डायल 112 पुलिस टीम की तत्परता से बची गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की जान; जाह्नवी चौक के पास दुर्घटना के बाद त्वरित कार्रवाई कर पहुंचाया अस्पताल

नवगछिया (भागलपुर), कार्यालय संवाददाता: आपातकालीन सेवाओं और पुलिस प्रशासन की मानवीय संवेदना का एक बेहतरीन और सराहनीय उदाहरण नवगछिया अनुमंडल क्षेत्र में देखने को मिला है। नवगछिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले व्यस्ततम जाह्नवी चौक के पास हुई एक अचानक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के लिए डायल 112 की पुलिस टीम देवदूत बनकर सामने आई। आपातकालीन वाहन पर तैनात पुलिसकर्मियों ने बिना एक पल भी गंवाए सूझबूझ और तत्परता का परिचय देते हुए घायल को तुरंत अपनी गाड़ी से स्थानीय अस्पताल पहुंचाया, जिससे समय पर चिकित्सीय सहायता मिलने के कारण उसकी जान बाल-बाल बच गई। पुलिस की इस त्वरित और मानवीय कार्रवाई की पूरे इलाके में जमकर सराहना हो रही है।

घटनाक्रम: कैसे हुआ हादसा और क्या थी स्थिति?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जाह्नवी चौक के समीप मुख्य मार्ग पर यह दुर्घटना उस समय घटी जब सड़क पार कर रहा या जा रहा एक व्यक्ति अचानक तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा:

खून से लथपथ सड़क पर तड़पता रहा घायल: दुर्घटना इतनी भीषण थी कि पीड़ित व्यक्ति के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों से अत्यधिक खून बह रहा था और वह दर्द से बेहाल होकर सड़क किनारे बेहोशी की हालत में तड़प रहा था।

भीड़ तमाशा देखती रही, पर मदद को कोई आगे नहीं आया: आम तौर पर ऐसी दुर्घटनाओं के बाद सड़क पर भारी भीड़ जमा हो जाती है, लेकिन लोग केवल मूकदर्शक बनकर तमाशा देखते रहते हैं या कानून संबंधी झंझटों से बचने के डर से घायल के पास जाने से कतराते हैं। ऐसे नाज़ुक वक्त में वहां से गुजर रही डायल 112 की टीम फरिश्ता बनकर पहुंची।

डायल 112 की टीम ने दिखाई त्वरित कार्रवाई और मानवता

नियमित गश्त पर निकली डायल 112 की पेट्रोलिंग गाड़ी जब जाह्नवी चौक के पास पहुँची, तो पुलिसकर्मियों की नजर सड़क पर गिरे घायल व्यक्ति और वहां जुटी भीड़ पर पड़ी:

तुरंत गाड़ी रोककर संभाला मोर्चा: गाड़ी में मौजूद पुलिस बल के जवानों ने बिना समय गंवाए तुरंत वाहन रुकवाया और मौके पर पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले घायल की नब्ज टटोली और देखा कि उसकी सांसें चल रही हैं लेकिन उसकी हालत बेहद नाज़ुक है।

खुद उठाया घायल को और गाड़ी में लादा: पुलिसकर्मियों ने बिना किसी औपचारिकता या देरी के मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए खुद खून से लथपथ घायल व्यक्ति को उठाया और अपनी डायल 112 की सरकारी गाड़ी में लिटाया।

समय रहते अस्पताल पहुंचने से टला बड़ा हादसा

डॉक्टरों और स्थानीय जानकारों का मानना है कि यदि पुलिस ने कुछ मिनटों की भी और देरी की होती, तो अत्यधिक रक्तस्राव (Bleeding) के कारण पीड़ित की जान जा सकती थी:

अस्पताल में आपातकालीन इलाज: डायल 112 के जवानों ने सायरन बजाते हुए कम से कम समय में घायल को नजदीकी अनुमंडल अस्पताल, नवगछिया पहुंचाया। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में तैनात चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों ने तुरंत मोर्चा संभाला और घायल का प्राथमिक उपचार शुरू किया।

जान खतरे से बाहर: समय पर इलाज मिल जाने के कारण घायल व्यक्ति की स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है। चिकित्सकों ने भी डायल 112 की टीम की इस सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई की खुले दिल से प्रशंसा की है, क्योंकि 'गोल्डन आवर' (दुर्घटना के बाद का शुरुआती अहम समय) में मरीज को अस्पताल पहुंचाना ही उसकी जान बचाने की सबसे बड़ी कुंजी साबित हुआ।

आम जनता में पुलिस की छवि को मिला सकारात्मक बल

इस घटना के बाद से स्थानीय नागरिकों और राहगीरों के बीच डायल 112 सेवा की कार्यशैली को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है:

लोगों की प्रतिक्रिया: आम जनता का कहना है कि बिहार पुलिस की 'डायल 112' आपातकालीन सेवा वाकई संकट के समय आम आदमी के लिए सबसे बड़ा सहारा बन कर उभर रही है। पहले जहां पुलिस के पास पहुंचने में घंटों लग जाते थे, वहीं अब सूचना मिलते ही या पुलिस की नजर पड़ते ही चंद मिनटों में सहायता मिल जाती है।

पुलिस प्रशासन की प्रतिबद्धता: इस सराहनीय कदम ने साबित कर दिया है कि खाकी वर्दी के पीछे एक संवेदनशील इंसान भी धड़कता है जो जनता की रक्षा के लिए हर पल तत्पर रहता है।

नवगछिया के जाह्नवी चौक के पास डायल 112 की तत्परता से घायल व्यक्ति की जान बचाए जाने की यह घटना पुलिस महकमे के लिए गौरव की बात है। यह वाकया न केवल आपातकालीन सेवा की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि मानवता और कर्तव्यनिष्ठा का मेल किस तरह किसी की उजड़ती हुई जिंदगी को फिर से रौशन कर सकता है।