विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला में कांवरियों के लिए बड़ी सुविधा; नमामि गंगे घाट के साथ-साथ कमराय और बेलारी (असरगंज) में भी खुली 'जीविका दीदी की रसोई'
भागलपुर, विशेष संवाददाता: देवघर जाने वाले शिव भक्तों (कांवरियों) के लिए इस वर्ष का श्रावणी मेला कई मायनों में बेहद खास और सुविधाजनक होने जा रहा है। कांवरिया पथ पर यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को उच्च गुणवत्तायुक्त, शुद्ध और सात्विक भोजन उपलब्ध कराने के वास्ते जिला प्रशासन और जीविका के माध्यम से एक अभूतपूर्व पहल की गई है। इसके तहत सुल्तानगंज के मुख्य नमामि गंगे घाट के अतिरिक्त कांवरिया पथ के प्रमुख पड़ावों कमराय तथा बेलारी (असरगंज) में भी 'जीविका दीदी की रसोई' का शुभारंभ कर दिया गया है। इस व्यवस्था के शुरू होने से अब दूर-दराज से आने वाले कांवरियों को साफ-सुथरा और घरेलू स्वाद वाला पौष्टिक भोजन उचित दरों पर आसानी से मिल सकेगा।
श्रावणी मेले में पहली बार कांवरियों के लिए विशेष पहल
अजगैबीनाथ धाम सुल्तानगंज से अपनी कठिन पैदल यात्रा शुरू करने वाले लाखों कांवरियों को अक्सर रास्ते में शुद्ध खान-पान को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इसे ध्यान में रखते हुए इस बार प्रशासन ने मेला क्षेत्र में भोजन की बेहतरीन व्यवस्था सुनिश्चित की है:
सात्विक और शुद्ध भोजन: 'जीविका दीदी की रसोई' में कांवरियों की धार्मिक आस्था और स्वास्थ्य का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। यहां बनने वाले भोजन में विशेष रूप से बिना लहसुन-प्याज और केवल सेंधा नमक का उपयोग किया जाता है, जो व्रत और कांवर यात्रा के नियमों के पूरी तरह अनुकूल है।
निर्धारित और किफायती दरें: होटलों या ढाबों में मनमाने दामों पर मिलने वाले भोजन से राहत दिलाते हुए जीविका दीदी की इन रसोइयों में सभी खाद्य पदार्थों की दरें सरकार और प्रशासन द्वारा तय की गई हैं, ताकि हर वर्ग के कांवरिया इसका लाभ उठा सकें।
तीन प्रमुख केंद्रों पर जीविका दीदी की रसोई की शुरुआत
प्रशासनिक योजना के अनुसार भागलपुर और आसपास के कांवरिया क्षेत्र में कुल तीन महत्वपूर्ण स्थानों पर यह सुविधा प्रभावी बनाई गई है:
नमामि गंगे घाट (सुल्तानगंज): यात्रा के शुरुआती और सबसे प्रमुख पड़ाव यानी गंगा तट पर स्नान के तुरंत बाद श्रद्धालुओं को सुलभ भोजन मिल सके, इसलिए नमामि गंगे घाट के पास इसे शुरू किया गया है।
कमराय चौक: सुल्तानगंज से आगे बढ़ने पर कमराय क्षेत्र में कांवरियों की भारी भीड़ जुटती है। यहां आकर्षक शिव सुरंग और अन्य आकर्षणों के साथ-साथ अब 'जीविका दीदी की रसोई' खुल जाने से यात्रियों को बड़ा विश्राम और भोजन का ठिकाना मिल गया है।
बेलारी (असरगंज): सुल्तानगंज के बाद कांवरियों का पहला बड़ा और महत्वपूर्ण पड़ाव धांधी बेलारी (असरगंज क्षेत्र) माना जाता है। यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों और ड्रोन शो के साथ-साथ अब जीविका दीदी की रसोई शुरू होने से लंबी पदयात्रा कर थके हुए कांवरियों को गरम और ताज़ा सात्विक भोजन मिल सकेगा।
महिला सशक्तिकरण और रोजगार का माध्यम
यह पहल केवल कांवरियों की सुविधा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है:
जीविका दीदियों का संचालन: इन सभी रसोइयों का संचालन ग्रामीण क्षेत्रों की कुशल 'जीविका दीदियों' द्वारा किया जा रहा है, जिससे उन्हें रोजगार का बेहतर अवसर मिल रहा है।
स्वच्छता और गुणवत्ता पर विशेष जोर: रसोई के संचालन में साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल और गर्म-ताजा खाना परोसने को सर्वोपरि रखा गया है, जिसकी मॉनिटरिंग स्थानीय प्रशासन और जीविका के अधिकारियों द्वारा लगातार की जा रही है।
नमामि गंगे घाट के साथ-साथ कमराय और बेलारी (असरगंज) में 'जीविका दीदी की रसोई' के शुरू होने से श्रावणी मेले में आने वाले शिव भक्तों को बड़ी राहत मिली है। सरकार और प्रशासन की यह जनहितैषी सोच कांवरियों की यात्रा को न केवल सुगम बना रही है, बल्कि उन्हें एक स्वस्थ और सुरक्षित माहौल भी प्रदान कर रही है।