बिहपुर में महागठबंधन का आक्रोश मार्च, जंतर-मंतर पर छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में सड़कों पर उतरे राजद, कांग्रेस और वाम दल

भागलपुर/बिहपुर: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में भागलपुर जिले के बिहपुर में महागठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आक्रोश मार्च निकाला। इस विरोध मार्च का नेतृत्व राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस और वाम दलों के नेताओं ने संयुक्त रूप से किया। बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर सड़कों पर उतरे तथा छात्रों के समर्थन में नारेबाजी की।

प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। नेताओं ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ बल प्रयोग करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के विपरीत है। उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और उनके साथ संवाद स्थापित करने की मांग की।

छात्रों के समर्थन में निकला आक्रोश मार्च

आक्रोश मार्च की शुरुआत बिहपुर के प्रमुख चौक से हुई और विभिन्न मुख्य मार्गों से होते हुए निर्धारित स्थल पर जाकर समाप्त हुई। मार्च के दौरान महागठबंधन के नेताओं ने केंद्र सरकार और संबंधित प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए तथा छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई की निंदा की।

मार्च में शामिल नेताओं ने कहा कि देश के युवा अपने भविष्य और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में उनकी बात सुनने के बजाय बल प्रयोग करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।

राजद, कांग्रेस और वाम दल रहे शामिल

विरोध मार्च में राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और विभिन्न वामपंथी दलों के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी दलों ने एकजुट होकर छात्रों के प्रति समर्थन व्यक्त किया और कहा कि शिक्षा तथा रोजगार जैसे मुद्दों पर युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

नेताओं ने कहा कि महागठबंधन हमेशा छात्रों, युवाओं और आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करता रहा है और भविष्य में भी ऐसे मुद्दों पर आवाज उठाता रहेगा।

युवा राजद ने सरकार पर साधा निशाना

युवा राजद के नेताओं ने कहा कि छात्रों की आवाज को किसी भी प्रकार के दबाव या पुलिस कार्रवाई से दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कठोर व्यवहार किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

युवा राजद के प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि छात्रों की समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से नहीं किया गया, तो आंदोलन और व्यापक हो सकता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह छात्रों की मांगों पर सकारात्मक पहल करे।

लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग

मार्च के दौरान वक्ताओं ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति को दबाने के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए।

नेताओं ने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।

शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ कार्यक्रम

आक्रोश मार्च शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। पूरे कार्यक्रम के दौरान पुलिस प्रशासन भी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात रहा। किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।

मार्च के समापन पर महागठबंधन के नेताओं ने छात्रों के समर्थन में अपना ज्ञापन संबंधित प्रशासन को सौंपने की बात कही। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में भी छात्रों के साथ अन्याय हुआ तो लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रहेगा।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

आक्रोश मार्च के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौजूद रहे। कई लोगों ने कहा कि छात्रों के मुद्दों पर संवाद होना चाहिए और किसी भी समस्या का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषयों पर सरकार और विपक्ष दोनों से गंभीर पहल करने की अपेक्षा जताई।

राजनीतिक संदेश भी रहा प्रमुख

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस आक्रोश मार्च के माध्यम से महागठबंधन ने छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास किया है। आने वाले समय में शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विषय राजनीतिक बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बने रह सकते हैं।

फिलहाल, बिहपुर में निकाला गया यह आक्रोश मार्च शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ, लेकिन इससे छात्रों के आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक चर्चा को नई गति मिलने की संभावना जताई जा रही है।