हवाईअड्डा क्षेत्र में नक्शा विवाद गहराया; आंदोलनों को धार देने की तैयारी में जुटे स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधियों के समक्ष वार्ड वासियों ने रखी अपनी समस्याएं
भागलपुर, विशेष संवाददाता: सिल्क सिटी भागलपुर के बहुचर्चित और संवेदनशील हवाईअड्डा क्षेत्र में नक्शा पास होने से जुड़ा विवाद एक बार फिर तूल पकड़ता नजर आ रहा है। लंबे समय से प्रशासनिक पचड़े और तकनीकी अड़चनों में फंसे इस भू-भाग के निवासियों की समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। स्थिति यह है कि नक्शा विवाद के कारण मकान निर्माण और जमीन की खरीद-फरोख्त पर लगी अनिश्चितता से त्रस्त स्थानीय लोगों ने अब इस मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई लड़ने की ठान ली है। जन-आंदोलनों को और अधिक धार देने की रणनीति तैयार की जा रही है, जिसके तहत हाल ही में क्षेत्र के वार्ड वासियों ने प्रमुख जनप्रतिनिधियों के समक्ष अपनी पीड़ा खुलकर रखी और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ कड़ा रोष व्यक्त किया।
क्या है पूरा नक्शा विवाद और उसकी जड़ें?
भागलपुर हवाईअड्डा (Bhagalpur Airport) के आसपास के इलाकों में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए मकान का नक्शा पास कराना पिछले कई वर्षों से एक बड़ी चुनौती बना हुआ है:
प्रतिबंधों का दायरा: विमानन सुरक्षा और हवाईअड्डा विस्तार की संभावनाओं का हवाला देते हुए इस क्षेत्र के आसपास के वार्डों में भवनों की ऊंचाई और निर्माण कार्यों पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। इसके चलते स्थानीय भू-स्वामियों और आम नागरिकों को अपने ही निजी जमीनों पर मकान बनाने या पुराने जर्जर मकानों की मरम्मत कराने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
विकास कार्यों पर ब्रेक: नक्शा स्वीकृति न मिलने के कारण बैंक लोन, घर का पुनर्निर्माण और अन्य बुनियादी नागरिक सुविधाएं इस क्षेत्र में ठप पड़ी हैं। जनता का आरोप है कि जिला प्रशासन और नगर निगम के बीच समन्वय की कमी के कारण यह समस्या दिन-प्रतिदिन और अधिक जटिल होती जा रही है।
जनप्रतिनिधियों के समक्ष वार्ड वासियों का फूटा गुस्सा
विवाद के समाधान के लिए हाल ही में क्षेत्र के विभिन्न वार्डों के निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया था:
दर्द साझा करते दिखे नागरिक: बैठक के दौरान वार्ड वासियों ने जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी समस्याएं रखते हुए कहा कि वे वर्षों से अपने ही अधिकारों के लिए प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन सिवाय आश्वासनों के उन्हें कुछ नहीं मिला।
कड़े शब्दों में चेतावनी: जनता ने दो-टूक शब्दों में कहा कि यदि आने वाले दिनों में इस नक्शा विवाद का कोई स्थायी और जनहितैषी समाधान नहीं निकाला गया, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। जनता के इन तेवरों को देखते हुए जनप्रतिनिधियों ने भी इस मामले को विधानसभा और उच्च स्तर पर जोर-शोर से उठाने का आश्वासन दिया है।
आंदोलनों को धार देने की तैयारी: रणनीति तैयार
प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई न होने से आहत होकर अब स्थानीय स्तर पर एक बड़े जन-आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा रही है:
संघर्ष समिति का गठन: हवाईअड्डा क्षेत्र के नागरिकों ने मिलकर एक संयुक्त संघर्ष मोर्चा बनाने का निर्णय लिया है, जो चरणबद्ध तरीके से अपने आंदोलन को आगे बढ़ाएगा।
धरना-प्रदर्शन और घेराव: आगामी दिनों में जिला मुख्यालय, नगर निगम कार्यालय और संबंधित विभागों के समक्ष धरना-प्रदर्शन, भूख हड़ताल तथा प्रशासनिक घेराव करने की योजना बनाई जा रही है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनके बुनियादी अधिकारों की रक्षा और नक्शा पास कराने की प्रक्रिया को सहज नहीं बनाया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
प्रशासनिक दृष्टिकोण और असमंजस की स्थिति
एक तरफ जहां स्थानीय जनता अपने हक के लिए सड़क पर उतरने को तैयार है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक महकमा इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है:
सुरक्षा मानक बनाम जनहित: जिला प्रशासन का तर्क है कि हवाईअड्डे के विकास और विमानन सुरक्षा के तय नियमों के दायरे में ही नक्शा स्वीकृति का मामला सुलझ सकता है। हालांकि, कागजी खानापूर्ति और विभागों के बीच आपसी खींचतान के कारण पिस आम नागरिक रहे हैं।
भागलपुर के हवाईअड्डा क्षेत्र में नक्शा विवाद को लेकर सुलग रही यह चिंगारी अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप लेने लगी है। जनप्रतिनिधियों के समक्ष वार्ड वासियों की यह बैठक इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जनता अब और अधिक प्रशासनिक टालमटोल सहन करने के मूड में नहीं है। यदि समय रहते सरकार और जिला प्रशासन ने इस संवेदनशील मामले पर सकारात्मक पहल नहीं की, तो सिल्क सिटी में एक बड़ा जन-आंदोलन देखने को मिल सकता है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर भी बड़ा दबाव बनेगा।