पूर्णिया में पुलिस महकमे में हड़कंप: थाने में बाहरी लोगों की गैरकानूनी बैठकी पर IG विवेकानंद का कड़ा एक्शन, थानाध्यक्ष अमर कुमार पुलिस लाइन क्लोज

बिहार के पूर्णिया जिले से पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को लेकर एक बहुत बड़ी और सख्त खबर सामने आई है। पुलिस महकमे में अनुशासनहीनता और लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ उच्चाधिकारियों ने अब ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपना ली है। इसी कड़ी में पूर्णिया जिले के एक थाने में चल रही भारी अनियमितता और मनमानी पर संज्ञान लेते हुए आईजी (IG) विवेकानंद ने बड़ी कार्रवाई की है। थानाध्यक्ष अमर कुमार को उनके पद से हटाते हुए तत्काल प्रभाव से पुलिस लाइन क्लोज कर दिया गया है। यह प्रशासनिक कार्रवाई थाने के भीतर बाहरी व्यक्तियों के गैरकानूनी हस्तक्षेप और अनावश्यक बैठकी को लेकर की गई है, जिसकी गोपनीय और गंभीर रिपोर्ट अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) द्वारा उच्च अधिकारियों को सौंपी गई थी। इस सख्त कार्रवाई के बाद से पूरे जिले के पुलिस थानों में हड़कंप मच गया है।

 क्या है पूरा मामला और कैसे खुला राज?

यह पूरा मामला पूर्णिया जिले के एक संवेदनशील थाने का है, जहां कानून के रखवाले ही नियमों की धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे थे।

थाने में बाहरी लोगों का कब्जा: आम तौर पर थाने जनता की शिकायत सुनने और अपराधियों पर नकेल कसने के केंद्र होते हैं, लेकिन संबंधित थाने में इसका उलट नजारा देखने को मिल रहा था। थाने के अंदर खाकी की धमक के बीच बाहरी और आपराधिक किस्म के लोगों का आना-जाना आम हो चुका था।

अनावश्यक बैठकी और अनुचित हस्तक्षेप: थानाध्यक्ष अमर कुमार की शह पर थाने के अंदर बाहरी व्यक्तियों की लंबी और अनावश्यक बैठकी लगती थी। आरोप है कि ये बाहरी लोग थाने के प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों में दखलअंदाजी करते थे, जिससे आम जनता और फरियादियों में पुलिस की छवि धूमिल हो रही थी और न्याय मिलने की उम्मीदें कमजोर पड़ रही थीं।

 एसडीपीओ की गोपनीय रिपोर्ट ने खोली पोल

इस पूरे खेल की भनक जब स्थानीय पुलिस अनुमंडल पदाधिकारी (SDPO) को लगी, तो उन्होंने मामले की गंभीरता को समझते हुए एक गुप्त जांच कराई।

सख्त और तथ्यात्मक रिपोर्ट: एसडीपीओ ने अपनी जांच में पाया कि थानाध्यक्ष की कार्यशैली पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है और थाने की गरिमा को ठेस पहुंचाई जा रही है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि किस प्रकार थानाध्यक्ष के कार्यकाल में थाने के गोपनीय कक्षों और कार्यालयों में बाहरी लोग अवैध रूप से डेरा डाले रहते हैं।

आईजी को सौंपी गई रिपोर्ट: एसडीपीओ द्वारा तैयार की गई यह तथ्यात्मक और गंभीर रिपोर्ट सीधे क्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक (IG) विवेकानंद को भेजी गई। रिपोर्ट मिलते ही पुलिस महकमे में खलबली मच गई, क्योंकि मामला सीधे तौर पर पुलिस की साख और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ था।

आईजी विवेकानंद का त्वरित और कड़ा एक्शन

आईजी विवेकानंद ने एसडीपीओ की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद एक पल की भी देरी नहीं की और तुरंत गाज गिराते हुए बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया।

पुलिस लाइन क्लोज: अनुशासनहीनता और पदीय दायित्वों के हनन के आरोप में थानाध्यक्ष अमर कुमार को तत्काल प्रभाव से थाने की कमान से मुक्त कर दिया गया। उन्हें लाइन हाजिर करते हुए पुलिस लाइन क्लोज कर दिया गया है।

संदेश साफ—लापरवाही बर्दाश्त नहीं: उच्चाधिकारियों का यह कदम इस बात का स्पष्ट संदेश है कि यदि कोई पुलिस अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग करेगा या थानों में बिचौलियों व बाहरी तत्वों को संरक्षण देगा, तो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

 पुलिस मुख्यालय की सख्ती: थानों में सीसीटीवी और पारदर्शिता का निर्देश

इस घटना ने एक बार फिर पुलिस मुख्यालय (Police Headquarters) द्वारा थानों में पारदर्शिता लाने के लिए उठाए जा रहे कदमों को केंद्र में ला दिया है।

थानों में सीसीटीवी की अनिवार्यता: बिहार पुलिस मुख्यालय लगातार यह निर्देश देता रहा है कि प्रदेश के हर थाने के हर कोने (खासकर हाजत, कार्यालय और मुख्य द्वार) पर सीसीटीवी कैमरे चालू हालत में होने चाहिए, ताकि पुलिसकर्मियों की गतिविधियों और थाने में आने-जाने वाले लोगों पर पैनी नजर रखी जा सके।

सुधार की दिशा में कड़े कदम: पूर्णिया की यह घटना इस बात का प्रमाण है कि थानों को दलालों और बाहरी तत्वों का अड्डा बनने से रोकने के लिए अब औचक निरीक्षण और गुप्त रिपोर्टिंग का दौर तेज हो गया है। इस कार्रवाई के बाद पूर्णिया समेत आसपास के जिलों के सभी थानाध्यक्षों में यह डर और संदेश साफ है कि अब थाने में जनता का राज चलेगा, किसी बाहरी या बिचौलिए का नहीं।