पीरपैंती के बिनोबा टोला में धूमधाम से मनाया गया शहीद बिकु का शहादत दिवस भारत छोड़ो आंदोलन के महानायक के योगदान को किया गया नमन, डॉ. शिवनाथ दास के नेतृत्व में फहराया गया राष्ट्रध्वज
भागलपुर: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अपनी बहादुरी और सर्वोच्च बलिदान के लिए अमर रहने वाले वीर सपूतों की फेरिस्त में भागलपुर की माटी का नाम हमेशा स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज रहा है। इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड के अंतर्गत आने वाले बिनोबा टोला में ऐतिहासिक 'भारत छोड़ो आंदोलन' (Quit India Movement) के महान शहीद बिकु का शहादत दिवस अत्यंत श्रद्धा और देशभक्ति के माहौल में मनाया गया। प्रख्यात समाजसेवी और शिक्षाविद् डॉ. शिवनाथ दास के नेतृत्व में आयोजित इस प्रेरणादायी कार्यक्रम के दौरान उपस्थित गणमान्य लोगों, युवाओं और नौनिहालों ने शहीद बिकु की आदमकद प्रतिमा व स्मृति स्थल पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान पूरे क्षेत्र में राष्ट्रभक्ति के नारे गूंज उठे और अमर शहीद के अदम्य साहस को याद किया गया।
राष्ट्रध्वज फहराकर और गगनभेदी नारों के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ
शहीद बिकु के शहादत दिवस पर आयोजित इस विशेष आयोजन की शुरुआत सुबह भव्य तरीके से की गई:
राष्ट्रध्वज का आरोहण: मुख्य अतिथि एवं कार्यक्रम के संयोजक डॉ. शिवनाथ दास के करकमलों द्वारा बिनोबा टोला स्थित शहादत स्थल पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया गया। इस दौरान उपस्थित सभी लोगों ने सावधान की मुद्रा में खड़े होकर राष्ट्रगान गाया और तिरंगे को सलामी दी।
इंकलाब जिंदाबाद के नारे: 'शहीद बिकु अमर रहें', 'भारत माता की जय' और 'इंकलाब जिंदाबाद' के गगनभेदी नारों से पूरा पीरपैंती क्षेत्र गूंज उठा, जिससे वहां मौजूद हर शख्स का सीना गर्व से चौड़ा हो गया।
डॉ. शिवनाथ दास के नेतृत्व में शहीद बिकु के योगदान पर विस्तृत चर्चा
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण का केंद्र डॉ. शिवनाथ दास द्वारा दिया गया वह प्रेरक संबोधन रहा, जिसमें उन्होंने शहीद बिकु के जीवन और उनके क्रांतिकारी संघर्षों पर प्रकाश डाला:
अंग्रेजों के खिलाफ हुंकार: डॉ. शिवनाथ दास ने उपस्थित जनसमूह और युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जब सन 1942 में महात्मा गांधी के आह्वान पर पूरा देश 'करो या मरो' की जिद के साथ ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ सड़कों पर उतरा था, तब भागलपुर और पीरपैंती के वीर सपूतों ने भी अपनी जान की परवाह किए बिना अंग्रेजों की ईंट से ईंट बजा दी थी।
शहीद बिकु का बलिदान: उन्होंने बताया कि शहीद बिकु ने देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। उनका यह बलिदान आज की युवा पीढ़ी के लिए देशप्रेम का सबसे बड़ा पाठ है। उन्होंने आह्वान किया कि नई पीढ़ी को ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के इतिहास से प्रेरणा लेनी चाहिए और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देना चाहिए।
बच्चों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी
इस शहादत दिवस समारोह में स्थानीय विद्यालयों के बच्चों और युवाओं ने भारी संख्या में शिरकत कर अपनी देशभक्ति का परिचय दिया:
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और भाषण: स्कूली बच्चों ने स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित देशभक्ति गीत गाए और लघु नाटिकाओं के माध्यम से 1942 के आंदोलन की यादों को ताजा कर दिया।
शहीदों के प्रति कृतज्ञता: नौनिहालों द्वारा प्रस्तुत भाषणों में देश के प्रति समर्पण और बलिदान की महत्ता को बेहद सरल और प्रभावी अंदाज में समझाया गया, जिसे देखकर वहां मौजूद बुजुर्गों की आंखें नम हो गईं।
बिहार के पीरपैंती स्थित बिनोबा टोला में डॉ. शिवनाथ दास के नेतृत्व में मनाया गया शहीद बिकु का यह शहादत दिवस महज एक औपचारिकता नहीं, बल्कि हमारी ऐतिहासिक और राष्ट्रीय धरोहर को सहेजने का एक बेहद सराहनीय प्रयास था। इस तरह के आयोजन आज के दौर में युवाओं को अपनी संस्कृति, इतिहास और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से जोड़े रखने में मील का पत्थर साबित होते हैं। अमर शहीद बिकु की गाथा भागलपुर की माटी में हमेशा अमर रहेगी और आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।