अब आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से होगी मानव बल की आपूर्ति, पारदर्शी चयन के लिए लॉटरी का लिया गया सहारा

भागलपुर : भागलपुर को आधुनिक, स्वच्छ और स्मार्ट बनाने की दिशा में कार्यरत भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड (Bhagalpur Smart City Limited - BSCL) ने प्रशासनिक व्यवस्था और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए एक अहम कदम उठाया है। कंपनी ने अब कार्यालयों और विभिन्न परियोजनाओं के संचालन के लिए आवश्यक मानव बल (Manpower) की आपूर्ति सीधे तौर पर करने के बजाय आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से कराने का निर्णय लिया है। इस प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए निविदा (Tender) प्रक्रिया पूरी की गई, जिसमें अंतिम रूप से चार योग्य एजेंसियों का चयन किया गया। दिलचस्प बात यह है कि निर्धारित मानदंडों पर खरी उतरने वाली एजेंसियों के बीच अंतिम चयन के लिए प्रशासन को लॉटरी पद्धति (Lottery System) का सहारा लेना पड़ा।

क्या है पूरा मामला और क्यों पड़ी आउटसोर्सिंग की जरूरत?

भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के तहत शहर में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC), सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, पार्क रखरखाव, और विभिन्न तकनीकी व प्रशासनिक कार्य संचालित हो रहे हैं:

कर्मचारियों की आवश्यकता: इन تمام परियोजनाओं के सुचारू संचालन और रखरखाव के लिए बड़ी संख्या में कुशल, अर्ध-कुशल और अकुशल मानव बल की नियमित आवश्यकता होती है।

पारदर्शिता और एकरूपता: प्रशासनिक स्तर पर यह महसूस किया गया कि मानव बल की आपूर्ति में पारदर्शिता लाने और नियमों के अनुपालन के लिए निजी आउटसोर्सिंग एजेंसियों की मदद ली जाए, ताकि कर्मियों के वेतन, पीएफ (PF) और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभों का भुगतान नियमानुसार समय पर हो सके।

निविदा प्रक्रिया और चार एजेंसियों का चयन

मानव बल की आपूर्ति के लिए भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा आधिकारिक रूप से टेंडर निकाला गया था, जिसमें राज्य और देश स्तर की कई नामी-गिरामी एजेंसियों ने हिस्सा लिया:

कड़े मानदंडों पर छंटनी: तकनीकी और वित्तीय बिड (Technical and Financial Bids) की तमाम प्रक्रियाओं को पार करते हुए अंततः चार प्रमुख आउटसोर्सिंग एजेंसियों ने सभी मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया।

समान अंक और गतिरोध: जब चारों एजेंसियां सभी निर्धारित शर्तों और न्यूनतम वित्तीय दरों पर बिल्कुल खरी उतरीं, तो अंतिम रूप से कार्य आवंटन (Work Allocation) को लेकर प्रशासनिक स्तर पर एक कानूनी और तकनीकी गतिरोध उत्पन्न हो गया कि किसे प्राथमिकता दी जाए।

अंतिम चयन के लिए निकाली गई पारदर्शी 'लॉटरी'

किसी भी प्रकार के विवाद या भाई-भतीजावाद के आरोपों से बचने के लिए भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में एक अनूठा और पूरी तरह पारदर्शी तरीका अपनाया गया:

प्रतिभागियों की मौजूदगी में प्रक्रिया: सभी चार चयनित एजेंसियों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया और उनकी मौजूदगी में लॉटरी की प्रक्रिया पूरी की गई।

पर्ची निकालकर हुआ फैसला: अधिकारियों द्वारा पारदर्शी बक्से में चारों एजेंसियों के नाम की पर्चियां डाली गईं और निष्पक्ष तरीके से निकाली गई पर्चियों के आधार पर अंतिम रूप से एजेंसियों के बीच कार्यों का दायरा और अनुबंध (Contract) तय किया गया। इस पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार का विवाद न रहे।

कर्मचारियों और शहरवासियों के लिए इसके क्या होंगे मायने?

प्रशासन के इस कदम से न केवल स्मार्ट सिटी के कामकाज में गति आएगी, बल्कि कार्यप्रणाली भी अधिक जवाबदेह बनेगी:

समय पर मानदेय भुगतान: एजेंसियों के माध्यम से नियुक्त होने वाले कर्मचारियों को अब समय पर वेतन, ईएसआई और पीएफ जैसी सुविधाएं मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

कार्यों में तेजी: मानव बल की कमी से जूझ रहे विभिन्न स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स को अब पर्याप्त संख्या में कर्मी मिल सकेंगे, जिससे शहर के विकास कार्यों में और अधिक तेजी आएगी।

भागलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा आउटसोर्सिंग एजेंसियों के चयन के लिए अपनाई गई यह लॉटरी पद्धति प्रशासनिक पारदर्शिता की एक अनूठी मिसाल पेश करती है। जब नियम और योग्यता के स्तर पर कई दावेदार एक समान खड़े हों, तब निष्पक्षता बनाए रखने के लिए इस तरह के कदम मील का पत्थर साबित होते हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चयनित ये चारों एजेंसियां स्मार्ट सिटी के विकास और रखरखाव में कितनी ईमानदारी और कुशलता से अपने दायित्वों का निर्वहन करती हैं।