प्रखंड संसाधन केंद्र (BRC) में शिक्षा सेवकों और तालिमी मरकज के कार्यकर्ताओं की हुई महत्वपूर्ण बैठक; नशा मुक्ति अभियान को जन-जन तक पहुँचाने का लिया गया संकल्प, बांटे गए जागरूकता पंपलेट

भागलपुर/सुल्तानगंज, कार्यालय संवाददाता: बिहार सरकार द्वारा समाज सुधार की दिशा में चलाए जा रहे महत्वाकांक्षी अभियानों को धरातल पर और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से सुल्तानगंज के प्रखंड संसाधन केंद्र (BRC) परिसर में शुक्रवार को शिक्षा सेवकों और तालिमी मरकज के स्वयंसेवकों की एक उच्चस्तरीय एवं अहम बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य एजेंडा राज्य में पूर्ण शराबबंदी और नशा मुक्ति अभियान को समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुँचाना था। बैठक के दौरान उपस्थित सभी कर्मियों को नशे के घातक दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से प्रशिक्षित किया गया और उन्हें निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्र में जाकर लोगों को जागरूक करें। इस अवसर पर विशेष रूप से तैयार किए गए जागरूकता पंपलेट भी वितरित किए गए।

बीआरसी भवन में आयोजित बैठक का मुख्य उद्देश्य

सुल्तानगंज बीआरसी सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा विभाग और समाज कल्याण के समन्वय से जुड़े तमाम जमीनी कार्यकर्ता शामिल हुए:

नशा मुक्त समाज के निर्माण पर जोर: बैठक की अध्यक्षता कर रहे अधिकारियों ने कहा कि शिक्षा सेवक और तालिमी मरकज के कार्यकर्ता समाज की रीढ़ हैं, जो सीधे तौर पर ग्रामीण बस्तियों, महादलित टोलों और अल्पसंख्यक क्षेत्रों में काम करते हैं। इसलिए समाज में व्याप्त कुरीतियों और विशेषकर नशामुक्ति के संदेश को घर-घर पहुँचाने में इनकी भूमिका सबसे अहम है।

शराबबंदी और सामाजिक बदलाव: वक्ताओं ने इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि किस प्रकार शराब और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से परिवारों की आर्थिक स्थिति बर्बाद होती है और घरेलू हिंसा जैसी सामाजिक बुराइयाँ जन्म लेती हैं। इस लाइलाज सामाजिक बीमारी को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए जन-जागरण ही एकमात्र विकल्प है।

शिक्षा सेवकों को दी गई नशे के दुष्प्रभावों की विस्तृत जानकारी

बैठक के दौरान एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया जिसमें स्वास्थ्य और सामाजिक दृष्टिकोण से नशे के नुकसानों पर चर्चा हुई:

शारीरिक और मानसिक क्षति: शिक्षा सेवकों को समझाया गया कि नशा व्यक्ति के तंत्रिका तंत्र (Nervous System), यकृत (Liver), और फेफड़ों को किस प्रकार खोखला कर देता है। इसके सेवन से न केवल व्यक्ति की कम उम्र में अकाल मृत्यु होती है, बल्कि उसका पूरा परिवार मानसिक और आर्थिक रूप से टूट जाता है।

बच्चों की शिक्षा पर बुरा असर: बैठक में इस पहलू को प्रमुखता से उठाया गया कि जिन घरों में नशे की लत होती है, वहाँ के बच्चों की शिक्षा बीच में ही छूट जाती है। माता-पिता की कमाई का बड़ा हिस्सा नशे की भेंट चढ़ जाता है, जिससे बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाता है। शिक्षा सेवकों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई कि वे ऐसे परिवारों के बच्चों को चिन्हित कर उन्हें स्कूल से जोड़ें।

पंपलेट वितरण और घर-घर जाकर जन-जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश

बैठक के समापन चरण में कार्यकर्ताओं के बीच बड़े पैमाने पर जागरूकता सामग्री का वितरण किया गया:

जागरूकता पंपलेट और निर्देशिका: उपस्थित सभी शिक्षा सेवकों और तालिमी मरकज के कार्यकर्ताओं को सरकार द्वारा मुद्रित आकर्षक पंपलेट दिए गए, जिन पर नशामुक्ति के लाभ, कानूनी प्रावधान और हेल्पलाइन नंबर दर्ज हैं।

टोल-मोहल्लों में चौपाल और बैठकें: निर्देश दिया गया कि कार्यकर्ता अपने कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले हर एक मोहल्ले और टोले में जाकर नुक्कड़ बैठकें या चौपाल लगाएं। लोगों को पंपलेट सौंपें और उन्हें समझाइश दें कि वे समाज को नशामुक्त बनाने में अपना पूरा योगदान दें। यदि कहीं अवैध शराब की बिक्री या निर्माण की सूचना मिलती है, तो इसकी तुरंत प्रशासनिक सूचना दें।

कार्यकर्ताओं का संकल्प: "नशामुक्त बनाएंगे अपना समाज"

बैठक के अंत में सभी शिक्षा सेवकों और तालिमी मरकज के कर्मियों ने सामूहिक रूप से शपथ ली कि वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ इस अभियान को सफल बनाएंगे:

सामूहिक सहभागिता: कर्मियों ने विश्वास दिलाया कि वे सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि ज़मीन पर उतरकर महिलाओं और युवाओं को जागरूक करेंगे ताकि युवा पीढ़ी को बर्बादी के रास्ते पर जाने से बचाया जा सके।

सुल्तानगंज के बीआरसी भवन में आयोजित शिक्षा सेवकों और तालिमी मरकज की यह बैठक सामाजिक बदलाव की दिशा में एक बेहद सराहनीय कदम साबित हुई है। नशा मुक्ति अभियान के तहत पंपलेट वितरण और जमीनी स्तर पर कार्य करने का यह संकल्प न केवल सुल्तानगंज बल्कि पूरे भागलपुर जिले में एक स्वस्थ, सुरक्षित और जागरूक समाज के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा।