जीविका दीदियों ने एजेंसी द्वारा ऋण राशि हड़पने के खिलाफ कलेक्ट्रेट पर किया जोरदार प्रदर्शन; डीडीसी के आश्वासन के बाद भी डीएम से मिलने पर अड़ीं महिलाएं
बिहार के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी और सशक्त बनाने के लिए चलाई जा रही महत्वाकांक्षी 'जीविका' योजना (Jeevika Scheme) से जुड़ी महिलाओं के साथ एक बड़े धोखाधड़ी और ठगी का मामला सामने आया है। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में इन दिनों हड़कंप मचा हुआ है, जहाँ विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से आईं सैकड़ों 'जीविका दीदियों' ने एक निजी एजेंसी द्वारा ऋण (Loan) की राशि हड़पे जाने के विरोध में कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया।
'लखपति दीदी' बनाने का सपना दिखाकर एक फर्जी या संदेहास्पद एजेंसी द्वारा महिलाओं के नाम पर भारी-भरकम लोन पास कराकर पैसे गबन करने का यह मामला बेहद गंभीर रूप लेता जा रहा है। हालांकि इस हंगामे के बीच जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों (DDC) ने मौके पर पहुंचकर महिलाओं को राशि वापस दिलाने का आश्वासन दिया है, लेकिन ठगी का शिकार हुईं आक्रोशित दीदियों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है और वे सीधे जिला मजिस्ट्रेट (DM) से मिलकर कार्रवाई की मांग पर अड़ी हुई हैं। आइए मुजफ्फरपुर की इस सनसनीखेज ठगी, जीविका दीदियों के आंदोलन और प्रशासनिक प्रतिक्रिया का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
पृष्ठभूमि: क्या है पूरा मामला और कैसे हुआ ठगी का खुलासा?
केंद्र और राज्य सरकार की साझा पहलों के तहत ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से जोड़कर उन्हें लघु उद्योगों और स्वरोजगार के जरिए 'लखपति दीदी' बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसी योजना का लाभ उठाने के नाम पर कुछ बिचौलियों और फर्जी एजेंसियों ने इन भोली-भाली महिलाओं को अपना शिकार बनाया।
लोन के नाम पर धोखाधड़ी: आरोप है कि एक एजेंसी के एजेंटों ने जीविका दीदियों को अधिक मुनाफा कमाने और कम ब्याज दर पर बड़ा ऋण दिलाने का झांसा दिया। महिलाओं के कागजात, आधार कार्ड और बैंक पासबुक के जरिए उनके नाम पर लाखों रुपये का लोन अलग-अलग वित्तीय संस्थानों से पास करवा लिया गया।
रुपये हड़पने का खेल: जब महिलाओं के खातों में ऋण की राशि आई, तो एजेंसी के लोगों ने विभिन्न बहानों से या धोखे से उन पैसों को अपने नियंत्रण में ले लिया और डकार गए। जब बाद में बैंकों से महिलाओं के पास लोन चुकाने के नोटिस आने लगे, तब उन्हें अपने साथ हुई इस भारी ठगी का अहसास हुआ।
कलेक्ट्रेट परिसर में जीविका दीदियों का उग्र प्रदर्शन
अपने हक की लड़ाई लड़ने और ठगे गए पैसे वापस पाने के लिए मुजफ्फरपुर के विभिन्न प्रखंडों से आईं सैकड़ों जीविका दीदियों ने सुबह-ससुबह कलेक्ट्रेट परिसर का रुख किया।
नारेबाजी और आक्रोश: हाथों में तख्तियां लिए और न्याय की गुहार लगाती महिलाओं ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता और उनका पैसा वापस नहीं दिलाया जाता, तब तक उनका यह संघर्ष जारी रहेगा।
सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस बल: महिलाओं के अचानक इस प्रकार सड़कों पर उतरने और उग्र प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात करना पड़ा। अधिकारी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पहुंचे।
प्रशासनिक पहल: डीडीसी का आश्वासन और महिलाओं की जिद
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुजफ्फरपुर के उप विकास आयुक्त (DDC) और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रही जीविका दीदियों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनीं।
राशि वापस दिलाने का भरोसा: डीडीसी ने महिलाओं को यह आश्वस्त किया कि जिस भी एजेंसी या व्यक्ति ने उनके साथ धोखाधड़ी कर ऋण राशि हड़पी है, उसकी गहन जांच की जाएगी। प्रशासन ने वादा किया कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए महिलाओं के पैसे वापस दिलाए जाएंगे।
डीएम से मिलने की जिद्द: हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दिए गए आश्वासन के बावजूद जीविका दीदियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। महिलाओं का कहना था कि वे केवल मौखिक आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं और वे अपनी बात सीधे जिलाधिकारी (DM) के सामने रखना चाहती हैं। वे डीएम से मिलकर लिखित और ठोस कार्रवाई की मांग पर अड़ गईं।
इस घटना के सामाजिक और आर्थिक आयाम
मुजफ्फरपुर की यह घटना ग्रामीण भारत में चल रही वित्तीय साक्षरता और महिला सुरक्षा से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े करती है:
सरकारी योजनाओं के नाम पर लूट: कैसे कुछ ठग सरकारी योजनाओं (जैसे लखपति दीदी) की आड़ में सीधे-साधे लोगों को निशाना बनाते हैं, यह इसका जीता-जागता उदाहरण है।
जीविका समूहों की साख पर असर: जीविका दीदियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं। इस प्रकार की ठगी से महिलाओं का सिस्टम से भरोसा उठने का खतरा पैदा हो जाता है।
कड़ी निगरानी की आवश्यकता: प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी किसी भी अनाधिकृत एजेंसी को ग्रामीण महिलाओं के संपर्क में आने से रोका जाए।
मुजफ्फरपुर में जीविका दीदियों द्वारा लखपति बनाने के नाम पर की गई ठगी के खिलाफ किया गया यह प्रदर्शन एक बड़ी प्रशासनिक चेतावनी है। एजेंसी द्वारा ऋण राशि हड़पे जाने से सदमे और गुस्से में आईं इन महिलाओं का संघर्ष यह बताता है कि वे अपने अधिकारों के प्रति अब जागरूक हो रही हैं। डीडीसी द्वारा राशि वापस करने के आश्वासन के बाद भी डीएम से मिलने की उनकी जिद इस बात का प्रतीक है कि वे अब केवल बहकावे में आने वाली नहीं हैं, बल्कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई चाहती हैं। जिला प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि वह जल्द से जल्द इस फर्जीवाड़े की तह तक जाए, दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजे और गरीब महिलाओं के डूबे हुए एक-एक पाई को वापस दिलाकर उन्हें न्याय दे।