह आवागमन सुचारू रखा जा सके।
वैकल्पिक मार्गों की मजबूरी और डेढ़ से दो किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर
फ्लाईओवर निर्माण के लिए जगह-जगह बेरिकेडिंग कर मुख्य रास्तों को महीनों से बंद कर दिए जाने के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है:
मार्ग परिवर्तन (Diversion): भीखनपुर गुमटी नंबर दो और डिक्शन मोड़ के पास गर्डर ढालने तथा पिलर का काम चलने के कारण मुख्य रास्ते बंद हैं। इसके चलते वाहन चालकों और स्थानीय निवासियों को अपने घरों से निकलने के लिए लंबे वैकल्पिक मार्गों का चयन करना पड़ रहा है।
आम जनता की परेशानी: लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए डेढ़ से दो किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर काटना पड़ रहा है। सबसे बुरी स्थिति स्कूली बच्चों और बुजुर्गों की है, जिन्हें संकीर्ण गलियों और कीचड़ भरे रास्तों से गुजरना पड़ता है। आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस और दमकल की गाड़ियों का पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।
कछुआ गति से चल रहा निर्माण और बढ़ती डेडलाइन
भोलानाथ आरओबी परियोजना की सुस्त रफ्तार ने लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया है:
समयसीमा में बार-बार विस्तार: करीब 86 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को शुरुआती योजना के तहत तय समय में पूरा होना था, लेकिन प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनों (विशेषकर रेलवे क्षेत्र में लॉन्चिंग की अनुमति मिलने में देरी) के कारण इसकी डेडलाइन को बढ़ाकर अब 30 जून 2027 कर दिया गया है। हालांकि, जमीनी स्तर पर काम की रफ्तार को देखते हुए स्थानीय लोग और विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इसके पूरा होने में अभी और लंबा वक्त लग सकता है।
विधानसभा में भी गूंजा मामला: हाल ही में जनप्रतिनिधियों द्वारा विधानसभा सत्र के दौरान भी इस परियोजना में हो रही देरी और जलजमाव का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया, जिसके बाद प्रशासनिक स्तर पर पंप लगाकर पानी निकासी और नाला निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
व्यापार और दैनिक जीवन पर असर
सड़कों के बंद रहने और जलजमाव के कारण इस क्षेत्र के व्यावसायिक प्रतिष्ठान बुरी तरह प्रभावित हुए हैं:
दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों के लिए रास्ता न होने के कारण उनका कारोबार ठप सा हो गया है। धूल-धक्कड़ और कीचड़ के बीच जीना स्थानीय दुकानदारों और निवासियों की रोजमर्रा की विवशता बन गई है।
भोलानाथ आरओबी का निर्माण भागलपुर के दीर्घकालिक विकास और यातायात सुगमता के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन वर्तमान में कुप्रबंधन, जलजमाव और धीमी रफ्तार के कारण यह जनता के लिए 'नरक' साबित हो रहा है। जब तक यह परियोजना पूरी नहीं होती, तब तक प्रशासन को मोरंग बिछाने जैसे तात्कालिक उपायों के साथ-साथ नियमित रूप से जल निकासी और वैकल्पिक मार्गों की बेहतर मॉनिटरिंग सुनिश्चित करनी होगी, ताकि शहरवासियों को इस नारकीय पीड़ा से कुछ राहत मिल सके।