नगर निकाय कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को मिला 'ऐक्टू' का समर्थन; मुकेश मुक्त ने सरकार और प्रशासन को चेताया, मांगों को तुरंत पूरा करने की पुरजोर मांग

भागलपुर, कार्यालय संवाददाता: सिल्क सिटी भागलपुर में नगर निगम और नगर निकायों के सफाई कर्मचारियों, चालकों और दैनिक वेतनभोगियों द्वारा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शुरू की गई अनिश्चितकालीन हड़ताल अब और अधिक व्यापक रूप लेती जा रही है। शहर की चरमराई जलापूर्ति और कचरा उठाव ठप होने के बीच इस आंदोलन को वामपंथी मजदूर संगठन ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ऐक्टू) ने अपना खुला और पूर्ण समर्थन देने की घोषणा कर दी है। ऐक्टू के राज्यीय नेता मुकेश मुक्त ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि कर्मचारियों की जायज मांगों को अविलंब पूरा नहीं किया गया, तो यह आंदोलन न केवल भागलपुर तक सीमित रहेगा, बल्कि इसे पूरे राज्य स्तर पर और अधिक आक्रामक रूप दिया जाएगा।

ऐक्टू का समर्थन मिलने से आंदोलन को मिली नई धार

नगर निकाय कर्मियों की हड़ताल के तीसरे दिन ऐक्टू के समर्थन की घोषणा ने प्रशासनिक हलचल को और तेज कर दिया है:

सड़कों पर उतरे मजदूरों के हक में आवाज: ऐक्टू के नेता मुकेश मुक्त ने हड़ताली कर्मचारियों के बीच पहुंचकर उनका हौसला बढ़ाया और सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी और मुश्किलों के बीच काम करने वाले सफाई कर्मियों और संविदा पर कार्यरत कर्मियों का शोषण अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

संगठित संघर्ष की हुंकार: ट्रेड यूनियन के समर्थन से अब शहर के अन्य मजदूर संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी नगर निगम कर्मियों के समर्थन में आवाज उठानी शुरू कर दिया है, जिससे प्रशासन पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

क्या हैं कर्मचारियों की मुख्य मांगें, जिन्हें लेकर मचा है घमासान?

हड़ताल पर बैठे कर्मियों और ऐक्टू नेताओं द्वारा सरकार और नगर निगम प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी गई हैं:

नियमित वेतन और बकाये का भुगतान: कर्मचारियों का मुख्य दर्द यह है कि उन्हें महीनों तक नियमित वेतन नहीं मिलता है। त्योहारों और रोजमर्रा की जरूरतों के समय भी खाली हाथ रहना पड़ता है, इसलिए सभी बकाये एरियर का तत्काल भुगतान किया जाए।

संविदा और दैनिक कर्मियों का स्थायीकरण: निगम में वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे दैनिक वेतनभोगियों और अनुबंध आधारित सफाई कर्मियों को स्थायी (Regularize) किया जाए, ताकि उन्हें श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले सभी लाभ मिल सकें।

सुरक्षा उपकरण और चिकित्सा सुविधा: जोखिम भरे माहौल में नालियों और कचरे के बीच काम करने वाले कर्मचारियों को सुरक्षा किट (ग्लव्स, मास्क, जूते, रेनकोट आदि) और मुफ्त चिकित्सा बीमा का लाभ सुनिश्चित किया जाए।

मुकेश मुक्त की दो टूक: 'सरकार तुरंत माने मांगें, वरना होगा बड़ा आंदोलन'

हड़ताली कर्मियों को संबोधित करते हुए ऐक्टू नेता मुकेश मुक्त ने प्रशासनिक लापरवाही पर जोरदार प्रहार किया:

सरकार की संवेदनहीनता पर सवाल: उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि शहर की साफ-सफाई और जलापूर्ति करने वाले इन गरीब मजदूरों के प्रति पूरी तरह संवेदनहीन बने हुए हैं। जनता पानी के लिए त्राहिमाम कर रही है और अधिकारी सिर्फ कागजी आश्वासन दे रहे हैं।

चेतावनी: उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि प्रशासनिक अधिकारियों ने तानाशाही रवैया छोड़ 24 घंटे के भीतर वार्ता कर समाधान नहीं निकाला, तो ऐक्टू राज्यव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंकेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

शहर में गहराता संकट और जनजीवन पर असर

नगर निकाय कर्मियों की इस अनिश्चितकालीन हड़ताल और उसपर ट्रेड यूनियनों के समर्थन से भागलपुर शहर की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है:

जलापूर्ति और स्वच्छता ठप: डीप बोरिंग और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बंद होने से अधिकांश वार्डों में पीने के पानी का संकट गहरा गया है। वहीं, दूसरी ओर मुख्य बाजारों और गलियों में कचरे के पहाड़ खड़े होने से लोगों का घर से निकलना दूभर हो गया है।

प्रशासन की बढ़ी मुश्किलें: हड़ताल खत्म कराने के लिए निगम प्रशासन लगातार बैठकों का दौर चला रहा है, लेकिन कर्मचारियों और यूनियनों के कड़े तेवर के कारण अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आ सका है।

भागलपुर में नगर निकाय कर्मियों की हड़ताल को ऐक्टू का समर्थन मिलने और मुकेश मुक्त द्वारा सरकार को दी गई चेतावनी ने इस पूरे प्रकरण को एक नया राजनीतिक और सामाजिक मोड़ दे दिया है। यदि समय रहते सरकार और स्थानीय प्रशासन ने हठधर्मिता छोड़कर इन मेहनतकश कर्मचारियों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक विकराल रूप धारण कर सकता है, जिसका खामियाजा अंततः आम जनता और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों को भुगतना पड़ेगा।