बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में दाखिल-खारिज से जुड़ा अहम विधेयक पेश, अब भूमि म्यूटेशन के लिए देना होगा 200 रुपये शुल्क

पटना: बिहार विधानसभा के मौजूदा मानसून सत्र में राज्य सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन के पटल पर रख रही है। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण विधेयक भूमि संबंधी प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने से जुड़ा है। सोमवार को सरकार ने जमीन के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) से संबंधित अहम विधेयक विधानसभा में पेश किया। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, अब राज्य में दाखिल-खारिज की प्रक्रिया के लिए 200 रुपये का निर्धारित शुल्क लिया जाएगा।

सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य राजस्व प्रशासन को अधिक व्यवस्थित बनाना, भूमि अभिलेखों को अद्यतन रखना और म्यूटेशन प्रक्रिया को पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाना है। वहीं विपक्ष ने इस प्रस्ताव को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

क्या है दाखिल-खारिज (म्यूटेशन)?

दाखिल-खारिज, जिसे अंग्रेजी में Mutation कहा जाता है, वह कानूनी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से किसी जमीन के नए मालिक का नाम सरकारी भूमि अभिलेखों में दर्ज किया जाता है।

जब कोई व्यक्ति जमीन खरीदता है, विरासत में संपत्ति प्राप्त करता है, दान के माध्यम से भूमि हासिल करता है या न्यायालय के आदेश के आधार पर स्वामित्व बदलता है, तब राजस्व अभिलेखों में नए स्वामी का नाम दर्ज करने की प्रक्रिया को दाखिल-खारिज कहा जाता है।

यह प्रक्रिया भविष्य में भूमि विवादों को कम करने, सरकारी रिकॉर्ड को अद्यतन रखने तथा संपत्ति से जुड़े अन्य कार्यों के लिए आवश्यक मानी जाती है।

विधेयक में क्या है नया प्रावधान?

सदन में प्रस्तुत विधेयक के अनुसार अब प्रत्येक दाखिल-खारिज आवेदन पर 200 रुपये का शुल्क लिया जाएगा।

सरकार का कहना है कि इस शुल्क से भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण, रिकॉर्ड के रखरखाव, ऑनलाइन सेवाओं को बेहतर बनाने तथा प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने में सहायता मिलेगी।

हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

सरकार ने बताई शुल्क लगाने की वजह

सरकारी पक्ष का तर्क है कि पिछले कुछ वर्षों में भूमि संबंधी सेवाओं का डिजिटलीकरण तेजी से हुआ है। ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल रिकॉर्ड, दस्तावेजों के सत्यापन और तकनीकी व्यवस्था के संचालन पर लगातार खर्च बढ़ रहा है।

इसी को ध्यान में रखते हुए एक नाममात्र का शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव लाया गया है ताकि राजस्व सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

अधिकारियों के अनुसार इससे सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और रिकॉर्ड प्रबंधन को आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी।

आम लोगों पर क्या होगा असर?

यदि विधेयक पारित होकर कानून बन जाता है, तो अब जमीन खरीदने, विरासत में संपत्ति मिलने या अन्य किसी कारण से दाखिल-खारिज कराने वाले लोगों को आवेदन के साथ 200 रुपये शुल्क जमा करना होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह राशि अपेक्षाकृत कम है, लेकिन राज्य में हर वर्ष बड़ी संख्या में म्यूटेशन आवेदन होने के कारण इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

भूमि रिकॉर्ड होंगे अधिक व्यवस्थित

सरकार का मानना है कि नए प्रावधान से भूमि रिकॉर्ड को अद्यतन रखने में मदद मिलेगी। समय पर म्यूटेशन होने से स्वामित्व संबंधी विवादों में कमी आएगी और सरकारी रिकॉर्ड अधिक सटीक बनेंगे।

भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण से नागरिकों को भी अपने रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध कराने की दिशा में सुविधा मिलेगी।

डिजिटल सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा

राज्य सरकार पहले से ही भूमि संबंधी कई सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध करा रही है। नए प्रावधान के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म को और अधिक मजबूत करने की योजना है।

ऑनलाइन आवेदन, दस्तावेजों की डिजिटल जांच, आवेदन की ट्रैकिंग और समयबद्ध निस्तारण जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

विपक्ष ने उठाए सवाल

विधेयक पेश होने के बाद विपक्षी दलों ने शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि भूमि संबंधी सेवाएं पहले से ही आम लोगों के लिए कई स्तरों पर चुनौतीपूर्ण हैं।

विपक्ष का तर्क है कि सरकार को शुल्क लगाने के बजाय प्रक्रिया को और अधिक सरल तथा भ्रष्टाचार मुक्त बनाने पर ध्यान देना चाहिए।

हालांकि सरकार ने कहा कि प्रस्तावित शुल्क केवल प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से रखा गया है और इससे नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी।

विशेषज्ञों की राय

राजस्व मामलों के जानकारों का मानना है कि यदि शुल्क के साथ सेवाओं की गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाता है, तो यह कदम सकारात्मक साबित हो सकता है।

लेकिन यदि केवल शुल्क लिया जाए और प्रक्रिया में सुधार न हो, तो लोगों की समस्याएं बनी रह सकती हैं।

इसलिए विशेषज्ञों ने प्रशासनिक जवाबदेही और डिजिटल व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

विधानसभा में होगी विस्तृत चर्चा

विधेयक पर विधानसभा में विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। सत्ता पक्ष इसे प्रशासनिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रहा है, जबकि विपक्ष आम लोगों पर इसके प्रभाव को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है।

बहस के दौरान विभिन्न दल संशोधन प्रस्ताव भी ला सकते हैं।

राजस्व प्रशासन में सुधार की दिशा

सरकार का कहना है कि भूमि सुधार और राजस्व प्रशासन को आधुनिक बनाना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। भूमि विवादों को कम करना, रिकॉर्ड को अद्यतन रखना और सेवाओं को ऑनलाइन एवं पारदर्शी बनाना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

नए विधेयक को भी इसी व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में प्रस्तुत दाखिल-खारिज संबंधी विधेयक राज्य की भूमि प्रशासन व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। यदि यह विधेयक पारित होकर कानून का रूप लेता है, तो भूमि म्यूटेशन के लिए 200 रुपये का शुल्क देना होगा। सरकार इसे राजस्व सेवाओं के आधुनिकीकरण और रिकॉर्ड प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में आवश्यक कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ मान रहा है। अब सभी की निगाहें विधानसभा में होने वाली चर्चा और विधेयक के अंतिम स्वरूप पर टिकी हैं।