रेलवे गुमटी खोलने की मांग को लेकर पांचवें दिन भी जारी रहा अनिश्चितकालीन धरना, 18 जुलाई को ‘रेल रोको’ आंदोलन का ऐलान

बक्सर: जिला मुख्यालय के इटाढ़ी रोड स्थित रेलवे गुमटी को दोबारा खोलने की मांग को लेकर स्थानीय लोगों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। रेलवे गुमटी बंद होने से आम लोगों को हो रही परेशानी के विरोध में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना गुरुवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक रेलवे गुमटी को दोबारा नहीं खोला जाएगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

धरना स्थल पर बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। आंदोलनकारियों ने प्रशासन और रेलवे अधिकारियों से जनहित को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द गुमटी खोलने की मांग की।

पांचवें दिन भी जारी रहा धरना

17 जुलाई को आयोजित धरने की अध्यक्षता जिला संयोजक सरोज राजभर ने की, जबकि कार्यक्रम का संचालन राम इकबाल ठाकुर ने किया।

धरना स्थल पर वक्ताओं ने कहा कि रेलवे गुमटी बंद होने के बाद आसपास के हजारों लोगों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों, व्यापारियों और दैनिक यात्रियों को लंबा चक्कर लगाकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि यह केवल सुविधा का मामला नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

गुमटी बंद होने से बढ़ी लोगों की परेशानी

स्थानीय लोगों के अनुसार, रेलवे गुमटी बंद होने के बाद क्षेत्र के कई गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है।

लोगों को वैकल्पिक मार्ग से कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इससे समय और धन दोनों की बर्बादी हो रही है।

व्यापारियों का कहना है कि ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने से कारोबार पर भी नकारात्मक असर पड़ा है। वहीं किसानों को कृषि उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में अतिरिक्त समय और लागत लग रही है।

आंदोलन जारी रखने का ऐलान

धरने को संबोधित करते हुए जिला संयोजक सरोज राजभर ने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह जनहित से जुड़ा हुआ है और इसे किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जब तक रेलवे गुमटी दोबारा नहीं खोली जाती, तब तक धरना लगातार जारी रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि मोर्चा आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है और आंदोलन को लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।

18 जुलाई को ‘रेल रोको’ आंदोलन की घोषणा

आंदोलन को और तेज करते हुए मोर्चा ने 18 जुलाई को ‘रेल रोको’ अभियान चलाने की घोषणा की है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे रेलवे ट्रैक पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने का पूरा प्रयास किया जाएगा।

‘रेल रोको’ की घोषणा के बाद रेलवे प्रशासन और जिला प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है।

प्रशासन और रेलवे से की अपील

धरना स्थल से आंदोलनकारियों ने रेल मंडल प्रबंधक (DRM) और जिला प्रशासन से अपील की कि वे इस जनहित के मुद्दे पर गंभीरता से विचार करें।

उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान निकाल लिया जाए, तो आंदोलन को समाप्त किया जा सकता है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच संवाद से इस समस्या का शांतिपूर्ण समाधान संभव है।

आम जनता का मिल रहा समर्थन

धरने को स्थानीय नागरिकों का लगातार समर्थन मिल रहा है।

कई सामाजिक संगठनों और क्षेत्र के लोगों ने भी आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए कहा कि रेलवे गुमटी खुलने से हजारों लोगों को राहत मिलेगी।

लोगों का कहना है कि यह किसी एक व्यक्ति या संगठन का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जनता से जुड़ी समस्या है।

सुरक्षा व्यवस्था पर प्रशासन की नजर

‘रेल रोको’ आंदोलन की घोषणा के बाद प्रशासन ने स्थिति पर नजर रखना शुरू कर दिया है।

संभावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।

यदि आवश्यकता पड़ी तो अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती भी की जा सकती है ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।

समाधान की उम्मीद

स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन और रेलवे अधिकारी जल्द ही इस मामले में सकारात्मक पहल करेंगे।

यदि बातचीत के जरिए समाधान निकलता है, तो लंबे समय से चल रही समस्या समाप्त हो सकती है और लोगों को राहत मिलेगी।

आंदोलनकारियों ने भी कहा है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाता है, तो वे प्रशासन के साथ सकारात्मक संवाद के लिए तैयार हैं।

जनहित का मुद्दा बना आंदोलन

विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे गुमटी जैसे मुद्दे सीधे लोगों के दैनिक जीवन से जुड़े होते हैं।

ऐसी स्थिति में प्रशासन, रेलवे और स्थानीय प्रतिनिधियों को मिलकर ऐसा समाधान निकालना चाहिए, जिससे सुरक्षा और जनसुविधा दोनों सुनिश्चित हो सकें।

बक्सर के इटाढ़ी रोड स्थित रेलवे गुमटी को दोबारा खोलने की मांग अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। पांच दिनों से जारी अनिश्चितकालीन धरने के बाद आंदोलनकारियों ने 18 जुलाई को ‘रेल रोको’ अभियान का ऐलान कर दिया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे गुमटी बंद रहने से उनकी दैनिक जिंदगी, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रभावित हो रही है। अब सभी की नजर रेलवे प्रशासन और जिला प्रशासन के अगले कदम पर है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन और तेज हो सकता है। वहीं, यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित होता है, तो इस जनहित से जुड़े मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान निकलने की संभावना भी बनी हुई है।