IGNOU क्षेत्रीय केंद्र: 'टीवी मुक्त भारत अभियान' के तहत श्वास रोग और स्वस्थ जीवन शैली पर आयोजित हुई विशेष परिचर्चा; डॉ. मार्कंडेय नाथ तिवारी ने आहार, विहार, निद्रा और दिनचर्या के महत्व पर डाला प्रकाश

पटना/दरभंगा (बिहार): बिहार के शैक्षणिक और स्वास्थ्य जागरूकता परिदृश्य से एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक खबर सामने आ रही है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) के क्षेत्रीय केंद्र के तत्वावधान में देशव्यापी 'टीबी मुक्त भारत अभियान' (TB-Free India Campaign) के अंतर्गत श्वास रोग और उससे जुड़े बचाव के उपायों पर एक विशेष परिचर्चा सह संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गरिमामयी कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात चिकित्सक एवं वक्ता डॉ. मार्कंडेय नाथ तिवारी ने शिरकत की। परिचर्चा के दौरान डॉ. तिवारी ने स्वस्थ और दीर्घायु जीवन जीने के लिए मानव शरीर की इंद्रियों के स्वास्थ्य, संतुलित आहार, उचित विहार, पर्याप्त निद्रा, ब्रह्मचर्य और अनुशासित दिनचर्या के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने आधुनिक जीवनशैली में उत्पन्न हो रही श्वास संबंधी समस्याओं और त्क्षय रोग (टीबी) जैसी गंभीर बीमारियों से निपटने के लिए शारीरिक एवं मानसिक संतुलन को बेहद आवश्यक बताया। कार्यक्रम में इग्नू के अधिकारियों, क्षेत्रीय अध्ययन केंद्रों के छात्रों, शोधार्थियों और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने हिस्सा लिया, जिससे स्वास्थ्य के प्रति एक सकारात्मक संदेश पूरे क्षेत्र में प्रसारित हुआ है।

आइए इग्नू द्वारा आयोजित इस स्वास्थ्य परिचर्चा, टीबी मुक्त भारत अभियान की प्रासंगिकता, श्वास रोगों के कारणों और आयुर्वेद व आधुनिक विज्ञान के समन्वय से स्वस्थ जीवन जीने के तौर-तरीकों का एक विस्तृत, विश्लेषणात्मक और बिंदुवार विवरण समझते हैं।

आयोजन की पृष्ठभूमि: क्यों है 'टीबी मुक्त भारत अभियान' और श्वास रोग पर चर्चा की आवश्यकता?

भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे 'टीबी मुक्त भारत अभियान' का उद्देश्य देश से त्क्षय रोग (Tuberculosis) को जड़ से समाप्त करना है, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी इसे जन-आंदोलन बना रही है।

श्व्वास रोगों और टीबी का बढ़ता प्रकोप: प्रदूषित पर्यावरण, बदलती जीवनशैली और खानपान की अनियमितता के कारण आज के समय में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और टीबी जैसी श्वास संबंधी बीमारियां तेजी से पांव पसार रही हैं।

इग्नू की सामाजिक और शैक्षणिक भूमिका: दूरस्थ शिक्षा का बड़ा केंद्र होने के नाते इग्नू केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि समय-समय पर सामाजिक सरोकार और जनस्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता है।

निवारक स्वास्थ्य देखभाल (Preventive Healthcare) पर जोर: बीमारी होने के बाद इलाज कराने से बेहतर है कि जीवनशैली को इतना मजबूत बनाया जाए कि रोग शरीर पर हावी ही न हो सके।

 डॉ. मार्कंडेय नाथ तिवारी का मुख्य उद्बोधन: स्वस्थ जीवन के छह आधार स्तंभ

परिचर्चा के दौरान मुख्य वक्ता डॉ. मार्कंडेय नाथ तिवारी ने प्राचीन भारतीय जीवन दर्शन और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान का समन्वय करते हुए स्वस्थ जीवन के छह प्रमुख आधार स्तंभों पर गहरी रोशनी डाली।

इंद्रियों का स्वास्थ्य (Sensory Health): शरीर की पांचों ज्ञानेंद्रियों और कर्मेंद्रियों पर नियंत्रण तथा उनका सही उपयोग मानसिक और शारीरिक संतुलन की पहली सीढ़ी है।

आहार और विहार (Diet and Lifestyle): पौष्टिक, सात्विक और संतुलित आहार के साथ-साथ शरीर की आवश्यकतानुसार सही समय पर किया गया शारीरिक विहार रोगों से लड़ने की क्षमता (Immunity) को मजबूत करता है।

निद्रा और विश्राम (Proper Sleep): आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग पूरी नींद नहीं लेते, जिससे तंत्रिका तंत्र (Nervous System) कमजोर होता है। डॉ. तिवारी ने फेफड़ों और शरीर की रिकवरी के लिए गहरी और पर्याप्त नींद को अनिवार्य बताया।

ब्रह्मचर्य और मानसिक संयम: ऊर्जा के संरक्षण और मानसिक एकाग्रता के लिए संयमित जीवन शैली का पालन करना व्यक्ति को दीर्घायु बनाता है।

अनुशासित दिनचर्या (Daily Routine): सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक एक निश्चित चक्र का पालन करने से शरीर की जैविक घड़ी (Biological Clock) सही ढंग से कार्य करती है, जिससे श्वास संबंधी विकार दूर रहते हैं।

श्वास रोग और त्क्षय रोग (TB) से बचाव के व्यावहारिक उपाय

परिचर्चा के दूसरे सत्र में विशेष रूप से श्वास नली के संक्रमण और टीबी के लक्षणों तथा उनके निदान पर चर्चा की गई।

फेफड़ों की क्षमता बढ़ाना (Lung Capacity): प्राणायम, योगासन और ताजी हवा में टहलने से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है, जिससे श्वास रोग होने का खतरा कम हो जाता है।

टीबी के लक्षण और भ्रांतियां: टीबी लाइलाज बीमारी नहीं है; यदि दो सप्ताह से अधिक की खांसी, बलगम में खून या शाम को हल्का बुखार आए, तो तुरंत बलगम की जांच करानी चाहिए और सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली मुफ्त दवा का पूरा कोर्स करना चाहिए।

धुएं और प्रदूषण से बचाव: रसोई के धुएं, सिगरेट-बीड़ी और औद्योगिक प्रदूषण से बचने के लिए मास्क या सुरक्षात्मक उपायों का प्रयोग करने की सलाह दी गई।

 श्रोताओं की सहभागिता और प्रश्नोत्तर सत्र

कार्यक्रम के अंत में एक इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित छात्रों और कर्मचारियों ने स्वास्थ्य से जुड़े अपने सवाल डॉक्टर के सामने रखे।

युवाओं में बदलती आदतें: छात्रों ने देर रात तक जागने और फास्ट फूड खाने की आदतों पर चिंता व्यक्त की, जिस पर डॉ. तिवारी ने उन्हें अपनी दिनचर्या में सुधार करने के व्यावहारिक टिप्स दिए।

सामुदायिक सहभागिता का संकल्प: उपस्थित सभी लोगों ने शपथ ली कि वे अपने परिवार और समाज में टीबी के मरीजों के प्रति सामाजिक भेदभाव को समाप्त करेंगे और उन्हें समय पर इलाज कराने के लिए प्रेरित करेंगे।

इग्नू क्षेत्रीय केंद्र द्वारा 'टीबी मुक्त भारत अभियान' के तहत श्वास रोग पर आयोजित यह परिचर्चा न केवल बौद्धिक स्तर पर समृद्ध थी, बल्कि यह व्यावहारिक जीवन में बदलाव लाने वाली साबित हुई। डॉ. मार्कंडेय नाथ तिवारी द्वारा स्वस्थ जीवन के लिए बताए गए आहार, विहार, निद्रा और अनुशासन के मूल मंत्र यदि आज की पीढ़ी अपने जीवन में उतार ले, तो न केवल श्वास रोगों और टीबी जैसी गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है, बल्कि एक स्वस्थ, ऊर्जावान और सशक्त समाज का निर्माण भी किया जा सकता है। यह आयोजन जनस्वास्थ्य के प्रति शैक्षणिक संस्थानों की प्रतिबद्धता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।