कम मतदान वाली सीट पर वोटिंग बढ़ाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती, जागरूकता अभियान तेज

पटना: बिहार की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण मानी जाने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राजधानी पटना के मध्य क्षेत्र में स्थित यह विधानसभा सीट हमेशा से राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम रही है। हालांकि, इस सीट की एक बड़ी पहचान यह भी रही है कि यहां मतदान प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहता है। ऐसे में आगामी उपचुनाव में अधिक से अधिक मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाना जिला प्रशासन और निर्वाचन आयोग के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

चुनाव आयोग ने मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए विशेष रणनीति तैयार की है। जिला प्रशासन ने मतदाता जागरूकता अभियान (SVEEP) को और अधिक प्रभावी बनाने का निर्णय लिया है, ताकि लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए प्रेरित हों। अधिकारियों का मानना है कि यदि इस बार मतदान प्रतिशत में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, तो यह लोकतांत्रिक भागीदारी के लिहाज से बड़ी उपलब्धि होगी।

बांकीपुर सीट का राजनीतिक महत्व

बांकीपुर विधानसभा सीट बिहार की सबसे चर्चित शहरी सीटों में गिनी जाती है। राजधानी पटना के प्रमुख इलाकों को समेटने वाली इस सीट पर राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत झोंकते हैं। यहां का चुनावी परिणाम अक्सर राज्य की राजनीतिक दिशा और शहरी मतदाताओं के रुझान को भी दर्शाता है।

इस सीट पर शिक्षित, नौकरीपेशा, व्यापारी, युवा, वरिष्ठ नागरिक और बड़ी संख्या में मध्यमवर्गीय मतदाता रहते हैं। इसके बावजूद पिछले चुनावों में यहां मतदान प्रतिशत अपेक्षाकृत कम दर्ज किया गया है।

कम मतदान क्यों चिंता का विषय?

लोकतंत्र में अधिक मतदान को जनभागीदारी का प्रतीक माना जाता है। लेकिन शहरी क्षेत्रों में अक्सर यह देखा गया है कि मतदान के दिन बड़ी संख्या में मतदाता घरों से बाहर नहीं निकलते। बांकीपुर सीट भी इसी चुनौती का सामना करती रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी जीवनशैली, व्यस्त दिनचर्या, मतदान के प्रति उदासीनता और कई बार मतदाता सूची से संबंधित समस्याएं भी कम मतदान की वजह बनती हैं।

निर्वाचन आयोग का कहना है कि प्रत्येक पात्र नागरिक का मतदान करना लोकतंत्र को मजबूत बनाता है। इसलिए इस बार विशेष प्रयास किए जा रहे हैं कि अधिक से अधिक लोग मतदान केंद्र तक पहुंचें।

प्रशासन ने शुरू किया जागरूकता अभियान

जिला प्रशासन ने मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है। स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों, बाजारों और आवासीय कॉलोनियों में मतदाता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

इसके अलावा सोशल मीडिया, रेडियो, स्थानीय टीवी चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी लोगों को मतदान के महत्व के बारे में जानकारी दी जा रही है।

युवाओं को विशेष रूप से मतदान के लिए प्रेरित किया जा रहा है। पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं के लिए अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि उनमें लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति उत्साह बढ़े।

SVEEP अभियान पर रहेगा विशेष जोर

निर्वाचन आयोग के 'सिस्टेमैटिक वोटर्स एजुकेशन एंड इलेक्टोरल पार्टिसिपेशन (SVEEP)' कार्यक्रम के तहत कई विशेष गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।

रैली, मानव श्रृंखला, नुक्कड़ नाटक, पोस्टर प्रतियोगिता, साइकिल रैली, मैराथन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सोशल मीडिया अभियान के माध्यम से मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित किया जाएगा।

महिला स्वयं सहायता समूहों, स्वयंसेवी संगठनों और स्थानीय संस्थाओं को भी इस अभियान से जोड़ा जा रहा है।

राजनीतिक दलों ने झोंकी ताकत

उपचुनाव को लेकर प्रमुख राजनीतिक दलों ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सभी दल मतदाताओं तक पहुंचने के लिए जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं।

पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों से संपर्क कर रहे हैं और अपने प्रत्याशी के पक्ष में समर्थन मांग रहे हैं। नेताओं की सभाएं, रोड शो और नुक्कड़ बैठकें भी लगातार आयोजित की जा रही हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस सीट पर मतदान प्रतिशत का सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है। इसलिए सभी दल अपने समर्थकों को मतदान केंद्र तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।

युवाओं और महिलाओं पर विशेष फोकस

इस बार निर्वाचन आयोग युवाओं और महिला मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दे रहा है।

कॉलेजों में मतदाता जागरूकता कार्यक्रम, सेल्फी प्वाइंट, डिजिटल अभियान और मतदान की शपथ जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

महिला मतदाताओं के लिए भी मतदान केंद्रों पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी है ताकि वे बिना किसी परेशानी के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।

मतदान केंद्रों पर होंगी बेहतर सुविधाएं

प्रशासन का दावा है कि सभी मतदान केंद्रों पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

मतदाताओं के लिए पेयजल, शौचालय, व्हीलचेयर, रैंप, छाया की व्यवस्था, बैठने की सुविधा और दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष इंतजाम किए जाएंगे।

इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह चाक-चौबंद रहेगी ताकि मतदाता निर्भय होकर मतदान कर सकें।

सुरक्षा और निष्पक्ष चुनाव की तैयारी

जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुरक्षा योजना तैयार की है।

संवेदनशील और अतिसंवेदनशील मतदान केंद्रों की पहचान की जा रही है। केंद्रीय सुरक्षा बलों और राज्य पुलिस की तैनाती की जाएगी। कई स्थानों पर वेबकास्टिंग और सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से भी निगरानी की जाएगी।

आचार संहिता के पालन पर विशेष नजर रखी जाएगी और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

चुनाव आयोग की अपील

निर्वाचन आयोग ने सभी पात्र मतदाताओं से मतदान के दिन अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अपील की है।

अधिकारियों ने कहा है कि मतदान केवल अधिकार ही नहीं बल्कि लोकतंत्र के प्रति नागरिकों की जिम्मेदारी भी है। प्रत्येक वोट लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाता है और बेहतर जनप्रतिनिधि चुनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव केवल राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई नहीं है, बल्कि निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन के लिए भी एक बड़ी परीक्षा है। कम मतदान वाली इस सीट पर वोटिंग प्रतिशत बढ़ाना सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। प्रशासन ने जागरूकता अभियान, बेहतर मतदान सुविधाओं और व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के जरिए अधिक से अधिक मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाने की तैयारी की है। अब देखना होगा कि इन प्रयासों का कितना असर पड़ता है और क्या इस बार बांकीपुर विधानसभा सीट पर मतदान प्रतिशत पिछले चुनावों की तुलना में नया रिकॉर्ड बना पाता है।